महाराष्ट्र की अधिकतर तहसीलें सूखे की जद में आ चुकी हैं। खरीफ फसलों को हुए नुकसान के कारण किसान आय दबाव में आने का खतरा है। इस बीच मंगलवार को 12 हजार से ज्यादा किसान इगतपुरी से मुंबई के लिए पैदल मार्च पर निकले। अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले आयोजित इस मार्च में किसानों तक जल्द से जल्द आर्थिक मदद पहुंचाने से लेकर फसल बीमा के भुगतान की मांग उठी। खबरों के अनुसार, किसानों के प्रतिनिधिमंडल से सीएम फडणवीस शाम को मुलाकात कर सकते हैं।
अखिल भारतीय किसान सभा ने कर्जमाफी नीति में बदलाव की मांग की है। संगठन का मानना है कि समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को भी कर्जमाफी का लाभ मिलना चाहिए। इसके अलावा सूखे की मार झेलने वाले किसानों को पर्याप्त राहत से लेकर फसल बीमा के जल्द निपटारे की भी मांग उठी है। वहीं, वन भूमि जोतने वालों को कानूनी मालिकाना हक देना भी प्रमुख मांगों में शामिल है। अपनी मांगों में संगठन ने नमो शेतकरी महासम्मान निधि की किस्तों का समय पर भुगतान और ग्रामीण मजदूरों को उचित मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा देने पर भी जोर दिया।
महाराष्ट्र सूखे की जद में, सरकार ने उठाए ये कदम
अधिकतर महाराष्ट्र सूखे की जद में है, राज्य सरकार ने कुल 358 तहसीलों में से 306 को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है। हाल ही में सीएम फडणवीस ने सूखे की मार झेलने वाले किसानों को दिवाली से पहले पांच हजार रुपेय की शुरुआती राहत देने का एलान किया। इसके अलावा राज्य सरकार ने बैंकों को लोन की वसूली रोकने का आदेश दिया।
राज्य ने केंद्र से मांग 17,500 करोड़ का पैकेज
मराठवाड़ा में जल संकट गहराने के कारण पानी के टैंकरों की संख्या बढ़ाई गई है और उनकी जीपीएस ट्रैकिंग की जा रही है। अगस्त 2027 तक के लिए पेयजल सुरक्षित रखने का फैसला लिया गया है। खरीफ और रबी दोनों फसलों को भारी नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर ₹17,500 करोड़ के राहत पैकेज की मांग की है, जिसमें ₹13,000 करोड़ फसल नुकसान और ₹4,500 करोड़ चारे के प्रबंधन के लिए शामिल हैं। हाल ही में 11 सदस्यीय केंद्रीय टीम ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा किया है।