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Monsoon's Farewell: मानसून की विदाई के बीच भारी बारिश का अलर्ट, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बढ़ेगी हलचल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 09 Oct 2026 02:20 PM IST
सार

  • 13-14 अक्टूबर तक देश के कई हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के आसार।
  • केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में शुक्रवार-शनिवार भारी बारिश की संभावना।
  • दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी बारिश और गरज-चमक का अनुमान।
  • बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कम दबाव वाली मौसमी प्रणालियां बन सकती हैं।

मानसून
मानसून - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई तेज हो रही है। इसी बीच दक्षिण भारत में मौसम बदलने लगा है और कई इलाकों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, केरल, माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में शुक्रवार और शनिवार को कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी शुक्रवार को बारिश की संभावना है।

मौसम के बदलते रुख के साथ दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून के आगमन की स्थितियां बन रही हैं। इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहने के कारण अक्टूबर से दिसंबर के बीच होने वाली बारिश दक्षिणी राज्यों के लिए काफी अहम होगी।

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बन सकती हैं मौसमी प्रणालियां
वैश्विक मौसम मॉडल के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ने के साथ वायुमंडल में सक्रिय मौसमी हलचल बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कम दबाव वाले क्षेत्र बना सकती है। इन प्रणालियों के मजबूत होने पर बारिश बढ़ सकती है। हालांकि, शुरुआती चरण में उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनने के स्पष्ट संकेत नहीं हैं।

अमेरिका के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने 14 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में दोनों समुद्री क्षेत्रों में मजबूत कम दबाव वाली प्रणालियां बनने की संभावना 20 से 40 प्रतिशत जताई है। यह समय दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून के सामान्य आगमन की अवधि के आसपास है।

13-14 अक्टूबर तक मानसून की विदाई के आसार
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 13-14 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पूर्वी भारत, उत्तरी प्रायद्वीपीय क्षेत्र और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों से पीछे हट सकता है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाली मौसमी प्रणालियों का असर दक्षिण भारत में बढ़ सकता है।

श्रीलंका के मौसम विभाग ने भी हवा की दिशा में बदलाव दर्ज किया है। वहां हवाएं दक्षिण-पूर्वी दिशा से चलने लगी हैं या उनकी दिशा बदल रही है। हालांकि, हवा की गति अभी पूर्वोत्तर मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के लिए पर्याप्त नहीं है।

केरल से तमिलनाडु तक बारिश और गरज-चमक
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, अगले छह दिनों में आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों, यानम, तटीय कर्नाटक, रायलसीमा, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराईकल में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।

केरल और माहे में रविवार से तीन दिन तक बारिश की संभावना है, जबकि लक्षद्वीप में चार दिन बारिश हो सकती है। केरल, माहे और लक्षद्वीप में शुक्रवार और शनिवार को कई स्थानों पर बारिश होने का अनुमान है। अगले बुधवार को केरल और माहे में फिर व्यापक बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

बारिश के साथ कई इलाकों में गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज झोंकेदार हवाएं चलने की भी आशंका है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में शुक्रवार से चार दिनों तक कुछ स्थानों पर बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। केरल, माहे, लक्षद्वीप, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में शुक्रवार और शनिवार को भी ऐसा मौसम रह सकता है।

श्रीलंका के आसपास समुद्र में तेज हवाओं की चेतावनी
श्रीलंका के आसपास गरज-चमक के दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और समुद्र में ऊंची लहरें उठने की आशंका है। लहरों की ऊंचाई 13 से 20 फीट तक पहुंच सकती है। केरल और माहे में रविवार और सोमवार को भी तेज हवाएं चल सकती हैं। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में शुक्रवार और शनिवार को गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भी तेज सतही हवाएं चल सकती हैं।

खेती और जल संसाधनों के लिए अहम होगी बारिश
दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई और हवाओं की दिशा में बदलाव के बीच आने वाले दिन पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। दक्षिण भारत में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान होने वाली बारिश जलाशयों, भूजल और कृषि गतिविधियों के लिए अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में पूर्वोत्तर मानसून कितना सक्रिय रहता है और दक्षिणी राज्यों में कितनी बारिश होती है, इस पर किसानों और जल संसाधनों की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी।
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