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रेगिस्तान की धरती पर उग रहे विदेशी खजूर : नर्मदा नहर से जालोर के किसानों को मिली नई उम्मीद

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 29 Oct 2026 04:56 PM IST
सार

राजस्थान के जालोर में किसान बरही, खलासा और मेजूल जैसी विदेशी खजूर किस्मों की खेती कर रहे हैं। जानें नर्मदा नहर, स्थानीय जलवायु और बागवानी से किसानों को कैसे मिल रही नई उम्मीद।

खजूर की फसल
खजूर की फसल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान के जालोर जिले में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी की ओर भी रुख कर रहे हैं। भीनमाल उपखंड के भालणी और दाता गांव में किसान खजूर की खेती कर रहे हैं। यहां सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका की बरही, खलासा और मेजूल जैसी किस्में उगाई जा रही हैं। जालोर की गर्म और शुष्क जलवायु खजूर की खेती के अनुकूल मानी जा रही है। वहीं, नर्मदा नहर से सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद इस क्षेत्र में बागवानी की संभावनाएं बढ़ी हैं।

कम पानी में कमाई का विकल्प बनी खजूर की खेती
खजूर की खेती करने वाले किसान हनीफ मेहर पहले पारंपरिक फसलें उगाते थे। खजूर की खेती के बारे में जानकारी मिलने पर उन्होंने भी इसे अपनाने का फैसला किया। उनके मुताबिक, जालोर की जलवायु खजूर के पौधों के लिए अनुकूल है। पारंपरिक फसलों के मुकाबले खजूर की खेती में सिंचाई की जरूरत कम पड़ सकती है। ऐसे में सही तकनीक और पौधों की देखभाल के साथ यह किसानों के लिए कमाई का एक अच्छा विकल्प बन सकती है।

खजूर के पौधे लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
खजूर की अच्छी पैदावार के लिए सही किस्म के पौधों का चुनाव और उनकी उचित दूरी पर रोपाई जरूरी है। पौधों के बीच पर्याप्त जगह होने से उन्हें धूप और हवा मिलती है। इससे बड़े होने पर पौधों की देखभाल और फलों के गुच्छों को संभालने में भी आसानी होती है।

इसके अलावा, खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए। इसके लिए जल निकासी की अच्छी व्यवस्था जरूरी है। पौधों को उनकी जरूरत के अनुसार सिंचाई और संतुलित पोषण देना भी अहम है। सही देखभाल से पौधों का विकास बेहतर हो सकता है।

नर्मदा नहर से बागवानी को मिल रहा सहारा
जालोर में खजूर की खेती को बढ़ावा मिलने की एक वजह क्षेत्र की गर्म जलवायु के साथ सिंचाई के साधनों की उपलब्धता भी है। नर्मदा नहर से जुड़े इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से बागवानी फसलों की खेती की संभावनाएं बनी हैं। किसान अब विदेशी किस्मों को स्थानीय परिस्थितियों में उगाने के प्रयोग कर रहे हैं। यदि खजूर की खेती का रकबा बढ़ता है, तो जालोर जिले को बागवानी के क्षेत्र में नई पहचान मिल सकती है। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा कमाई का एक और विकल्प मिल सकता है।
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