खरीफ फसलों पर सूखे की मार ने मराठवाडा क्षेत्र के किसानों को आर्थिक दबाव में डाल दिया है। हालात यह है कि किसानों के सामने अपने पशुओं को पेट भरने के लिए चारे और पानी तक का संकट खड़ा हो गया है। इन चुनौतियों के बीच कई किसान अपने मवेशियों को काफी कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर हो गए हैं। पशुओं की बिक्री के लिए किसान अलग-अलग जिलों में आयोजित होने वाले पशु बाजार पहुंच रहे हैं, जहां उन्हें सही खरीदार और भाव नहीं मिल रहे हैं।
पशुओं का पालन कठिन हुआ, कई किसानों को लौटना पड़ रहा खाली हाथ
परभणी जिले में लगने वाले पारथी पशु बाजार में आए किसानों का कहना है कि चारे का भंडारण खत्म हो चुका है और जल संकट के बीच पशुओं को पालना काफी कठिन हो गया है। यहां सात एकड़ में फसल नुकसान झेलने वाला एक किसान 50 किलोमीटर दूर से पहुंचे, लेकिन कम कीमत पर बैल बेचने के लिए तैयार होने के बावजूद उन्हें खरीदार नहीं मिला। एक किसान ने मंडी में अपनी दो भैंस मात्र 44 हजार में बेचीं, जबती यही जोड़ी उन्होंने तीन साल पहले 90 हजार रुपये की खरीदी थी। एक दूसरे किसान ने अपनी 8 गाय मात्र 1.25 लाख रुपये में बेची, जो बीते साल 1.75 लाख रुपये में खरीदी गई थीं।
बाजारों में मवेशियों की आवक दोगुनी, मवेशी छावनियां शुरू करने की मांग
पशुओं व्यापारियों का कहना है कि पारथी बाजार में हर हफ्त करीब 150 मवेशी बिक्री के लिए आ रहे हैं, जबकि सामान्य दिनों में यह आंकड़ा औसतन 70 के आसपास रहता है। उन्होंने खरीदारों की कमी का जिक्र किया। कुछ व्यापारियों ने यह भी बताया कि दूसरे राज्यों में मवेशी ले जाने पर बूचड़खाने के संदेह में रोके जाने का जोखिम रहता है, जिससे अंतरराज्यीय परिवहन भी प्रभावित हुआ है।
किसान नेताओं ने इस चुनौती को देखते हुए प्रदेश सरकार से मराठवाड़ा में जल्द से जल्द मवेशी छावनियां (कैटल कैंप) शुरू करने और चारे और पानी की सप्लाई तय करने की मांग की है।
जल्द कराया जाएगा चारा उपलब्ध
इस मामले पर राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि सरकार किसानों को जल्द से जल्द चारा उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास मराठवाड़ा में बड़े पैमाने पर मजबूरी में मवेशी बेचे जाने की कोई जानकारी नहीं है और हो सकता है कि कुछ किसान अपने मवेशी बेच रहे हों। कृषि मंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार किसानों को हर संभव मदद मुहैया कराएगी।