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मखाने की घरेलू मांग में तेजी : महानगरों तक चढ़े भाव, PM मोदी के सुपरफूड मंत्र से कैसे बदली बाजार की तस्वीर?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 27 Oct 2026 05:19 PM IST
सार

  • बीते कुछ समय में मखाना बाजार को घरेलू समेत निर्यात बाजार में मजबूती मिली है
  • इस मजबूती के पीछे पीएम मोदी के प्रमोशन का भी जिक्र किया जाता है, जिसमें उन्होंने मखाने को सुपरफूड की तरह पेश किया है।
  • बिहार में मखाने की कीमत 500 से 1,600 रुपये किलो तक
  • ब्रांडेड मखाने के पैकेट 2,400 रुपये किलो तक
  • मखाने का आकार-वजन समेत कई कारक उसकी कीमत तय करते हैं।

पीएम मोदी ने मखाने को सुपरफूड की तरह पेश कर इसकी बाजार में मांग को मजबूती करने में भूमिका निभाई है।
पीएम मोदी ने मखाने को सुपरफूड की तरह पेश कर इसकी बाजार में मांग को मजबूती करने में भूमिका निभाई है। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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साल 2025 की शुरुआत के बाद पीएम मोदी अपनी रैलियों और मन की बात कार्यक्रम में बिहार के मखाने का जिक्र करते आए हैं। 2025 के फरवरी महीने में भागलपुर में आयोजित एक रैली के दौरान पीएम मोदी ने बताया कि वे साल में 300 दिन मखाना खाते हैं। इस दौरान उन्होंने मखाने को सुपरफूड की तरह पेश किया। दूसरी तरफ अपने मन की बात कार्यक्रम में समय समय पर प्रधानमंत्री ने मखाने से जुड़ी सफलता की कहना साझा कीं। यह कारण है कि घरेलू बाजार में बढ़ती मखाने की मांग के पीछे पीएम मोदी और मन की बात कार्यक्रम की भी जिक्री किया जाता है। 

कठिन है मखाना तैयार करने की प्रक्रिया
मखाने को तालाब से निकालकर उसे भूनकर दाना बनाने की प्रक्रिया बहुत जटिल और मेहनत वाली होती है। बाजार में सबसे महंगा वही मखाना बिकता है जिसका दाना आकार में बड़ा, वजन में हल्का और दूधिया सफेद रंग का होता है। व्यापारियों के अनुसार, मखाने की कीमत मुख्य रूप से दाने के आकार पर निर्भर करती है, जिसे 4 सूता (छोटा), 5 सूता (मध्यम) और 6 सूता (बड़ा प्रीमियम) की श्रेणियों में बांटा जाता है।

उत्पादक और गैर-उत्पादक जिलों में दामों का अंतर
मखाने के मुख्य उत्पादक जिलों कटिहार और पूर्णिया में पैदावार होने के कारण दाम कुछ हद तक नियंत्रण में हैं। कटिहार में भाव 700 से 1000 रुपये प्रति किलो है। पूर्णिया में इसका थोक भाव 500-1000 रुपये और खुदरा भाव 600-1200 रुपये प्रति किलो चल रहा है। यहां के प्रगतिशील किसान तालाबों में मखाने के साथ-साथ मछली पालन का एकीकृत मॉडल अपनाकर दोहरा मुनाफा कमा रहे हैं।

दूसरी ओर, जिन जिलों में मखाने का उत्पादन नहीं होता, वहां कीमतें अधिक हैं। भागलपुर में बड़े मॉल और मेवों की दुकानों में अधिक खपत के कारण खुदरा दाम 800 से 1200 रुपये प्रति किलो तक हैं। खगड़िया में भाव 1000 से 1400 रुपये प्रति किलो है। इसी तरह बांका में 1000-1200 रुपये और लखीसराय में 900-1100 रुपये प्रति किलो का रेट है। जमुई में  मखाने का औसतन भाव 1000 रुपये प्रति किलो है।

बड़े दाने और ब्रांडेड पैकेट की कीमत सबसे ज्यादा
मधेपुरा मंडी में 4 सूता (छोटा) दाना थोक में 600-650 रुपये और खुदरा में 750-800 रुपये में बिक रहा है। वहीं 6 सूता का बड़ा दाना खुदरा बाजार में 1200 से 1500 रुपये में मिल रहा है, जबकि इसके ब्रांडेड पैकेट की कीमत 1700 से 2400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

किशनगंज और अररिया के बाजारों में भी 4 सूता मखाना 700-800 रुपये, 5 सूता 1000-1200 रुपये और 6 सूता 1400-1600 रुपये प्रति किलो के भाव पर है। यहां भुने हुए मखाने का पैकेट 1800 से 2200 रुपये में बिक रहा है। मुंगेर की गोला मंडी के थोक व्यापारियों (सनत कुमार और गोपाल साह) के अनुसार, थोक बाजार में मखाना 600 से 1400 रुपये प्रति किलो है। वहीं खुदरा में छोटा दाना 250 से 700 रुपये और उच्च श्रेणी के ब्रांडेड पैकेट 1100 से 1500 रुपये प्रति किलो की दर पर बेचे जा रहे हैं।


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