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Cotton: कपास आयात पर दिसंबर तक छूट बढ़ा सकती है सरकार, घरेलू कीमतों में नरमी की उम्मीद

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 26 Oct 2026 05:55 PM IST
सार

कपास आयात पर 11% शुल्क छूट दिसंबर 2026 तक बढ़ने की संभावना है। जानें कपास के भाव, उत्पादन, आयात और किसानों व कपड़ा मिलों पर इसके संभावित असर के बारे में।

कपास
कपास - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारत सरकार कपास के आयात पर सीमा शुल्क से मिलने वाली छूट को दिसंबर 2026 के अंत तक बढ़ा सकती है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इस मामले से जुड़े तीन सरकारी और उद्योग सूत्रों ने यह जानकारी दी है। अगर सरकार यह फैसला करती है, तो कपड़ा मिलों को सस्ती दर पर कपास खरीदने में मदद मिल सकती है। इससे घरेलू बाजार में कपास की कीमतों पर दबाव भी पड़ सकता है। वहीं, अमेरिका, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से कपास का आयात बढ़ने की संभावना है।

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने कपास की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 1 जून से 31 अक्टूबर तक पांच महीने के लिए 11 प्रतिशत आयात शुल्क हटाया था। आम तौर पर अक्टूबर में नई फसल बाजार में आने लगती है, जिससे कीमतों में नरमी आती है। लेकिन इस साल उत्पादन घटने की आशंका और घरेलू बाजार में ऊंची कीमतों के कारण कपड़ा मिलें आयात शुल्क में छूट बढ़ाने की मांग कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, विभिन्न मंत्रालयों के बीच विचार-विमर्श पूरा होने के बाद सरकार जल्द ही इस संबंध में आदेश जारी कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

घरेलू बाजार में 9,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर कपास के दाम
भारत में कपास की कीमतें इस समय 9,000 रुपये प्रति 100 किलोग्राम यानी क्विंटल से अधिक हैं। यह नए सीजन के लिए सरकार की ओर से तय 8,717 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी ज्यादा है। कमजोर मानसून और कुछ इलाकों में कम बारिश के कारण कपास की फसल पर असर पड़ने की आशंका है। इससे बाजार में कपास की उपलब्धता कम रहने और कीमतें ऊंची बने रहने की स्थिति पैदा हुई है।

S&P Global की प्रमुख विश्लेषक दीपांशी अग्रवाल के मुताबिक, घरेलू उत्पादन में कमी, कपास के सीमित भंडार और कपड़ा उद्योग की मजबूत मांग को देखते हुए आयात शुल्क में छूट बढ़ाने का आधार बनता है। हालांकि, इससे घरेलू कपास की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

मांग से कम रह सकता है कपास का उत्पादन
व्यापार जगत के अनुमानों के मुताबिक, भारत में 2026-27 के दौरान कपास का उत्पादन 2.9 करोड़ गांठ से नीचे रह सकता है, जबकि घरेलू मांग 3.4 करोड़ गांठ से अधिक रहने का अनुमान है। उत्पादन और मांग के बीच इस अंतर के कारण कपड़ा उद्योग को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए आयात पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। जानकारों के अनुसार, कपास के पुराने आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) बीजों का इस्तेमाल भी एक चुनौती है। नई किस्मों की कमी के कारण फसल पर कीटों का हमला और कम पैदावार जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

छह महीने में कपास का आयात 63% बढ़ा
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से सितंबर के बीच भारत का कपास आयात सालाना आधार पर 63 प्रतिशत बढ़कर 1.1 अरब डॉलर पहुंच गया। हालांकि, आयात शुल्क में छूट बढ़ने के बावजूद विदेश से कपास की खरीद बहुत ज्यादा बढ़ना तय नहीं है। वैश्विक बाजार में अमेरिका के कपास वायदा भाव 83 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर हैं। इसके अलावा माल ढुलाई की ऊंची लागत और रुपये की कमजोरी से आयात महंगा पड़ सकता है।

कपड़ा उद्योग चाहता है लंबे समय तक आयात शुल्क में छूट
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री की महासचिव चंद्रिमा चटर्जी ने कहा कि कपास पर आयात शुल्क को लंबे समय तक हटाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आयात शुल्क से निर्माताओं की उत्पादन लागत बढ़ती है और भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है।

कपास आयात शुल्क में छूट बढ़ाने का फैसला कपड़ा मिलों के लिए राहत भरा हो सकता है, क्योंकि उन्हें कच्चा माल खरीदने की लागत घटाने में मदद मिलेगी। लेकिन घरेलू बाजार में कपास की कीमतों पर दबाव बढ़ने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकार के सामने कपड़ा उद्योग की जरूरतों और कपास किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
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