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19% कम बारिश से बिगड़े हालात : गुजरात के 4 जिलों में सूखा घोषित, किसानों को ₹17000 तक की मदद

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 26 Oct 2026 05:43 PM IST
सार

  • चार जिले सूखाग्रस्त घोषित: कच्छ, जामनगर, देवभूमि द्वारका और पोरबंदर में कम बारिश के कारण सरकार ने राहत का एलान किया।

  • किसानों को ₹17,000 तक की मदद: पात्र किसानों को अधिकतम दो हेक्टेयर प्रभावित फसल के लिए ₹8,500 प्रति हेक्टेयर मिलेंगे।

  • पशुपालकों को राहत: सूखाग्रस्त जिलों में मवेशियों के लिए दो महीने तक ₹80 प्रति पशु प्रतिदिन की सहायता का एलान।

  • तीन करोड़ किलो चारा उपलब्ध: सरकार के पास चारे का भंडार है, जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति की जाएगी।

सूखा
सूखा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गुजरात में कम बारिश के कारण चार जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। राज्य सरकार ने कच्छ, जामनगर, देवभूमि द्वारका और पोरबंदर के किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों को राहत देने के लिए सहायता पैकेज का एलान किया है। इसके तहत प्रभावित किसानों को फसल नुकसान के लिए प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी। यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर तक की फसल के लिए दी जाएगी। वहीं, पशुपालकों को मवेशियों के चारे के लिए आर्थिक सहायता और ग्रामीण परिवारों को रोजगार देने की भी घोषणा की गई है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार को गांधीनगर में उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में औसतन 89 प्रतिशत बारिश हुई है, लेकिन इन चार जिलों में बारिश की कमी के कारण खेती प्रभावित हुई है। इससे पहले महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की सरकारें भी सूखे की स्थिति को देखते हुए कदम उठा चुकी हैं।

पिछले साल के मुकाबले 19 फीसदी कम बारिश
गुजरात में इस साल 26 अक्टूबर तक 810 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। पिछले साल इसी अवधि में 996 मिलीमीटर बारिश हुई थी। इस तरह राज्य में पिछले साल के मुकाबले करीब 19 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कम बारिश से फसल को नुकसान झेलने वाले किसानों को राज्य आपदा मोचन कोष (SDRF) के तहत सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य प्रभावित किसानों को आर्थिक राहत देना है।

किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की मदद
राज्य सरकार के राहत पैकेज के तहत सूखे से प्रभावित फसलों के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये दिए जाएंगे। यह सहायता अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र के लिए होगी। यानी पात्र किसान को इस मद में अधिकतम 17,000 रुपये मिल सकते हैं। सहायता राज्य आपदा मोचन कोष के तहत दी जाएगी।

पशुपालकों को मवेशियों के लिए रोजाना 80 रुपये
सूखे का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है। चारे की कमी से पशुपालकों के सामने भी परेशानी खड़ी हो सकती है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने राहत शिविरों में रखे गए मवेशियों के लिए आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। चारों सूखाग्रस्त जिलों में मवेशियों के लिए दो महीने तक प्रति पशु रोजाना 80 रुपये की सहायता दी जाएगी।

सरकार ने चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, जून-जुलाई 2026 से रियायती दर पर चारा बांटने की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत अब तक 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से वितरित किया जा चुका है। राज्य सरकार के पास फिलहाल तीन करोड़ किलोग्राम चारे का भंडार है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चारे की व्यवस्था भी की जाएगी।

1 नवंबर से 150 दिन का रोजगार
सूखे के कारण ग्रामीण परिवारों की आमदनी पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए सरकार ने रोजगार सहायता बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (VB-G RAM G) के तहत प्रभावित जिलों में एक नवंबर से 150 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य फसल नुकसान के समय ग्रामीण परिवारों को आमदनी का अतिरिक्त सहारा देना है।

76 बांधों से रबी फसलों के लिए मिलेगा पानी
गुजरात में इस साल राज्य के 206 प्रमुख बांधों में उनकी कुल क्षमता का 66 प्रतिशत पानी जमा है। सरकार ने आगामी रबी सीजन में 76 बांधों के कमांड क्षेत्र यानी उन इलाकों में सिंचाई के लिए पानी देने की योजना बनाई है, जहां इन बांधों की नहरों से पानी पहुंचता है। सरकार की योजना के अनुसार, उत्तर गुजरात के 11 बांधों, मध्य गुजरात के 12 बांधों, दक्षिण गुजरात के नौ बांधों, सौराष्ट्र के 39 बांधों और कच्छ क्षेत्र के पांच बांधों से सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा।

उत्तर गुजरात में धारोई और दांतीवाड़ा, मध्य गुजरात में करजन और पानम तथा दक्षिण गुजरात में उकाई, काकरापार और दमनगंगा प्रमुख बांधों में शामिल हैं। सौराष्ट्र के बांधों में शेत्रुंजी, ब्राह्मणी और मच्छू भी शामिल हैं। सरकार के अनुसार, बांधों में पानी की उपलब्धता के आधार पर एक से चार बार सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा।

पेयजल को प्राथमिकता, जून 2027 तक की जरूरत का इंतजाम
राज्य सरकार ने कहा है कि बांधों में उपलब्ध पानी का इस्तेमाल करते समय पीने के पानी की जरूरत को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार के मुताबिक, 30 जून 2027 तक पेयजल की जरूरत पूरी करने के लिए पानी सुरक्षित रखने की योजना बनाई गई है।

कम बारिश के बीच गुजरात सरकार का राहत पैकेज किसानों को फसल नुकसान की भरपाई, पशुपालकों को चारे के खर्च में मदद और ग्रामीण परिवारों को रोजगार देने पर केंद्रित है। वहीं, रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना से खेती को सहारा देने की कोशिश की जा रही है।
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