कर्नाटक में गन्ने का उचित दाम दिलाने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। किसान गन्ने की कीमत बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति टन करने और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 60 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहे हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने किसानों से आंदोलन वापस लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दशहरा के बाद अगले हफ्ते किसान नेताओं, चीनी मिल मालिकों और केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। हालांकि, किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि मांगों पर ठोस फैसला होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
शनिवार को बेलगावी जिले के कित्तूर में गन्ना किसानों से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल राज्य सरकार के स्तर पर संभव नहीं है। इसके लिए केंद्र सरकार, चीनी मिल मालिकों और बैंकों को भी सहयोग करना होगा। उन्होंने सभी पक्षों से एक साथ बैठकर चर्चा करने और स्थायी समाधान निकालने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान जहां भी उन्हें मिलने के लिए बुलाएंगे, वह वहां जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने किसान नेता चुनप्पा पुजारी से भी बातचीत की है। राज्य के सहकारिता, कृषि और चीनी मामलों के मंत्री भी संबंधित अधिकारियों से चर्चा के लिए दिल्ली गए थे।
गन्ने के दाम और किसानों की आर्थिक मदद पर होगी चर्चा
डीके शिवकुमार के मुताबिक, प्रस्तावित बैठक में गन्ने की कीमत, किसानों की मांगों और उन्हें आर्थिक मदद देने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। किसानों की मांगों से जुड़ा ज्ञापन केंद्रीय मंत्रियों को भी सौंपा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संभव हुआ तो बैठक बेलगावी में ही आयोजित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पहले किसानों को गन्ने पर 300 रुपये प्रति टन अतिरिक्त मदद देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन चीनी मिल मालिक इसके लिए तैयार नहीं हुए। मिल मालिकों का कहना है कि उत्पादन लागत, बिजली खरीदने के खर्च और दूसरी आर्थिक परेशानियों के कारण मिलों का संचालन मुश्किल हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चीनी मिलों का चलना और किसानों के हितों की रक्षा, दोनों जरूरी हैं। इसलिए ऐसा रास्ता निकालना होगा, जिससे किसानों को उचित दाम मिले और मिलों का संचालन भी जारी रह सके। उन्होंने कहा कि केवल बयान देने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि सभी पक्षों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।
किसानों की क्या हैं प्रमुख मांगें?
गन्ने का दाम 5,500 रुपये प्रति टन किया जाए।
चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए।
इथेनॉल की कीमतों में संशोधन किया जाए।
किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस फैसला लिया जाए।
किसानों का कहना है कि उन्हें गन्ने की उपज का बेहतर मूल्य मिलना चाहिए। जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
किसानों ने आंदोलन वापस लेने से किया इनकार
मुख्यमंत्री की अपील के बावजूद किसान नेताओं ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है। किसान नेता चुनप्पा पुजारी ने कहा कि उनका आंदोलन केंद्र सरकार के खिलाफ है और गन्ने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित होने तक जारी रहेगा।
पुजारी ने मांग की कि केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी रविवार दोपहर तक कित्तूर पहुंचें और किसानों की मांगों पर फैसला घोषित करें। ऐसा नहीं होने पर किसान अपनी पदयात्रा फिर शुरू करेंगे और 'हुब्बल्ली चलो' विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इससे पहले उत्तरी कर्नाटक के किसानों ने बेलगावी के पास पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो दिनों तक जाम लगाया था। इसके बाद किसानों ने केंद्रीय मंत्री के हुब्बल्ली स्थित आवास की ओर पदयात्रा शुरू की। किसान नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनकी समस्याओं की जांच के लिए समिति बनाई है, लेकिन अब तक मांगों पर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है।
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