खरीफ सोयाबीन के रकबे में बढ़ोतरी के बावजूद इसके कुल उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस गिरावट के पीछे एमहाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना में कम बारिश को जिम्मेदार ठहराया है। दूसरी तरफ मध्य प्रदेश और राजस्थान की बेहतर उपज बड़े नुकसान की भरपाई कर सकती है।
रकबा बढ़ा, लेकिन उत्पादन घटा
सोपा के पहले अनुमान के मुताबिक, खरीफ सीजन 2026 में भारत का कुल सोयाबीन उत्पादन 107.93 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले 2025 सीजन के 110.26 लाख टन के मुकाबले 2.1 प्रतिशत कम है। वहीं दूसरी ओर, सोयाबीन की बुवाई का कुल रकबा लगभग 5 प्रतिशत बढ़कर 112.14 लाख हेक्टेयर से 117.73 लाख हेक्टेयर हो गया है। इन आंकड़ों से साफ है कि किसानों ने ज्यादा जमीन पर सोयाबीन बोया, लेकिन इसका असर ज्यादा पैदावार के रूप में नहीं दिखा।
इन राज्यों में सबसे ज्यादा नुकसान
देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में से एक, महाराष्ट्र में उत्पादन लगभग एक तिहाई तक गिरने की आशंका है। सोपा के अनुमान के अनुसार, महाराष्ट्र में उत्पादन 2025 के 52.23 लाख टन से 33.2 प्रतिशत घटकर 2026 में 34.88 लाख टन रहने का अनुमान है।
प्रतिशत के हिसाब से सबसे बड़ी गिरावट तेलंगाना में देखी गई है, जहां उत्पादन 46.1 प्रतिशत (1.25 लाख टन से गिरकर 0.68 लाख टन) तक घटने की आशंका है। वहीं, कर्नाटक में भी 43.6 प्रतिशत की भारी गिरावट का अनुमान है, जहां पैदावार 3.65 लाख टन से घटकर 2.06 लाख टन रह सकती है।
मध्य प्रदेश और राजस्थान ने दी बड़ी राहत
इन तीन राज्यों में हुए भारी नुकसान की काफी हद तक भरपाई अन्य राज्यों में हुई अच्छी पैदावार से हो रही है। सोपा के अनुमान के अनुसार, देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में उत्पादन 32.2 प्रतिशत बढ़कर 43.24 लाख टन से 57.16 लाख टन होने की उम्मीद है। इसी तरह, राजस्थान का उत्पादन भी 48.2 प्रतिशत बढ़कर 6.39 लाख टन से 9.47 लाख टन होने का अनुमान है। यही कारण है कि राष्ट्रीय स्तर पर कुल उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज नहीं की गई है।