छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ फसलों की असल स्थिति और बुवाई का सटीक रिकॉर्ड तैयार करने के लिए गिरदावरी का काम अक्तूबर महीने में ही पूरा करने के निर्देश दिया है। सरकार के अनुसार, गिरदावरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में गांजा और अफीम जैसी नशीली फसलों की अवैध खेती की रोकथाम के लिए विशेष चौकसी बरतने के आदेश जारी किए गए हैं।
तकनीक और ड्रोन से जियो मैपिंग, गड़बड़ी पर मांगा जाएगा स्पष्टीकरण
प्रशासन का कहना है कि कई क्षेत्रों में खेतों की जियो मैपिंग ड्रोन के जरिए कराई जा रही है। इससे खेतों की भौगोलिक स्थिति, फसल के सटीक क्षेत्रफल और मौजूदा स्थिति का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। राजस्व कर्मचारियों को हर खेत में जाकर फसल की स्थिती दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद ड्रोन से मिलने वाले आंकड़ों और कर्मचारियों की ओर से तैयार रिपोर्ट को मिलान किया जा रहा है। अगर जमीनी स्थिति और दर्ज रिकॉर्ड में कोई अंतर पाया जाता है, तो संबंधित कर्मचारियों से सफाई मांगी जा रही है। सरकार का उद्देश्य यह है कि फसल का रकबा और किस्म सही दर्ज हो, जिससे किसानों को सरकारी योजनाओं, फसल बीमा और मुआवजे का लाभ मिलने में किसी भी तरह की परेशानी न हो।
48.44 लाख हेक्टेयर में बुवाई पूरी, अक्तूबर अंत तक मिलेंगे विस्तृत आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार, इस साल खरीफ सीजन के दौरान छत्तीसगढ़ में कुल 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों की बुवाई का लक्ष्य रखा गया था। 22 सितंबर तक प्रदेश में 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अलग-अलग खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है। राज्य में बोई गई प्रमुख फसलों में धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल शामिल है।
प्रशासन के अनुसार, अक्तूबर के आखिर तक गिरदावरी का काम पूरा होने के बाद फसल और क्षेत्र के हिसाब से आंकड़े सामने आएंगे, जिसके आधार पर प्रदेश सरकार आगे कृषि नीतियों और योजनाओं को चलाएगी।
गांजा और अफीम की अवैध खेती पर पैनी नजर
बीते साल की तरह इस साल भी प्रशासन ने नशीली फसलों की संभावित अवैध खेती वाले संवेदनशील इलाकों को चिह्नित कर लिया है। इस निगरानी कार्य में राजस्व, पुलिस और अन्य संबंधित विभाग मिलकर सूचनाएं जुटा रहे हैं।
निर्देशों के अनुसार, अगर ड्रोन सर्वे और जियो मैपिंग के दौरान किसी भी क्षेत्र में नशीली फसलों की खेती से जुड़ी संदिग्ध गतिविधि पाई जाती है, तो मैदानी स्तर पर तुरंत सत्यापन कराया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध रूप से मादक फसलों की खेती करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।