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धरती की गर्मी से बनेगी बिजली: लद्दाख में लगा देश का पहला जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट, बढ़ेगी ग्रीनहाउस खेती

गांव जंक्शन डेस्क, दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 18 Jul 2026 04:20 PM IST
सार

  • लद्दाख की पुगा वैली में शुरू हुआ भारत का पहला जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट।
  • 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1000 मीटर गहरे दो जियोथर्मल कुएं तैयार।
  • धरती की प्राकृतिक गर्मी से 24×7 बिजली उत्पादन होगा।
  • फिलहाल 1 मेगावाट का पायलट प्रोजेक्ट, आगे बड़े स्तर पर विस्तार की योजना।
  • ग्रीनहाउस खेती, हीटिंग और पर्यटन क्षेत्र को मिलेगा लाभ।
  • डीजल पर निर्भरता घटेगी, लद्दाख के कार्बन-न्यूट्रल मिशन को मिलेगा बढ़ावा।

लद्दाख में लगा देश का पहला जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट
लद्दाख में लगा देश का पहला जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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Geothermal Power Plant In Ladakh: भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए लद्दाख की पुगा वैली (Puga Valley) में देश के पहले जियोथर्मल एनर्जी प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। 14 हजार फीट की ऊंचाई पर शुरू हुई यह 1 मेगावाट की पायलट परियोजना धरती के भीतर मौजूद प्राकृतिक गर्मी से बिजली पैदा करेगी। इससे लद्दाख में स्पेस हीटिंग, ग्रीनहाउस खेती और पर्यटन क्षेत्र को लगातार बिजली मिल सकेगी। खास बात यह है कि कड़ाके की सर्दी में भी स्थानीय लोग ग्रीनहाउस के जरिए ताजी सब्जियां उगा सकेंगे, जिससे खेती और आजीविका दोनों को नई मजबूती मिलेगी।

धरती की गर्मी से बनेगी बिजली
जियोथर्मल एनर्जी यानी धरती के भीतर मौजूद प्राकृतिक गर्मी से बिजली पैदा करना। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 24 घंटे और पूरे साल बिजली उत्पादन कर सकती है। इसे चलाने के लिए न धूप की जरूरत होती है और न ही तेज हवा की, इसलिए यह सौर और पवन ऊर्जा की तुलना में अधिक स्थिर ऊर्जा स्रोत माना जाता है।

पुगा वैली को क्यों चुना गया?
पुगा वैली भारत का सबसे सक्रिय जियोथर्मल हॉटस्पॉट मानी जाती है। यहां जमीन के नीचे गर्म पानी और भाप का विशाल भंडार मौजूद है। वैज्ञानिकों के अनुसार करीब 400 मीटर की गहराई पर 135 डिग्री सेल्सियस तक तापमान दर्ज किया गया है, जबकि 1000 मीटर गहराई पर इससे भी अधिक तापमान मिलने की संभावना है। इसी गर्मी का उपयोग बिजली उत्पादन में किया जाएगा।

लद्दाख को होंगे कई बड़े फायदे
यह परियोजना लद्दाख जैसे बेहद ठंडे क्षेत्र के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। इससे घरों को गर्म रखने के लिए स्वच्छ ऊर्जा मिलेगी। ग्रीनहाउस खेती को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सर्दियों में भी ताजी सब्जियां उगाई जा सकेंगी। पर्यटन क्षेत्र को लगातार बिजली आपूर्ति मिलेगी। डीजल जनरेटर और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी।

कठिन परिस्थितियों में पूरा हुआ प्रोजेक्ट
14 हजार फीट की ऊंचाई, ऑक्सीजन की कमी और खराब मौसम के बावजूद इंजीनियरों ने रिकॉर्ड समय में दो कुएं तैयार किए। पहला कुआं 22 मई 2026 को 1000 मीटर गहराई तक पूरा हुआ, जबकि दूसरा कुआं 8 जुलाई 2026 को तैयार किया गया।

नेट-जीरो लक्ष्य की ओर बड़ा कदम
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि पुगा वैली की यह सफलता भारत के नेट-जीरो मिशन के लिए एक नई दिशा तय करेगी। सरकार का लक्ष्य लद्दाख को कार्बन-न्यूट्रल क्षेत्र बनाना है और यह परियोजना उस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यदि पायलट परियोजना सफल रहती है, तो इसे बड़े व्यावसायिक बिजली संयंत्र में बदला जाएगा, जिससे पूरे लद्दाख को स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली मिल सकेगी।
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