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Farmers Can Now Record Crop Details Themselves Through Raj Kisan Girdawari App
खरीफ 2026 : राजस्थान में ऑनलाइन गिरदावरी, किसान अब खुद दर्ज कर सकेंगे खेत की फसल का ब्योरा
गांव जंक्शन डेस्क, जयपुर
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 19 Aug 2026 06:30 PM IST
सार
राजस्थान में खरीफ 2026 की ऑनलाइन गिरदावरी 1 अगस्त से 15 अक्टूबर तक चलेगी, जिसमें किसान ‘राज किसान गिरदावरी एप’ से अपनी फसल और रकबे का विवरण खुद दर्ज कर सकेंगे। इससे फसल रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ने के साथ गलतियों की गुंजाइश कम होगी और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी आसानी होगी।
ऑनलाइन व्यवस्था का मकसद गिरदावरी में होने वाली गलतियों को कम करना और राजस्व रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाना है।
- फोटो : AI Image
खेत में कौन-सी फसल बोई गई है और उसका रकबा कितना है, अब इसका ब्योरा किसान खुद दर्ज कर सकेंगे। राजस्थान में खरीफ 2026 की ऑनलाइन गिरदावरी 1 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 15 अक्टूबर तक चलेगी। इसके लिए किसान पटवारी के बजाय 'राज किसान गिरदावरी एप' का इस्तेमाल कर सकेंगे।
खेत का रिकॉर्ड, किसान के हाथ
ऑनलाइन व्यवस्था का मकसद गिरदावरी में होने वाली गलतियों को कम करना और राजस्व रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाना है। किसान अपने खेत में बोई गई फसल और उसके क्षेत्रफल की जानकारी सीधे एप पर दर्ज करेंगे।
गांव-गांव चल रहा प्रशिक्षण अभियान
राजस्व मंडल के निर्देश पर किसानों को एप चलाने का तरीका समझाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी और कृषि पर्यवेक्षक स्थानीय जनप्रतिनिधियों व जागरूक किसानों के साथ बैठकें कर रहे हैं।
विभाग ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में लक्षित गिरदावरी के कम से कम 25 प्रतिशत खसरों की गिरदावरी एप के जरिए पूरी कराने का लक्ष्य रखा है। किसान संघों के पदाधिकारियों के साथ भी बैठकें कर किसानों को एप डाउनलोड करने और खुद गिरदावरी दर्ज करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
फार्मर रजिस्ट्री से जोड़े जाएंगे किसान
अभियान के दौरान किसानों को एग्रीस्टैक के तहत फार्मर रजिस्ट्री आईडी बनवाने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है। यह रजिस्ट्री भविष्य में अलग-अलग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया को आसान बना सकती है।
इसके साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि से अपात्र घोषित किसानों का भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा। सत्यापन में पात्र पाए जाने वाले किसानों को दोबारा योजना से जोड़ने की प्रक्रिया चलेगी।
कृषि अधिकारी रेनू चौधरी के मुताबिक, किसान जब अपनी फसल का ब्योरा खुद दर्ज करेंगे तो खेत का रिकॉर्ड अधिक सही तरीके से तैयार हो सकेगा। यानी खेत की जानकारी अब सिर्फ कागजों में दर्ज होने वाली सूचना नहीं, बल्कि किसान की अपनी भागीदारी से तैयार होने वाला रिकॉर्ड बनेगी।
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