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हिमाचल प्रदेश : पांगी घाटी के सेब अब 'पांगी एप्पल' ब्रांड के नाम से बिकेंगे, प्रशासन ने तैयार किए 5,400 कार्टन

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 20 Oct 2026 04:34 PM IST
सार

  • हिमाचल की पांगी घाटी के सेब अब पांगी एप्पल ब्रांड के नाम से दूसरे राज्यों के बाजारों में बिकेंगे।
  • किसानों के लिए 10 और 20 किलो की पैकिंग वाले 5,400 खास कार्टन तैयार किए गए हैं।
  • ब्रांडिंग से सेब की अलग पहचान बनाने और किसानों को बेहतर दाम दिलाने की कोशिश की जा रही है।
  • पांगी में प्राकृतिक खेती से उगाए जाने वाले सेब के बाद राजमा, आलू और हरी मटर को भी ब्रांड से जोड़ने की योजना है।

हिमाचल के पांगी घाटी के सेबों को ब्रांड बनाने की तैयारी।
हिमाचल के पांगी घाटी के सेबों को ब्रांड बनाने की तैयारी। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले की पांगी घाटी में उगने वाले सेब अब अपने खुद के ब्रांड पांगी एप्पल के तहत राज्य से बाहर के बाजारों तक पहुंचेंगे। इस पहल के माध्यम से पांगी सेब को पहचान दिलाकर किसानों को बेहतर भाव दिलाने की योजना है।
 
5,400 खास कार्टन किए गए तैयार
अधिकारियों के अनुसार, इस ब्रांड के तहत 10 किलो और 20 किलो की पैकिंग वाले 5,400 कार्टन छपवाए गए हैं। इन्हें किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वे अपनी फसल को घाटी की अपनी खास पहचान के साथ बेच सकें। पांगी घाटी में सेब मुख्य नकदी फसल है, इसलिए शुरुआत के लिए इसी का चयन किया गया है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक रूप से उगे 'पांगी एप्पल' को बाजार में एक अलग पहचान दिलाना और उसकी खासियतों व मूल (origin) को हाईलाइट करके उसके प्रीमियम दाम दिलवाना है।

किसानों से पांगी ब्रांड अपनाने की अपील
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे अपने सेब पांगी एप्पल ब्रांड के तहत ही बेचें। मांग के अनुसार अगले साल इन कार्टनों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।

पांगी में सेब की कटाई शुरू, विपणन के लिए अनुकूल बाजार
पांगी में सेब की कटाई अक्टूबर के पहले हफ्ते में शुरू हो चुकी है और अब इसमें तेजी आ रही है। पांगी घाटी का सेब बाजार में तब पहुंचता है जब हिमाचल प्रदेश के निचले और मध्य पहाड़ी इलाकों से आने वाली मुख्य सप्लाई लगभग खत्म हो चुकी होती है। इससे किसानों को एक बहुत ही अनुकूल बाजार का समय मिल जाता है, जिससे उनकी फसल अच्छे दामों पर बिकती है।

यह पहल इस दूरदराज जनजातीय घाटी के प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा देने और किसानों को बड़े बाजारों से जोड़ने की एक कार्ययोजना का हिस्सा है। प्रशासन को उम्मीद है कि ब्रांडिंग से पांगी सेब की पहचान बढ़ेगी और किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खुलेंगे।

प्राकृतिक खेती और दूसरी फसलों का विस्तार
आपको बता दें कि पांगी हिमाचल प्रदेश का पहला ऐसा उप-मंडल है जिसे नेचुरल फार्मिंग सब-डिवीजन घोषित किया गया था। यहाँ खेती में रासायनिक खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल न के बराबर या बिल्कुल नहीं किया जाता है। किसान फसल बढ़ाने और कीटों से बचाव के लिए बीजामृत, घनजीवामृत और दशपर्णी अर्क जैसी प्राकृतिक चीजों का उपयोग करते हैं। इस ब्रांडिंग का मकसद किसानों की इन्हीं मेहनत और पद्धतियों को बाजार में पहचान दिलाना है।

प्रशासन की योजना इस ब्रांड को आगे चलकर अन्य कृषि उत्पादों तक भी बढ़ाने की है। अमनदीप सिंह ने बताया कि भविष्य में पांगी राजमा, आलू और हरी मटर जैसी फसलों को भी इस ब्रांड के तहत लाने का प्रस्ताव है।

दूरदराज इलाके की मुश्किलों से राहत
कठिन भौगोलिक इलाकों और दूरदराज होने के कारण यहाँ के किसानों को अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुँचाने में हमेशा से परेशानियों का सामना करना पड़ता था। यह साझा ब्रांड स्थानीय किसानों को सीमित स्थानीय बाजारों से निकालकर देश भर के उपभोक्ताओं तक पहुँचने में मदद करेगा। बाजार की मांग के हिसाब से इस योजना को चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा।


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