केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के दूसरे चरण के तहत गांवों में पीने के पानी की सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए सुजल गांव आईडी जारी की जा रही है। जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि देश की 75 प्रतिशत बस्तियों को यह आईडी दी जा चुकी है।
केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के दूसरे चरण के तहत गांवों में पीने के पानी की सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए सुजल गांव आईडी जारी की जा रही है। जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि देश की 75 प्रतिशत बस्तियों को यह आईडी दी जा चुकी है।
सुजल गांव आईडी क्या है?
सुजल गांव आईडी एक तरह का खास पहचान नंबर है। यह नंबर केवल उन गांवों या बस्तियों को दिया जाता है, जो जल जीवन मिशन के तहत पानी की सप्लाई के तय मानकों और नियमों को पूरा करते हैं। इसे राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जारी किया जाता है। इसका मुख्य मकसद यह है कि पानी की सप्लाई वाले इलाकों की आसानी से पहचान हो सके, उन पर नजर रखी जा सके और यह पक्का किया जा सके कि लोगों को हमेशा साफ पानी मिलता रहे।
जहां सुजल गांव आईडी गांवों को दी जाती है, वहीं सुजलम भारत आईडी गांवों में पानी पहुंचाने वाली परियोजनाओं को दी जाती है। इसके लिए सुजलम भारत नाम का एक डिजिटल ढांचा तैयार किया गया है, जिसे पीएम गतिशक्ति' प्लेटफॉर्म और सैटेलाइट मैपिंग तकनीक से जोड़ा गया है। इससे पानी के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर की एक ही जगह पर ऑनलाइन निगरानी की जा सकती है।
इन आईडी के बनने से क्या फायदे होंगे?
सरकार के अनुसार, गांवों और योजनाओं को यह डिजिटल पहचान मिलने से कई बड़े फायदे होंगे पानी के मुख्य स्रोत (जहां से पानी आता है) से लेकर घर के नल तक पानी पहुंचने की पूरी प्रक्रिया पर सैटेलाइट मैपिंग के जरिए नजर रखी जा सकेगी। डिजिटल पहचान होने से योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और जल जीवन मिशन के कामों में होने वाली किसी भी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी पर लगाम लगेगी। डिजिटल रिकॉर्ड होने से यह तुरंत पता चल जाएगा कि कहां काम हो चुका है और कहां बाकी है। इससे एक ही जगह पर दो बार काम (Duplication) होने से बचेगा। अगर किसी योजना में कोई खराबी आती है, तो डेटा के आधार पर उसका सही समय पर सुधार (Operation & Maintenance) किया जा सकेगा।
अब तक 75% लक्ष्य हुआ पूरा
सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 10 अगस्त 2026 तक देश की कुल 16,96,213 ग्रामीण बस्तियों में से 12,67,808 बस्तियों को सुजल गांव आईडी जारी की जा चुकी है। इसका मतलब है कि देश की 75 प्रतिशत बस्तियां इस डिजिटल निगरानी प्रणाली से जुड़ चुकी हैं।