खेती-किसानी में एआई किसानों को समय पर सही निर्णय लेने में मदद कर रहा है। ऐसी ही कहानी महाराष्ट्र के बारामती से निकल कर आई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव एक समारोह के दौरान बताया कि बरामती में आधुनिक तकनीक और एआई के उपयोग से गन्ने की उपज में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस तकनीक ने उपज मे बढ़ोतरी के साथ मजदूरी, खाद और सिंचाई की लागत में कमी लाने में मदद की है।
इस तकनीक के तहत किसानों ने सैटेलाइट डेटा, आईओटी सेंसर, मौसम अनुमान और खेत से जुड़े आंकड़ों का उपयोग कर खेती से जुड़े बेहतर और सटीक फैसले लिए हैं। फसल की असल जरूरत के हिसाब से सिंचाई और खाद के उपयोग से खेती का खर्च काफी कम हुआ है।
पानी-खाद की बचत के बावजूद उपज में बढ़ोतरी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस तकनीक ने गन्ना उपज में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी, मजदूरी के खर्च में 20 से 40 फीसदी की गिरावट के साथ पानी और खाद के उपयोग में करीब 40 प्रतिशत की बचत हुई है। केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि खेती में आधुनिक तकनीक का ऐसा इस्तेमाल किसानों की आय बढ़ाने और लागत घटाने का एक कारगर मॉडल है।
Agripilot.ai एप का कमाल
जानकारी के अनुसार, बारामती में यह बदलाव फार्म ऑफ द फ्यूचर (Farm of the Future) परियोजना के तहत मुमकिन हुआ है। इस पहल को एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट बारामती, माइक्रोसॉफ्ट और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी मिलकर चला रहे हैं। इस परियोजना के तहत किसानों की मदद के लिए Agripilot.ai नाम का एक मोबाइल ऐप तैयार किया है।
किसानों को मोबाइल पर रोज मिलते हैं सटीक अलर्ट
इस तकनीक के जरिए गन्ना किसानों को उनके मोबाइल पर रोजाना जरूरी दिशा-निर्देश और अलर्ट मिलते हैं। इन अलर्ट्स की मदद से किसान बिना किसी संशय के यह तय कर पाते हैं कि खेत में किस दिन और कितनी सिंचाई करनी है, खेत के किस हिस्से में खाद डालने की जरूरत है, और किन जगहों पर कीटों और बीमारियों की जांच करनी है।
यह एप हिंदी, मराठी और अंग्रेजी तीनी भाषाओं में किसानों को सलाह देता है।