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होर्मुज संकट-महंगी खाद वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौती : सरकार खाद की हर यूनिट पर ₹2700 की सब्सिडी दे रही

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 05 Oct 2026 04:12 PM IST
सार

अमेरिका-ईरान तनाव ने दुनिया की खाद सप्लाई चेन को बड़ा झटका पहुंचाया है आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए उर्वरकों की घरेलू सप्लाई को बनाए रखना काफी महंगा हो गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि खाद की अधिक कीमतें और होर्मुज संकट दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं। 
 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अमेरिका-ईरान तनाव ने दुनिया की खाद सप्लाई चेन को बड़ा झटका पहुंचाया है आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों के लिए उर्वरकों की घरेलू सप्लाई को बनाए रखना काफी महंगा हो गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि खाद की अधिक कीमतें और होर्मुज संकट दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं। 

उर्वरक ने घटाई खाद्य आयात पर निर्भरता, अब खाद्य सुरक्षा उर्वरक सप्लाई पर टिकी
 वित्त मंत्री ने साफ किया कि बीते 50-60 सालों में उर्वरक व्यापार ने कई देशों की खाद्यान्न आयात पर निर्भरता घटाई है, इसलिए वैश्विक खाद्य सुरक्षा पूरी तरह से उर्वरकों की निर्बाध आवाजाही पर टिकी है।

किसानों को भारी सब्सिडी और खाद जहाजों के लिए अलग फंड
वित्त मंत्री के अनुसार, भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 80 प्रतिशत उर्वरक विदेशों से आयात करता है। इसके बावजूद सरकार भारतीय किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार की बढ़ी हुई कीमतों के बोझ से पूरी तरह बचा रही है। उन्होंने बताया कि सरकार कोविड काल के बाद से उच्चतम स्तर पर सब्सिडी का बोझ खुद वहन कर रही है।

कीमतों का अंतर साफ करते हुए उन्होंने कहा कि  आयात के समय यूरिया या डीएपी की एक यूनिट की लागत लगभग 3,000 रुपये आती है। किसानों से इस एक यूनिट के लिए केवल 300 रुपये लिए जा रहे हैं। सरकार प्रत्येक यूनिट पर करीब 2,700 रुपये की सब्सिडी अपनी तरफ से दे रही है।

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि देश में यूरिया और फॉस्फेट की घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, लेकिन इस विस्तार में लंबा समय लगेगा। इसके साथ ही, जहाजों की कमी और ऊंचे बीमा प्रीमियम की समस्या को देखते हुए सरकार ने उर्वरक लाने वाले जहाजों की सहायता के लिए एक अलग 'शिपिंग इमरजेंसी फंड' का गठन किया है।

समुद्री मार्गों पर संकट और मलक्का जलडमरूमध्य की स्थिति
वित्त मंत्री के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा व्यापार का प्रमुख केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य पिछले सात महीनों से अधिक समय से प्रभावित है। इसके कारण जहाजों और कंटेनरों की उपलब्धता घटी है और जहाजों का बीमा जोखिम प्रीमियम बहुत अधिक बढ़ गया है।

इस रुकावट के चलते व्यापार अब 900 किलोमीटर लंबे मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) की ओर मोड़ा जा रहा है, जो मलय प्रायद्वीप और इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बीच स्थित है तथा हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर व प्रशांत महासागर से जोड़ता है। वैकल्पिक मार्ग के संदर्भ में वित्त मंत्री ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि मलक्का मार्ग पर कोई बाधा नहीं आएगी, क्योंकि यदि वहां समस्या पैदा हुई तो स्थिति बेहद विनाशकारी ('डूम') साबित हो सकती है।

 


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