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दिवाली के बाद महंगाई का झटका? : पाम ऑयल की सप्लाई घटने का खतरा, बिस्कुट-नमकीन हो सकते हैं महंगे

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 12 Oct 2026 02:58 PM IST
सार

  • 2027 में उत्पादन घटने का खतरा: इंडोनेशिया में पाम ऑयल का उत्पादन 40–50 लाख टन तक घटने की आशंका जताई गई है।

  • घरेलू खपत बढ़ने का अनुमान: B50 बायोडीजल कार्यक्रम पूरी तरह लागू होने पर इंडोनेशिया में पाम ऑयल की खपत करीब 20 लाख टन बढ़ सकती है।

  • कीमतों में तेजी की आशंका: उत्पादन घटने और घरेलू मांग बढ़ने से निर्यात के लिए तेल की उपलब्धता कम हो सकती है।

  • FMCG कंपनियों की लागत बढ़ सकती है: पाम ऑयल का इस्तेमाल बिस्कुट, चिप्स, नमकीन और बेकरी उत्पादों में होता है।

बिस्कुट-नमकीन हो सकते हैं महंगे
बिस्कुट-नमकीन हो सकते हैं महंगे - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दिवाली के दौरान बिस्कुट, नमकीन, चिप्स और दूसरे पैकेट वाले खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की तैयारी के बीच खाद्य तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। दुनिया में पाम ऑयल के सबसे बड़े उत्पादक इंडोनेशिया में अगले साल इसका उत्पादन घटने की आशंका है। अगर ऐसा हुआ तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल महंगा हो सकता है। इसका असर भारत में खाद्य तेल कंपनियों के साथ बिस्कुट, स्नैक्स और दूसरे पैकेट वाले खाद्य पदार्थ बनाने वाली कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है।

आईटीसी, ब्रिटानिया, नेस्ले इंडिया, पेप्सिको इंडिया, हल्दीराम और बिकाजी फूड्स जैसी कंपनियां अपने उत्पादों में पाम ऑयल और उससे बनने वाले दूसरे तेलों का इस्तेमाल करती हैं। वहीं, अडानी विल्मर (AWL एग्री बिजनेस), पतंजलि फूड्स, बंजी और एडीएम एग्रो इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों के लिए भी खाद्य तेल की खरीद महंगी होने का जोखिम है। हालांकि, कीमतों में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह उत्पादन, मांग और कंपनियों की खरीद रणनीति पर निर्भर करेगा।

अगले साल 40 से 50 लाख टन घट सकता है उत्पादन
इंडोनेशिया पाम ऑयल एसोसिएशन (GAPKI) के डॉ. मोहम्मद फाधिल हसन ने आशंका जताई है कि अल नीनो के कारण मौसम प्रभावित हुआ तो 2027 में इंडोनेशिया का पाम ऑयल उत्पादन 40 से 50 लाख टन तक घट सकता है। साल 2026 में उत्पादन मोटे तौर पर स्थिर रहने का अनुमान है।

इसके अलावा, इंडोनेशिया अपने बायोडीजल कार्यक्रम के तहत डीजल में पाम ऑयल से बने ईंधन का मिश्रण बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। अगर B50 कार्यक्रम पूरी तरह लागू होता है, तो देश में पाम ऑयल की घरेलू खपत करीब 20 लाख टन और बढ़ सकती है।

इसका मतलब है कि इंडोनेशिया में पाम ऑयल का ज्यादा इस्तेमाल घरेलू जरूरतों और ईंधन बनाने में हो सकता है। इससे दूसरे देशों को निर्यात के लिए उपलब्ध तेल की मात्रा घट सकती है। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 2026 के औसत स्तर से ऊपर जा सकती हैं।

कीमतें बढ़ेंगी, लेकिन बहुत ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं
गोदरेज इंटरनेशनल के निदेशक दोराब मिस्त्री ने मुंबई में आयोजित GLOBOIL India 2026 सम्मेलन में कहा कि 2027 में पाम ऑयल की कीमतों का रुख तेजी वाला हो सकता है, लेकिन बहुत तेज उछाल की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

उनके मुताबिक, कीमतें ज्यादा बढ़ने पर उपभोक्ता खपत कम कर सकते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की मजबूती भी जिंस बाजारों में तेजी को सीमित कर सकती है। इसका अर्थ है कि पाम ऑयल की सप्लाई घटने से कीमतें बढ़ सकती हैं, लेकिन कमजोर मांग इस तेजी पर अंकुश लगा सकती है।

