कर्नाटक में सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है। राज्य के उपमुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर के मुताबिक, राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री को कई बार पत्र लिखकर मदद मांगी है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने केंद्र की अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) से सूखे का निष्पक्ष और व्यापक आकलन कर जल्द राहत दिलाने की अपील की।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के आधिकारिक आवास ‘कृष्णा’ में केंद्रीय टीम को संबोधित करते हुए परमेश्वर ने कहा कि कर्नाटक पिछले कई दशकों के सबसे गंभीर सूखे में से एक का सामना कर रहा है। इसका असर खेती, बागवानी, पेयजल और ग्रामीण लोगों की आजीविका पर पड़ा है।
217 तालुक सूखाग्रस्त घोषित
परमेश्वर के अनुसार, कर्नाटक के 240 में से 217 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। इनमें से अब तक 177 तालुकों का आकलन किया जा चुका है। इन क्षेत्रों में करीब 47.09 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र में नुकसान का आकलन किया गया है। इससे करीब 46,324.50 करोड़ रुपये के आर्थिक नुकसान का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि कई जगह किसानों ने बारिश के बाद फसल बोई, लेकिन फसल में केवल दो पत्तियां आने के बाद ही वह सूख गई। बारिश होने पर किसानों ने दोबारा बुवाई की, लेकिन दूसरी फसल भी सूख गई। राज्य सरकार का कहना है कि कई इलाकों में अब खेतों में फसल बची ही नहीं है।
NDRF से 7,142 करोड़ रुपये की मांग
राज्य सरकार ने सूखे से राहत के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (NDRF) से सहायता मांगी है। सरकार ने पहले 101 सूखाग्रस्त तालुकों के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये का ज्ञापन भेजा था। इसके बाद 1 अक्टूबर को 76 अतिरिक्त तालुकों के लिए 3,437.34 करोड़ रुपये की मांग की गई। इस तरह 177 आकलन किए गए तालुकों के लिए राज्य ने कुल 7,142.64 करोड़ रुपये की सहायता मांगी है।
परमेश्वर ने कहा कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों की पहचान केंद्र के सूखा प्रबंधन मैनुअल में तय मानकों के आधार पर की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अतिरिक्त सहायता नहीं मांग रही, बल्कि जमीनी स्थिति का निष्पक्ष आकलन चाहती है।
मानसून में 35 फीसदी बारिश की कमी
परमेश्वर के मुताबिक, वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कर्नाटक में सामान्य से 35 फीसदी कम बारिश हुई। राज्य में इस दौरान केवल 551 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो 1956 के बाद राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दूसरी सबसे कम बारिश बताई गई है। राज्य के 31 में से 30 जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई है। वहीं 240 में से 209 तालुकों में बारिश सामान्य से कम रही।
861 ग्रामीण इलाकों में टैंकर से पानी
सूखे के साथ पेयजल संकट भी बढ़ रहा है। राज्य सरकार के अनुसार, फिलहाल 861 ग्रामीण क्षेत्रों में 227 टैंकरों और 720 किराए के बोरवेल के जरिए पेयजल पहुंचाया जा रहा है। सरकार का अनुमान है कि आने वाले महीनों में 2,300 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में पेयजल की कमी हो सकती है। इसके लिए आपातकालीन कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं।
ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग के जरिए पेयजल व्यवस्था के लिए 306 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। परमेश्वर ने कहा कि आने वाले महीनों में पेयजल और पानी की उपलब्धता बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने स्थिति से निपटने के लिए केंद्र से और सहायता की जरूरत बताई।
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