उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए VL हिमाद्री (FH 3879) एक उपयोगी किस्म हो सकती है। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-VPKAS), अल्मोड़ा ने विकसित किया है। यह मक्का की जल्दी तैयार होने वाली संकर किस्म है, जो करीब 90 से 95 दिन में पककर तैयार हो जाती है।
15 फीसदी से ज्यादा अधिक औसत उपज
संस्थान के अनुसार, VL हिमाद्री की औसत उपज 4,864 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। यह जांच में शामिल तुलना वाली किस्म VMH 45 से करीब 15.21 फीसदी अधिक है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में कम समय में मक्का की अच्छी उपज लेने की संभावना बनती है।
V 495 और V 461 के क्रॉस से विकसित
VL हिमाद्री को V 495 × V 461 के क्रॉस से विकसित किया गया है। यानी मक्का की इन दोनों लाइनों को मिलाकर इस संकर किस्म को तैयार किया गया है। इसका विकास पहाड़ी क्षेत्रों की खेती की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है।
— Indian Council of Agricultural Research. (@icarindia) September 21, 2026
पत्ती झुलसा रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोध
यह किस्म मक्का में होने वाले टर्सिकम लीफ ब्लाइट और मेडीस लीफ ब्लाइट के प्रति मध्यम प्रतिरोध दिखाती है। ये दोनों पत्ती से जुड़े रोग हैं, जो फसल की बढ़वार और उपज को प्रभावित कर सकते हैं।
बारिश पर निर्भर और जैविक खेती के लिए सिफारिश
VL हिमाद्री को उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए सुझाया गया है। इसे खास तौर पर जैविक और बारिश पर निर्भर खेती की परिस्थितियों के लिए उपयुक्त बताया गया है। संस्थान के अनुसार, कम अवधि में तैयार होने वाली यह संकर किस्म पहाड़ी किसानों को खेती की अवधि कम रखने और समय पर फसल लेने में मदद कर सकती है।
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