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FSSAI: चाय की खेती में इस्तेमाल होने वाले दो कीटनाशकों पर कड़ाई की तैयारी, तय होगी अवशेष की अधिकतम सीमा...

राकेश गिरि, स्वतंत्र पत्रकार Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 18 Oct 2026 02:48 PM IST
सार

  • चाय की खेती और व्यापार में कीटनाशकों के उपयोग के नियम साफ होते दिख रहे हैं
  • FSSAI दो प्रमुख कीटनाशकों के उपयोग को सीमित कर सकती है, जिसके लिए अधिकतम अवशेष सीमा तय करने का प्रस्ताव है
  • यह कदम किसानों को एक आधिकारिक दायरा देगा, जिसमें रहकर वे कीटनाशकों का उपयोग कर सकते हैं

चाय उत्पादन में कीटनाशकों के उपयोग का आधिकारिक दायरा तय होने से व्यापार में स्पष्टता आने की उम्मीद।
चाय उत्पादन में कीटनाशकों के उपयोग का आधिकारिक दायरा तय होने से व्यापार में स्पष्टता आने की उम्मीद। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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चाय की खेती में इस्तेमाल होने वाले दो अहम कीटनाशकों को लेकर FSSAI बड़ा कदम उठा सकती है। प्राधिकरण इन दोनों कीटनाशकों के इस्तेमाल की मात्रा को सीमित करने का प्रस्ताव दिया है। इस कदम के तहत कीटनाशकों के लिए अधिकतम अवशेष सीमा तय की जाएगी, जिससे चाय की खेती और व्यापार में कीटनाशकों के उपयोग को लेकर स्पष्टता आने की उम्मीद है।

एसेटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड का उपयोग चाय को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, लेकिन अब तक इनके लिए कोई तय सीमा तय नहीं थी। मानक तय न होने के कारण चाय उत्पादक किसान लंबे समय से अनिश्चितता का सामना कर रहे थे।

इसी समस्या को देखते हुए, जुलाई में कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल टी ग्रोअर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। संगठनों ने जल्द से जल्द कीटनाशकों के लिए अधिकतम अवशेष सीमा को अधिसूचित करने का आग्रह किया था।

सरकारी नियमों के मुताबिक, अधिकतम अवशेष सीमा वो सबसे मात्रा है जो कानूनी तौर पर किसी खाद्य उत्पाद में कीटनाशक के अंश के रूप में रह सकती है।


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