कीटनाशक-खरपतवार नाशक जैसे फसल सुरक्षा उत्पादों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और मुख्य रसायनों (एग्रोकेमिकल, टेक्निकल और इंटरमीडिएट्स) के लिए भारत चीन पर काफी निर्भर है। इस विदेशी निर्भरता को कम करने और चीन की तरह कच्चे माल और रसायनों को कम लागत में घरेलू स्तर पर उत्पादन को संभव बनाने के लिए सरकार के सामने एक सुझाव रखा गया है।
उद्योग संगठन एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में सरकार को पांच से सात हजार करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को जमीन पर उतारने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में इस योजना के तहत दो से तीन साल का समय कारखाना शुरू करने के लिए और उसके बाद निरंतर उत्पादन सहायता देने का सुझाव दिया गया है।
बिजली सब्सिडी और अतिरिक्त बिक्री पर प्रोत्साहन का प्रस्ताव
रिपोर्ट में अतिरिक्त बिक्री पर 5 से 8 प्रतिशत का प्रोत्साहन और औद्योगिक बिजली समेत साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों (पर 30 से 40 प्रतिशत की सब्सिडी देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे चीन के परिचालन लागत के फायदे का सीधा मुकाबला किया जा सकेगा।
प्रस्तावित नीतिगत ढांचे में नई परियोजनाओं (ग्रीनफील्ड) और मौजूदा इकाइयों के विस्तार (ब्राउनफील्ड) दोनों के लिए बड़े और छोटे उद्योगों हेतु निवेश की अलग-अलग सीमाएं रखने की बात कही गई है। साथ ही, विशेष अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए पूंजीगत अनुदान की मांग की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीति का उद्देश्य उद्योगों को स्थायी संरक्षण देना या सब्सिडी पर निर्भर बनाना नहीं है, बल्कि उन कमियों को ठीक करना है जो प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाती हैं।
साझा एग्रोकेमिकल पार्क और सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म की मांग
रिपोर्ट में साझा उपयोग में लाए जाने वाले एग्रोकेमिकल पार्क, क्लस्टर-आधारित पर्यावरणीय बुनियादी ढांचे, दीर्घकालिक वित्तपोषण और रणनीतिक रूप से फसल सुरक्षा उत्पादों के कच्चे माल-रसायनों (इंटरमीडिएट्स) के लिए चुनिंदा बैकवर्ड इंटीग्रेशन स्थापित करने की अपील की गई है। इसके साथ ही, केंद्र और राज्यों से मिलने वाली मंजूरियों को समयबद्ध बनाने के लिए एक सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने तथा जैविक फसल सुरक्षा उत्पादों के लिए स्पष्ट नियम व मार्ग तय करने की मांग की गई है।
जैविक उत्पादों के विकास और किसानों तक पहुंच पर जोर
रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग की वृद्धि केवल विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर निर्भर नहीं रह सकती। भारत को प्रोसेस केमिस्ट्री और फॉर्मूलेशन की अपनी ताकत के अलावा उत्पाद विकास, जैविक उत्पादों, नियामक विज्ञान और डिजिटल कृषि में भी क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता है। रिपोर्ट ने भारत की जैव विविधता, किण्वन (फर्मेंटेशन) विशेषज्ञता और वैज्ञानिक प्रतिभा को देखते हुए जैविक उत्पादों को एक बड़ा अवसर बताया है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी आगाह किया गया है कि इसका व्यावसायिक उपयोग बैच की निरंतरता, फॉर्मूलेशन की स्थिरता, बड़े पैमाने पर निर्माण, विभिन्न स्थानों पर खेतों में परीक्षण (फील्ड वैलिडेशन) और किसानों द्वारा इसे अपनाने पर निर्भर करेगा। इसके लिए पायलट-स्तरीय सुविधाएं, फील्ड-वैलिडेशन नेटवर्क, मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं (GLP लैब्स), अवशेष-परीक्षण और फॉर्मूलेशन विकास मंच तैयार करने की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में फसल सुरक्षा का अगला चरण नवाचार के व्यावसायीकरण, सप्लाई-चेन की मजबूती और संरचनात्मक लागत को कम करने पर आधारित होना चाहिए। वहीं, एसीएफआई के चेयरमैन राहुल धानुका के अनुसार, नवाचार की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये प्रयास किसानों के लिए व्यावहारिक, सुलभ और भरोसेमंद समाधान बन पाते हैं या नहीं।