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Inflation Looms Large During Festivals 6 Of Kitchen Budget Could Be Ruined Rbi Issues Major Alert
त्योहारों में महंगाई का साया! : रसोई का बजट बिगाड़ सकता है 6% का आंकड़ा, RBI ने दिया बड़ा अलर्ट
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 07 Oct 2026 01:22 PM IST
सार
RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। दिसंबर तिमाही में महंगाई 6% तक पहुंचने का अनुमान है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, कमजोर रुपया और अल-नीनो इसके प्रमुख जोखिम हैं।
देश में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। इससे पहले केंद्रीय बैंक ने 5 फीसदी महंगाई का अनुमान लगाया था। RBI के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, खाद्य वस्तुओं की लागत, रुपये की कमजोरी और अल-नीनो जैसी स्थितियां आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव बढ़ा सकती हैं।
RBI का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की दिसंबर तिमाही में महंगाई 6 फीसदी तक पहुंच सकती है। यह वह समय होगा, जब देश में त्योहारी सीजन के कारण बाजार में खरीदारी बढ़ती है। ऐसे में महंगाई बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब और घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
RBI ने क्यों बढ़ाया महंगाई का अनुमान?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले की जानकारी देते हुए महंगाई को लेकर कई जोखिम गिनाए। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, खाद्य पदार्थों की बढ़ती लागत, कमजोर रुपया और मौसम से जुड़े जोखिम प्रमुख हैं।
केंद्रीय बैंक ने अलग-अलग तिमाहियों के लिए भी महंगाई का अनुमान जारी किया है। इसके मुताबिक दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 फीसदी, दिसंबर तिमाही में 6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.7 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2028 की जून तिमाही में इसके 5.6 फीसदी रहने का अनुमान है। RBI के मुताबिक अगस्त में 4 फीसदी से ज्यादा महंगाई वाली वस्तुओं का भार बढ़कर करीब 37 फीसदी हो गया। इसका मतलब है कि महंगाई का दबाव अब पहले के मुकाबले ज्यादा चीजों पर दिखाई दे रहा है।
कच्चा तेल सबसे बड़ी चिंता
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत पर पड़ता है। अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो पेट्रोल-डीजल, परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर धीरे-धीरे दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। रुपये की कमजोरी भी इस दबाव को बढ़ा सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने पर भारत को कच्चा तेल और दूसरी आयातित वस्तुएं खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
अल-नीनो से भी बढ़ सकता है खाद्य महंगाई का दबाव
महंगाई बढ़ने की दूसरी बड़ी वजह अल-नीनो को माना जा रहा है। अल-नीनो के कारण मानसून पर असर पड़ सकता है। बारिश कम या असमान होने पर फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर सब्जियों, अनाज और दूसरी कृषि उपज की कीमतों पर पड़ सकता है। अगर खाद्य वस्तुएं महंगी होती हैं तो इसका असर कुल खुदरा महंगाई पर भी पड़ता है।
अगस्त में खुदरा महंगाई 4.82 फीसदी
अगस्त में देश की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई। यह लगातार तीसरा महीना था, जब महंगाई RBI के 4 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर रही। खाने-पीने की चीजों और ऊर्जा की कीमतों को महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। इसके अलावा उत्पादन लागत बढ़ने से दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना पर नजर
महंगाई बढ़ने के अनुमान के बीच अब बाजार की नजर RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर है। कुछ अर्थशास्त्रियों ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई थी। हालांकि, ब्याज दर में बढ़ोतरी का फैसला महंगाई, आर्थिक विकास, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंक भी सतर्क
महंगाई का दबाव सिर्फ भारत में नहीं है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक भी महंगाई और ऊर्जा कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका के फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान ने भी महंगाई, ऊर्जा की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव से जुड़े जोखिमों को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। ऐसे में आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतें, मौसम और खाद्य वस्तुओं की कीमतें यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी कि आम लोगों को महंगाई से कितनी राहत मिलती है।
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