चाय की खेती में इस्तेमाल होने वाले दो अहम कीटनाशकों को लेकर FSSAI बड़ा कदम उठा सकती है। प्राधिकरण इन दोनों कीटनाशकों के इस्तेमाल की मात्रा को सीमित करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम के तहत कीटनाशकों के लिए अधिकतम अवशेष सीमा तय की जाएगी, जिससे चाय की खेती और व्यापार में कीटनाशकों के उपयोग को लेकर स्पष्टता आने की उम्मीद है।
एसेटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड का उपयोग चाय को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, लेकिन अब तक इनके लिए कोई तय सीमा तय नहीं थी। मानक तय न होने के कारण चाय उत्पादक किसान लंबे समय से अनिश्चितता का सामना कर रहे थे।
इसी समस्या को देखते हुए, जुलाई में कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल टी ग्रोअर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। संगठनों ने जल्द से जल्द कीटनाशकों के लिए अधिकतम अवशेष सीमा को अधिसूचित करने का आग्रह किया था।
सरकारी नियमों के मुताबिक, अधिकतम अवशेष सीमा वो सबसे मात्रा है जो कानूनी तौर पर किसी खाद्य उत्पाद में कीटनाशक के अंश के रूप में रह सकती है।