पानी की कमी और बाढ़ के कारण पिछले कुछ वर्षों में फसल को भारी नुकसान झेलने वाले कश्मीर घाटी के धान किसानों के लिए इस बार अच्छी खबर है। पर्याप्त बारिश और अनुकूल मौसम के कारण इस साल धान की फसल बेहतर हुई है। अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और गांदरबल के प्रमुख धान उत्पादक इलाकों में किसान पिछले साल के मुकाबले अधिक उपज की उम्मीद जता रहे हैं।
घाटी में इन दिनों धान की कटाई जोरों पर है। लगातार कई साल मौसम की मार झेलने के बाद बेहतर उत्पादन से किसानों को इस बार अच्छी आमदनी की उम्मीद है। पुलवामा जिले के वांडनकोरा गांव के किसान मोहम्मद मकबूल ने बिजनेस लाइन को बताया कि कई साल बाद खेतों में अच्छी फसल हुई है। उनके मुताबिक, पिछले साल बाढ़ का पानी खेतों में घुस गया था और मोटी गाद जमा होने के कारण कई किसान अपनी फसल तक नहीं काट पाए थे। इस साल स्थिति काफी बेहतर है।
बारिश ने पहुंचाया फायदा
किसानों के मुताबिक, धान की फसल के दौरान पर्याप्त बारिश होने से खेतों में पानी की जरूरत पूरी हुई। अनुकूल मौसम ने पौधों की बढ़वार और दाने बनने में भी मदद की। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 30 सितंबर के बीच जम्मू-कश्मीर में कुल 530.7 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य 549.1 मिमी से सिर्फ 3 फीसदी कम है।
धान उत्पादन वाले प्रमुख जिलों में बारिश की स्थिति अलग-अलग रही। अनंतनाग में 322.7 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 321 मिमी से थोड़ी अधिक है। कुलगाम में 295.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 333.3 मिमी से 11 फीसदी कम रही। वहीं पुलवामा में 267.1 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 192.1 मिमी से 39 फीसदी अधिक है। गांदरबल में 342.2 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 285 मिमी से 20 फीसदी अधिक रही।
कटाई पूरी होने के बाद साफ होगी तस्वीर
घाटी के कई इलाकों में धान की कटाई शुरू हो चुकी है। किसान और कृषि विशेषज्ञ दोनों इस साल फसल की स्थिति को पिछले साल के मुकाबले बेहतर बता रहे हैं। हालांकि, उत्पादन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी हुई है, इसका पता पूरी कटाई और उपज के आंकड़े सामने आने के बाद ही चलेगा।
माउंटेन रिसर्च सेंटर फॉर फील्ड क्रॉप्स (MRCFC) के एसोसिएट डायरेक्टर ऑफ रिसर्च नजीब उर रहमान सोफी ने बताया कि कई धान उत्पादक क्षेत्रों में किसानों ने फसल की अच्छी बढ़वार और पिछले साल से अधिक उपज की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि कटाई पूरी होने के बाद ही कुल उत्पादन का सही आकलन किया जा सकेगा।
चार दशक में 40 हजार हेक्टेयर घटा धान का रकबा
इस साल फसल बेहतर रहने के बावजूद घाटी में धान की खेती का क्षेत्र लंबे समय में लगातार घटा है। वर्ष 1980-81 में करीब 1.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती थी। वर्ष 2023-24 में यह घटकर करीब 1.29 लाख हेक्टेयर रह गया। यानी चार दशक से ज्यादा समय में धान का रकबा करीब 40 हजार हेक्टेयर कम हुआ है।
कृषि विशेषज्ञ इसके पीछे जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, बढ़ते शहरीकरण और किसानों का दूसरी फसलों की ओर रुख करने जैसे कारणों को जिम्मेदार मानते हैं। इस बार पर्याप्त बारिश और अनुकूल मौसम ने घाटी के धान किसानों को राहत जरूर दी है। अब किसानों की नजरें कटाई पूरी होने और मंडी में मिलने वाले भाव पर हैं, ताकि बेहतर फसल का फायदा उनकी आमदनी में भी दिखाई दे।
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