बारिश थमने के बाद किसानों ने शरदकालीन गन्ने की बुवाई की तैयारी तेज कर दी है। खेतों में ट्रैक्टर चालित पलटने वाले हल से गहरी जुताई की जा रही है। किसानों का कहना है कि इससे खरपतवार नष्ट होने के साथ मिट्टी भुरभुरी होती है और गन्ने की फसल के लिए खेत बेहतर तरीके से तैयार हो जाता है। यूपी के धामपुर चीनी मिल क्षेत्र में इस बार करीब 1,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है।
बिजनौर का धामपुर तहसील क्षेत्र गन्ना उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां किसान गन्ने के साथ सहफसली खेती कर अतिरिक्त आमदनी लेने का प्रयास करते हैं। इन दिनों बड़ी संख्या में किसान शरदकालीन गन्ने की समय से बुवाई करने में जुटे हैं।
गोबर की खाद डालकर कर रहे गहरी जुताई
जिन खेतों में धान और चारे की फसल कट चुकी है, किसान उनमें गोबर की खाद डालकर गहरी जुताई कर रहे हैं। किसान भारत भूषण शर्मा, पंकज कुमार, अतुल कुमार, सुनील कुमार, चौधरी राजेंद्र सिंह, कविराज सिंह और महेंद्र पाल सिंह आदि का कहना है कि गहरी जुताई से खेत में मौजूद खरपतवार और उनकी जड़ें नष्ट करने में मदद मिलती है। साथ ही गोबर की खाद मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद करती है।
धामपुर चीनी मिल के मिल उपाध्यक्ष आशीष शर्मा के अनुसार, बारिश के बाद खेत की उचित नमी होने पर पलटने वाले हल से गहरी जुताई करने के कई फायदे हैं। इससे मिट्टी की नीचे की परतें ढीली होती हैं और गन्ने की जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। बारिश का पानी भी जमीन में आसानी से समा जाता है और नमी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
गहरी जुताई के दौरान मिट्टी में मौजूद खरपतवार की जड़ें ऊपर आकर धूप के संपर्क में आती हैं, जिससे उन्हें नष्ट करने में मदद मिलती है। मिट्टी में छिपे कुछ कीट, उनके अंडे और लार्वा भी धूप के संपर्क में आने से कम हो सकते हैं। पिछली फसल के अवशेष मिट्टी में मिलकर जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद करते हैं।
बहुत गीली मिट्टी में न करें जुताई
गहरी जुताई करते समय खेत की मिट्टी बहुत अधिक गीली नहीं होनी चाहिए। ज्यादा गीली मिट्टी में हल चलाने से मिट्टी चिपक सकती है और बड़े-बड़े ढेले बन सकते हैं। इसलिए खेत में उचित नमी होने पर ही गहरी जुताई करना बेहतर है। गोबर की खाद का इस्तेमाल करने के बाद खेत तैयार करके गन्ने की बुआई करने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है।
सितंबर के अंत से अक्तूबर तक बुवाई का समय
शरदकालीन गन्ने की बुआई के लिए सितंबर के अंत से अक्तूबर तक का समय उपयुक्त माना जाता है। अच्छी फसल के लिए बारिश रुकने के बाद खेत की अच्छी तरह जुताई कर उसे भुरभुरा और समतल तैयार करना चाहिए। खेत में पानी जमा न हो, इसके लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था भी जरूरी है।
रोगमुक्त गन्ने से करें बुवाई
मिल के सहायक उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने किसानों को रोगमुक्त और अच्छी प्रजाति के गन्ने के बीज का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि किसान ट्रेंच विधि से गन्ने की बुआई कर सकते हैं। बुवाई से पहले बीज गन्ने को अनुशंसित रासायनिक दवा से उपचारित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गन्ने की जिन प्रजातियों को विभाग की ओर से निरस्त किया जा चुका है, उनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। किसानों को गन्ना विभाग के अधिकारियों की सलाह के अनुसार नवीनतम और अनुशंसित प्रजातियों से ही बुआई करनी चाहिए।
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