खाद्य तेल महंगा हुआ तो कंपनियों का मुनाफा घट सकता है
पतंजलि फूड्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव अस्थाना ने बिजनेसलाइन से कहा कि खाद्य तेल की ऊंची कीमतें चिंता का विषय हैं। इससे एफएमसीजी यानी रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, उन्होंने बताया कि पतंजलि फूड्स में खाद्य तेल की खरीद और कीमतों से जुड़े जोखिमों पर नजर रखने के लिए एक अलग टीम है। इससे कंपनी को इन जोखिमों से निपटने में मदद मिलती है। इसके बावजूद, आने वाले समय में बाजार की स्थिति पर करीबी नजर रखना जरूरी है। कंपनियों के सामने अब दो विकल्प हैं। वे संभावित कमी से पहले ही अगले साल के लिए तेल खरीदने के सौदे कर सकती हैं या इंतजार कर सकती हैं कि वैश्विक मांग घटने से कीमतें नीचे आ जाएं।

बिस्कुट, नमकीन और चिप्स बनाने वाली कंपनियों पर असर
पाम ऑयल का इस्तेमाल तलने, बिस्कुट, मिठाइयां, बेकरी उत्पाद और पैकेट वाले स्नैक्स बनाने में बड़े पैमाने पर होता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत बढ़ने से खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।

हालांकि, इसका असर सभी कंपनियों पर एक जैसा नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियों ने तेल की खरीद किस कीमत पर की है, उनके पास कितने समय के लिए स्टॉक है और वे बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकती हैं। अगर कंपनियां लागत का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं तो कुछ खाद्य उत्पाद महंगे हो सकते हैं। वहीं, अगर वे कीमतें नहीं बढ़ाती हैं तो उनके मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।

भारत सरकार की ओर से कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कमी का भी जिक्र किया गया। दोराब मिस्त्री ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे घरेलू रिफाइनिंग उद्योग के मार्जिन को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

यूरोप को ज्यादा सप्लाई मिलने से बढ़ सकती है प्रतिस्पर्धा
इंडोनेशिया और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार व्यवस्था भी पाम ऑयल बाजार को प्रभावित कर सकती है। GAPKI के मुताबिक, यूरोप के लिए इंडोनेशिया से कच्चे और प्रसंस्कृत पाम ऑयल की शुरुआती वार्षिक रियायती कोटा सीमा 19 लाख टन रखी गई है। इसमें नौ साल तक हर साल 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान है।

हालांकि, यह व्यवस्था लागू होने और टिकाऊ उत्पादन से जुड़ी शर्तों पर निर्भर करेगी। इससे यूरोपीय खरीदारों को इंडोनेशियाई पाम ऑयल की उपलब्धता बढ़ सकती है। लेकिन इसके कारण भारत को मिलने वाली सप्लाई घटेगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

खाद्य तेल और बायोडीजल के बीच संतुलन की चुनौती
पाम ऑयल उत्पादक देशों की परिषद (CPOPC) ने भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई है। परिषद के मुताबिक, उत्पादक देशों को खाद्य तेल के निर्यात और अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन बनाना होगा। CPOPC की महासचिव इज्जाना सल्लेह ने कहा कि भारत पाम ऑयल उत्पादक देशों के लिए सिर्फ निर्यात बाजार नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा और भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था का भी अहम साझेदार है।

परिषद की उपमहासचिव डॉ. मुस्धालिफाह मचमुद ने कहा कि खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा दोनों जरूरी हैं। लेकिन बायोडीजल से जुड़ी नीतियों में बदलाव की जानकारी समय पर मिलनी चाहिए, ताकि भारत के खरीदार अपनी खरीद की योजना बना सकें।

परिषद के अनुसार, उसके सदस्य देशों का संयुक्त पाम ऑयल उत्पादन 2021 में करीब 6.6 करोड़ टन से बढ़कर 2025 में 7.3 करोड़ टन हो गया। आने वाले वर्षों में उत्पादन बढ़ाने के लिए पुराने पौधों को बदलना, बेहतर पैदावार हासिल करना और छोटे किसानों की उत्पादकता बढ़ाना जरूरी होगा।

2027 की सप्लाई के लिए अभी से तैयारी
पाम ऑयल उत्पादक देशों की परिषद के एक प्रतिनिधि के मुताबिक, भारतीय खरीदार कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए दूसरे वनस्पति तेलों के विकल्प तलाश रहे हैं। साथ ही, वे 2027 के लिए खरीद के सौदों पर बातचीत भी कर रहे हैं।

फिलहाल कंपनियों की प्राथमिकता दिवाली के दौरान बढ़ने वाली मांग को पूरा करना है। लेकिन उनके सामने बड़ी चुनौती अगले साल की सप्लाई और कीमतों का अनुमान लगाने की है। यदि इंडोनेशिया में उत्पादन घटता है और घरेलू खपत बढ़ती है, तो पाम ऑयल महंगा हो सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक मांग कमजोर पड़ने पर कीमतों में तेजी सीमित भी रह सकती है।
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