आंध्र प्रदेश सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 25 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। उनका कहना है कि इससे खेती की लागत कम करने, किसानों की आमदनी बढ़ाने और सूखे के दौरान फसलों को बचाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने किसानों, सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ टेली कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत की। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्ष 2016 में प्राकृतिक खेती की शुरुआत 40 हजार किसानों के साथ हुई थी। अब इससे जुड़ने वाले किसानों की संख्या बढ़कर 17.73 लाख हो गई है।
प्राकृतिक खेती से किसानों की कमाई में बढ़ोतरी
चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में प्राकृतिक खेती के मामले में राज्य की प्रगति का उल्लेख किया था।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, रासायनिक खादों के अधिक इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और खेती की लागत बढ़ती है। इससे किसानों पर आर्थिक बोझ पड़ता है। इसके मुकाबले प्राकृतिक खेती से किसानों की आमदनी में 47 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से कपास की खेती में शुद्ध आमदनी का लाभ 96 प्रतिशत और अरहर की खेती में 87 प्रतिशत तक रहा है।
सूखे में भी फसल बचाने में मिलेगी मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती कम बारिश और सूखे जैसी परिस्थितियों में फसलों को बचाने में मददगार हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने खेतों और आसपास हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया। इससे मिट्टी में नमी बनाए रखने और बढ़ते तापमान व अल नीनो के असर को कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के जरिए किसान सालभर आमदनी के अवसर भी तलाश सकते हैं। इसमें पशुओं के लिए चारा और दूसरे कृषि उत्पाद शामिल हैं।
रासायनिक खाद का इस्तेमाल घटा
नायडू के अनुसार, आंध्र प्रदेश में वर्ष 2023-24 से पहले के वर्षों की तुलना में रासायनिक खादों की खपत में 6 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले वर्ष के मुकाबले भी इसमें 2.28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने रासायनिक खादों का इस्तेमाल कम करने के लिए केंद्र सरकार से 218 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन की मांग की है।
सूखे से निपटने के लिए 10 लाख खेत तालाब
मुख्यमंत्री ने सूखे से निपटने के लिए जल संरक्षण के उपायों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अनंतपुर जिले में 10 लाख खेत तालाब खोदे गए हैं। इसके अलावा चेक डैम और नालियां बनाई गई हैं तथा स्थानीय जल स्रोतों को आपस में जोड़ने के प्रयास किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि नदियों को जोड़ने वाली परियोजनाएं पानी की कमी दूर करने में मदद कर सकती हैं। इससे पूरे साल बारिश नहीं होने जैसी गंभीर स्थिति में भी जल संकट से निपटने में सहायता मिल सकती है।
सरस मेले में दिखेगी प्राकृतिक खेती की झलक
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने के लिए किसानों और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने बताया कि राज्य में प्राकृतिक खेती की उपलब्धियों और तरीकों को 15 अक्टूबर को आयोजित होने वाले सरस मेले में प्रदर्शित किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़ाकर अधिक किसानों तक पहुंचना है, ताकि खेती की लागत घटाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सके।
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