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ICAR-VPKAS: पहाड़ी किसानों के लिए विकसित की नई मक्का किस्म... 90-95 दिन में तैयार, 15% ज्यादा उपज

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 23 Sep 2026 03:36 PM IST
सार

  • VL हिमाद्री 90-95 दिन में पककर तैयार
  • औसत उपज 4,864 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
  • VMH 45 की तुलना में 15.21% ज्यादा औसत उपज
  • V 495 × V 461 के क्रॉस से विकसित

90 दिन में तैयार होगी मक्का की VL हिमाद्री
90 दिन में तैयार होगी मक्का की VL हिमाद्री - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए VL हिमाद्री (FH 3879) एक उपयोगी किस्म हो सकती है। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-VPKAS), अल्मोड़ा ने विकसित किया है। यह मक्का की जल्दी तैयार होने वाली संकर किस्म है, जो करीब 90 से 95 दिन में पककर तैयार हो जाती है।

15 फीसदी से ज्यादा अधिक औसत उपज
संस्थान के अनुसार, VL हिमाद्री की औसत उपज 4,864 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई। यह जांच में शामिल तुलना वाली किस्म VMH 45 से करीब 15.21 फीसदी अधिक है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में कम समय में मक्का की अच्छी उपज लेने की संभावना बनती है।

V 495 और V 461 के क्रॉस से विकसित
VL हिमाद्री को V 495 × V 461 के क्रॉस से विकसित किया गया है। यानी मक्का की इन दोनों लाइनों को मिलाकर इस संकर किस्म को तैयार किया गया है। इसका विकास पहाड़ी क्षेत्रों की खेती की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है।
पत्ती झुलसा रोग के प्रति मध्यम प्रतिरोध
यह किस्म मक्का में होने वाले टर्सिकम लीफ ब्लाइट और मेडीस लीफ ब्लाइट के प्रति मध्यम प्रतिरोध दिखाती है। ये दोनों पत्ती से जुड़े रोग हैं, जो फसल की बढ़वार और उपज को प्रभावित कर सकते हैं।

बारिश पर निर्भर और जैविक खेती के लिए सिफारिश
VL हिमाद्री को उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिए सुझाया गया है। इसे खास तौर पर जैविक और बारिश पर निर्भर खेती की परिस्थितियों के लिए उपयुक्त बताया गया है। संस्थान के अनुसार, कम अवधि में तैयार होने वाली यह संकर किस्म पहाड़ी किसानों को खेती की अवधि कम रखने और समय पर फसल लेने में मदद कर सकती है।
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