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गुजरात: दमणगंगा नदी पर 159.50 करोड़ रुपये से बनेगा बैराज, वापी के किसानों के 549 हेक्टेयर खेतों को मिलेगा पानी

गांव जंक्शन डेस्क, कोलकाता Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 12 Oct 2026 01:13 PM IST
सार

गुजरात के वलसाड जिले में 159.50 करोड़ रुपये की लागत से दमणगंगा नदी पर बैराज बनाने की तैयारी है। इससे 549 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई, साथ ही वापी क्षेत्र को भूजल रिचार्ज और जलापूर्ति में मदद मिलने की उम्मीद है।
 

नामधा गांव के पास बनने वाली इस परियोजना से सिंचाई, भूजल रिचार्ज और पेयजल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
नामधा गांव के पास बनने वाली इस परियोजना से सिंचाई, भूजल रिचार्ज और पेयजल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। - फोटो : AI Image (सांकेतिक तस्वीर)
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विस्तार
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गुजरात के वलसाड जिले में वापी के पास दमणगंगा नदी पर 159.50 करोड़ रुपये की लागत से बैराज बनाने की तैयारी है। नामधा गांव के पास बनने वाली इस परियोजना से सिंचाई, भूजल रिचार्ज और पेयजल की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। परियोजना के तहत निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की बात कही गई है।

549 हेक्टेयर जमीन को मिलेगा सिंचाई का लाभ
प्रस्तावित बैराज की कुल जल भंडारण क्षमता 54.9 लाख घन मीटर होगी। इससे करीब 549 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा देने की योजना है। इसके लिए लिफ्ट इरिगेशन यानी पानी उठाकर खेतों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। नामधा, चंदोर, मोहन, एकलहरे, नाहुली और जंबूरी गांवों के किसानों को इसका लाभ मिल सकता है।

सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलने से किसान साल में दो या उससे अधिक फसलें उगा सकेंगे। इससे उनकी आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।

उद्योगों और शहर को भी मिलेगा पानी
बैराज से वापी और आसपास के इलाकों में उद्योगों तथा नगर निकायों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में वापी वीयर से औद्योगिक उपयोग के लिए 1.9 करोड़ घन मीटर, जलापूर्ति के लिए 73 लाख घन मीटर और वापी नगर निगम को 60 लाख घन मीटर पानी दिया गया था। इससे कुल 69.15 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था।

भूजल रिचार्ज और खारे पानी पर नियंत्रण
बैराज के कारण नदी के ऊपरी हिस्से में करीब 3.5 किलोमीटर तक पानी जमा होने की संभावना है। इससे आसपास के ट्यूबवेलों को रिचार्ज करने में मदद मिल सकती है। परियोजना का उद्देश्य समुद्र के ज्वारीय पानी के नदी में प्रवेश और खारेपन के असर को भी कम करना है।

इसके अलावा, करीब 2.3 लाख आबादी वाले वापी शहर में पेयजल की उपलब्धता बेहतर होने, नदी किनारे विकास, पार्क और नौकायन जैसी सुविधाएं विकसित करने तथा नदी पर सड़क संपर्क बढ़ाने की संभावनाएं हैं। परियोजना से स्थानीय रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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