गुजरात के बनासकांठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया दौरा खेती-किसानी को लेकर सरकार के विजन को साफ करता है। आज जब दुनिया तेजी से हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां पर्यावरण की रक्षा के साथ कचरे से कंचन बनाकर विकास की राह तलाशी जा रही है, तब ग्रामीण भारत में भी इस सोच की तस्वीर देखने को मिल रही है। डेयरी और पशुपालन दूध उत्पादन से आगे बढ़कर बायोगैस, जैविक खाद और उन्नत नस्ल सुधार के जरिए किसानों की अतिरिक्त कमाई का एक मजबूत आधार बन रहे हैं।
दूध के साथ गोबर से भी कमाई, कचरे से कंचन का मॉडल
सरकार की योजना डेयरी क्षेत्र के आर्थिक दायरे को दूध से आगे ले जाकर गोबर और कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग तक बढ़ाने की है। इसी दिशा में बनासकांठा के थराद और राधनपुर में बनास डेयरी के दो बायो-सीएनजी संयंत्रों की आधारशिला रखी गई है। इन दोनों संयंत्रों की कुल क्षमता प्रतिदिन 175 टन गोबर को प्रोसेस करने की है।
इस पहल पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, हम चाहते हैं कि किसान दूध के साथ-साथ गोबर से भी कमाई करें। उन्होंने साफ किया कि बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय पैदा करने की अपार क्षमता रखते हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस पूरे ढांचे को खड़ा करने में बनास डेयरी जैसी सहकारी संस्थाएं बड़ी और अहम भूमिका निभाएंगी।
5 लीटर से 8 लीटर तक का सफर, नस्ल सुधार से और बदलेगी तस्वीर
ग्रामीण संपन्नता का सीधा संबंध पशुओं की उत्पादकता से जुड़ा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 में देश में गाय या भैंस का औसत दूध उत्पादन प्रतिदिन 5 लीटर से कम था, जो अब बढ़कर औसतन लगभग 8 लीटर प्रतिदिन हो चुका है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और वैश्विक स्तर पर इसकी उत्पादन वृद्धि दर सबसे तेज है।
उत्पादकता को और गति देने के लिए प्रधानमंत्री ने बनासकांठा के भिल्डी में 127 एकड़ में फैले भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर को राष्ट्र को समर्पित किया। यह देश का पहला केंद्र है जो खासतौर से कांकरेज नस्ल के लिए तैयार किया गया है। इस केंद्र में देसी नस्लों के साथ भैंसों की गुणवत्ता में सुधार का काम होगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह केंद्र देशी गोवंश और भैंसों की नस्ल सुधार प्रक्रिया को 10 से 20 गुना तक तेज करने में मदद करेगा।
सरकारी नीतियों से 50 लाख करोड़ की बचत और आय
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले कई वर्षों में सरकार की नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के जरिए किसानों ने 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक कमाए या बचाए हैं। छोटे किसानों को अब तक 4.5 लाख करोड़ रुपये सीधे खातों में दिए गए हैं। कार्यक्रम में 19,000 करोड़ रुपये की 24वीं किस्त भी जारी की गई।
बीते 12 सालों में धान और गेहूं की खरीद के न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत किसानों को 24 लाख करोड़ रुपये दिए गए। खाद के अंतरराष्ट्रीय दाम बढ़ने के बावजूद किसानों को सस्ती दरों पर खाद देने के लिए सरकार ने 16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए। पीएम फसल बीमा योजना के तहत 2 लाख करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। वहीं, पीएम-कुसुम के जरिए 12 लाख सोलर पंप दिए गए, जिससे किसानों ने करीब 80 करोड़ लीटर डीजल की खरीद बचाई और सौर ऊर्जा से अतिरिक्त आय बनाई।
आधी आबादी की ताकत और आधुनिक बुनियादी ढांचा
इस बदलते ग्रामीण परिदृश्य में महिलाओं की भूमिका भी तेजी से बढ़ी है। बनासकांठा की महिलाओं ने प्रधानमंत्री को बताया कि वे सालाना 2 करोड़ रुपये के दूध का उत्पादन करती हैं और जिले में हर साल 35 लाख रुपये का शहद बेचती हैं। देश में पिछले 12 वर्षों में शहद उत्पादन दोगुना हुआ है और भारत प्राकृतिक शहद का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है, जिसमें महिला स्वयं सहायता समूहों का बड़ा योगदान है।
खेती को बाजार और आधुनिक बुनियादी ढांचे से जोड़ने के लिए सनादर में बनास डेयरी के विस्तारित फ्रेंच फ्राइज प्लांट का उद्घाटन हुआ। इसके अलावा, करीब 4,950 करोड़ रुपये की 521 कृषि अवसंरचना परियोजनाओं और 12 बागवानी क्लस्टरों की शुरुआत की गई, जिससे उत्तर गुजरात के आलू उत्पादकों सहित 1.3 लाख से ज्यादा किसानों को सीधा फायदा होगा।
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