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Four Pronged Drought Plan Focuses On Drinking Water Fodder And Jobs In Latur
महाराष्ट्र : लातूर में सूखे से लड़ने के लिए पानी, चारा, रोजगार और जलस्रोतों पर फोकस, पेयजल पहली प्राथमिकता
गांव जंक्शन डेस्क, लातूर
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 07 Oct 2026 05:01 PM IST
सार
महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित लातूर में जिला प्रशासन ने चार सूत्री योजना तैयार की है। इसमें पीने का पानी, पशुओं के लिए चारा, ग्रामीण रोजगार और जलस्रोतों के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। जरूरत पड़ने पर निजी जलस्रोतों का अधिग्रहण और टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी।
लातूर में चार सूत्री योजना के दूसरे हिस्से में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने पर जोर है।
- फोटो : गांव जंक्शन (सांकेतिक तस्वीर)
महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित लातूर जिले में प्रशासन ने संकट से निपटने के लिए चार सूत्री योजना तैयार की है। इसमें पीने के पानी की उपलब्धता को सबसे पहली प्राथमिकता दी गई है। इसके बाद पशुओं के लिए चारा, ग्रामीण रोजगार और मौजूदा जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
जिला कलेक्टर डॉ. भारत बस्तेवाड़ ने बताया कि प्रशासन पहले प्रत्येक गांव में सरकारी कुओं और बोरवेल की उपलब्धता का आकलन करेगा। जरूरत पड़ने पर निजी जलस्रोतों की पहचान कर उनका इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद भी पानी की कमी रहती है तो अतिरिक्त कुएं-बोरवेल और फिर टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी।
गांव-गांव होगी जलस्रोतों की जांच
चाकुर तहसील के वडवाल नागनाथ में मंगलवार को कलेक्टर ने पेयजल स्थिति का जायजा लिया। करीब 15 हजार आबादी वाले इस गांव में ग्राम पंचायत क्षेत्र में लगभग 30 बोरवेल हैं, जिनमें से 11 चालू हालत में पाए गए।
प्रशासन गांव में पांच से छह प्रमुख स्थानों पर पानी की टंकियां लगाने और जरूरत के अनुसार नल कनेक्शन देने की योजना बना रहा है। इन सुविधाओं के संचालन के लिए ग्राम पंचायत कर्मचारियों के साथ चार लोगों की तैनाती की जाएगी। लोगों को दो-दो घंटे के स्लॉट में पानी उपलब्ध कराने की योजना है। जरूरत बढ़ने पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले अतिरिक्त कुओं की भी पहचान की गई है। पानी की कमी होने पर टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी।
पशुओं के लिए चारे का इंतजाम
चार सूत्री योजना के दूसरे हिस्से में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने पर जोर है। प्रशासन गांववार मौजूदा चारा भंडार का आंकड़ा जुटाएगा और यह आकलन करेगा कि उपलब्ध चारा कितने समय तक चल सकता है। जिन गांवों में पानी उपलब्ध है, वहां ग्रामीणों को चारा उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रशासन केवल चारा शिविरों पर निर्भर रहने के बजाय चारा डिपो स्थापित करने पर भी विचार कर रहा है।
रोजगार के साथ जल संरक्षण
तीसरे हिस्से के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में लंबित और आने वाली रोजगार मांगों को मंजूरी दी जाएगी, ताकि स्थानीय स्तर पर मजदूरों को काम मिल सके। इन कार्यों में तालाबों और नालों से गाद निकालना, कुओं का पुनर्जीवन और पुराने बोरवेल को रिचार्ज करना शामिल होगा। सरकारी सहायता और रोजगार गारंटी योजनाओं के माध्यम से चारा उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
लंबे समय के लिए जलस्रोत मजबूत करने पर जोर
योजना के चौथे हिस्से में जल संरक्षण और जलस्रोतों की स्थिरता पर ध्यान दिया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि गांव लंबे समय तक आपातकालीन टैंकरों पर निर्भर न रहें। इसके लिए मौजूदा जलस्रोतों को मजबूत करने और उनकी क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
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