विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Crops Scarce Prices High Market Drought Has Reduced Onion And Garlic Production Driving Prices Sky High

खेतों में फसल कम, बाजार में दाम ज्यादा: सूखे ने घटाई प्याज-लहसुन की पैदावार, आसमान पर भाव

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 30 Oct 2026 07:13 PM IST
सार

कर्नाटक में सूखे और अनियमित बारिश से प्याज-लहसुन की पैदावार घट गई है। प्याज 5,500 रुपये क्विंटल और लहसुन 280 रुपये किलो तक पहुंचने से किसानों और आम लोगों पर असर पड़ रहा है।

प्याज और लहसुन
प्याज और लहसुन - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कर्नाटक में बारिश की कमी और सूखे जैसे हालात का असर प्याज और लहसुन की पैदावार पर पड़ा है। फसल कम होने से बाजार में दोनों सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। राज्य की मंडियों में प्याज का थोक भाव 5,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है, जबकि खुदरा बाजार में लहसुन 280 रुपये किलो बिक रहा है। इससे जहां किसानों को कम पैदावार का नुकसान हुआ है, वहीं आम लोगों की रसोई का बजट भी बिगड़ रहा है।

प्याज की खेती का रकबा 20 हजार हेक्टेयर घटा
डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खरीफ सीजन में कर्नाटक में प्याज की खेती करीब 70 हजार हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल इसी अवधि में यह रकबा 90 हजार हेक्टेयर था। यानी इस साल प्याज की खेती का क्षेत्र 20 हजार हेक्टेयर कम रहा।

धारवाड़, नवलगुंद, गदग, नरगुंद, बेलगावी, बागलकोट और विजयपुरा जिलों में किसानों ने खरीफ सीजन में प्याज की खेती की थी। लेकिन अनियमित बारिश और सूखे के कारण फसल को भारी नुकसान हुआ। धारवाड़ के किसान मल्लिकार्जुनप्पा सावड़ी ने बताया कि उन्होंने पिछले साल तीन एकड़ में प्याज उगाकर 150 क्विंटल उत्पादन लिया था।

इस साल उत्पादन घटकर केवल 60 क्विंटल रह गया। हालांकि, कम पैदावार के बावजूद बाजार में ऊंचे दाम मिलने से कुछ राहत मिली है। हुबली एपीएमसी के सचिव के.एच. गुरु प्रसाद के मुताबिक, मंडी में प्याज की आवक घट रही है। पिछले सप्ताह करीब 15 हजार क्विंटल प्याज आया था, जबकि इस सप्ताह यह घटकर 10 हजार क्विंटल रह गया।

कम पैदावार से 5,500 रुपये क्विंटल पहुंचा भाव
प्याज किसान इरप्पा के मुताबिक, बारिश पर निर्भर खेती वाले इलाकों में पिछले साल प्रति एकड़ 60 क्विंटल तक उत्पादन होता था। उस समय प्याज का भाव करीब 900 रुपये प्रति क्विंटल था। इस साल उत्पादन घटकर लगभग 20 क्विंटल प्रति एकड़ रह गया है। इसके चलते प्याज का भाव बढ़कर 5,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।

लहसुन का उत्पादन 50 फीसदी तक घटा
सूखे का असर लहसुन की खेती पर भी पड़ा है। कर्नाटक में इस साल लहसुन का उत्पादन करीब 50 फीसदी घटने का अनुमान है। उत्तर और मध्य कर्नाटक राज्य के प्रमुख लहसुन उत्पादक क्षेत्र हैं। लेकिन स्थानीय उत्पादन कम होने के कारण राज्य को मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान से लहसुन मंगाना पड़ता है।

हुबली एपीएमसी के कारोबारियों के मुताबिक, इन राज्यों में भी सूखे के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है। करीब चार महीने पहले 80 रुपये किलो बिकने वाला लहसुन अब खुदरा बाजार में 280 रुपये किलो तक पहुंच गया है। वहीं, हाइब्रिड लहसुन करीब 140 रुपये किलो बिक रहा है। हुबली मंडी में लहसुन का थोक भाव 18,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। बेंगलुरु में यह 16,000 रुपये, दावणगेरे में 15,600 रुपये और शिवमोग्गा में 17,000 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।

बीज की कीमतें भी बढ़ीं
लहसुन की खेती करने वाले किसानों के सामने रबी सीजन की बुवाई से पहले लागत बढ़ने की चुनौती है। पिछले साल लहसुन का बीज 3,000 से 6,000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा था, जो अब बढ़कर 10,000 से 15,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। कारोबारियों का अनुमान है कि अगले दो महीनों में मंडियों में आवक नहीं बढ़ी तो लहसुन के दाम और चढ़ सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन