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Know Before Sowing Mustard Technique Can Increase Yields And Also Impact Farmers Income
सरसों की बुवाई से पहले जान लें ये बात : इस तकनीक से बढ़ सकती है उपज, किसानों की आमदनी पर भी असर
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 07 Oct 2026 01:46 PM IST
सार
रिपोर्ट के मुताबिक, बेहतर बीज और वैज्ञानिक खेती-पद्धतियां अपनाने से सरसों की उपज और किसानों की आमदनी बढ़ सकती है। सर्वे में किसानों ने तकनीक अपनाने से औसतन 12.9% अधिक आमदनी और 23% कम फसल नुकसान की जानकारी दी।
सरसों की बुवाई का मौसम नजदीक है। ऐसे में किसानों के लिए सही बीज का चुनाव और वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन उपज बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। एफआईसीसीआई और सीसीएस एनआईएएम की नई रिपोर्ट में राजस्थान और हरियाणा में सरसों की उत्पादकता बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब सरसों का उत्पादन बढ़ाने के लिए खेती का रकबा बढ़ाने के बजाय प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। रिपोर्ट ‘भारत के सरसों क्षेत्र की क्षमता का दोहन: प्रौद्योगिकी, उत्पादकता और किसान समृद्धि’ में बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती और फसल प्रबंधन को उपज बढ़ाने का अहम जरिया बताया गया है।
राजस्थान में घट रही सरसों की उत्पादकता
रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में सरसों की उत्पादकता 2021-22 में 1,716 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो 2025-26 में घटकर 1,552 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रह गई। यानी इस अवधि में उत्पादकता में कमी आई।
वहीं हरियाणा में स्थिति इसके उलट रही। यहां सरसों की उत्पादकता 2021-22 में 1,914 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो 2025-26 में बढ़कर 2,146 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान और हरियाणा जैसे प्रमुख सरसों उत्पादक राज्यों में सही तकनीक और खेती के बेहतर तरीकों को अपनाकर उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है।
किसानों के खेत में दिखा हाइब्रिड बीज का असर
राजस्थान के कुछ किसानों के अनुभव भी बेहतर बीज के फायदे की ओर इशारा करते हैं। वजीरपुर तहसील के डूंगरी गांव के एक किसान पिछले करीब 10 साल से हाइब्रिड सरसों की खेती कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इससे होने वाली अतिरिक्त आमदनी से उन्हें बच्चों की स्कूल फीस भरने और बेहतर शिक्षा दिलाने में मदद मिली।
पिछले साल उन्होंने खेत के एक हिस्से में नया हाइब्रिड बीज लगाया। किसान के अनुसार, इससे उन्हें सामान्य के मुकाबले 8 से 10 क्विंटल ज्यादा उपज मिली।फागी तहसील के कंवरपुरा गांव के एक किसान ने बताया कि उन्होंने 40 बीघा में हाइब्रिड सरसों की खेती की। उन्हें प्रति बीघा करीब 80 किलोग्राम अतिरिक्त उपज मिली। बढ़ी हुई आमदनी से उन्होंने मल्टीक्रॉप थ्रेशर खरीदा। अब वे आसपास के किसानों को भी इसकी सेवा दे रहे हैं।
अलग-अलग इलाकों में अलग फायदे
रिपोर्ट में किसानों ने बताया कि हाइब्रिड सरसों का फायदा सिर्फ उपज बढ़ने तक सीमित नहीं है। जालौर के कुछ किसानों ने बताया कि हाइब्रिड सरसों से उन्हें ओरोबैंकी के प्रबंधन में मदद मिली। ओरोबैंकी एक परजीवी खरपतवार है, जो सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं बूंदी के किसानों ने सरसों में तेल की अधिक मात्रा को प्रमुख फायदा बताया। इससे पता चलता है कि किसानों के लिए बीज चुनते समय सिर्फ उपज ही नहीं, बल्कि स्थानीय मौसम, मिट्टी, कीट-रोग और बाजार की जरूरतों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
100 किसानों पर किया गया सर्वे
एफआईसीसीआई-सीसीएस एनआईएएम के अध्ययन में राजस्थान के अलवर और श्रीगंगानगर तथा हरियाणा के रेवाड़ी जिले के सरसों किसानों को शामिल किया गया। कुल 100 किसानों का सर्वे किया गया। सर्वे में इन जिलों में हाइब्रिड बीज अपनाने की दर अलग-अलग पाई गई-
श्रीगंगानगर : करीब 48-50 फीसदी
अलवर : करीब 65-70 फीसदी
रेवाड़ी : करीब 75-80 फीसदी
सर्वे में शामिल किसानों ने बताया कि तकनीक अपनाने और बेहतर खेती के तरीकों से उनकी खेत से होने वाली आमदनी में औसतन 12.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वहीं फसल का नुकसान करीब 23 फीसदी तक कम होने का अनुमान लगाया गया।
सिर्फ बीज नहीं, पूरी खेती का तरीका बदलना जरूरी
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ अच्छा या हाइब्रिड बीज इस्तेमाल करने से ही अधिक उपज की गारंटी नहीं मिलती। इसके साथ फसल की सही देखभाल भी जरूरी है। इसके लिए किसानों को इन बातों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है-
बुवाई से पहले वैज्ञानिक तरीके से बीज उपचार
समय पर और एक समान दूरी पर बुवाई
फसल के अनुसार संतुलित खाद और पोषण
जरूरत के मुताबिक सिंचाई
समय पर खरपतवार नियंत्रण
कीट और रोगों का एकीकृत प्रबंधन
स्थानीय जलवायु और मिट्टी के हिसाब से उपयुक्त बीज का चुनाव
इन तरीकों से फसल की बढ़वार बेहतर होने के साथ उत्पादन और गुणवत्ता में भी सुधार किया जा सकता है।
खेत में प्रदर्शन और प्रशिक्षण की जरूरत
रिपोर्ट में किसानों को बीज चुनने में मदद देने के लिए जिला स्तर पर खेत प्रदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की सिफारिश की गई है। इससे किसान अलग-अलग बीजों को अपने खेत में आजमाकर उनके प्रदर्शन की तुलना कर सकेंगे। किसान बीज का चुनाव करते समय उपज, तेल की मात्रा, फसल पकने का समय, कीट-रोग से बचाव, खेती की लागत और संभावित आमदनी जैसे पहलुओं को देख सकेंगे।
सरसों किसानों की आय बढ़ाने में अहम
सरसों भारत की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय का जरिया होने के साथ स्थानीय बाजारों और तेल प्रसंस्करण उद्योग को भी कच्चा माल उपलब्ध कराती है। घरेलू खाद्य तेल की जरूरत पूरी करने में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरसों की खेती में उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसानों को सही बीज की जानकारी, वैज्ञानिक फसल प्रबंधन, समय पर तकनीकी सलाह और बेहतर बाजार से जुड़ाव उपलब्ध कराना जरूरी है। अगर किसान अपनी स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर बीज का चुनाव करें और बुवाई से लेकर कटाई तक वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो कम लागत में अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी हासिल करने की संभावना बढ़ सकती है।
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