केंद्र सरकार ने चीनी मिलों की ओर से दिए गए GST विवरणों में गड़बड़ी मिलने के बाद संबंधित मिलों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। खाद्य मंत्रालय के अनुसार, 17 से 19 अगस्त के बीच चीनी मिलों की ओर से दी गई जानकारी में विसंगतियां पाई गई हैं। इनकी जांच GST रिकॉर्ड, बिक्री बिल, खरीदारों के विवरण और चीनी की ढुलाई व उठान से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर की जा रही है। सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर के पहले पखवाड़े में तय बिक्री लक्ष्य पूरा करने का निर्देश भी दिया है।
चीनी एवं वनस्पति तेल विभाग के निदेशक अरविंद कुमार रावत ने मंत्रालय की ओर से जारी नोट में कहा कि जहां गड़बड़ियां साबित होंगी, वहां संबंधित चीनी मिलों के खिलाफ कानून के लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
10 अक्टूबर तक देना होगा बिक्री का ब्योरा
खाद्य मंत्रालय के अनुसार, चीनी मिलों को अब 20 से 31 अगस्त के बीच हुई चीनी की बिक्री का विवरण देने को कहा गया है। यह जानकारी 10 अक्टूबर तक जमा करनी होगी। मंत्रालय ने कहा है कि दिए गए विवरणों का GST रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड के साथ मिलान किया जाएगा।
सरकार ने 9 अक्टूबर से चीनी मिलों का सघन भौतिक सत्यापन कराने का भी फैसला किया है। इसके लिए अधिकृत सरकारी अधिकारी मिलों की निगरानी करेंगे और निर्देशों के पालन की जांच करेंगे। मंत्रालय के नोट के अनुसार, किसी भी तरह की गड़बड़ी या निर्देशों का उल्लंघन पाए जाने पर कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी।
बिक्री लक्ष्य पूरा नहीं करने पर भी कार्रवाई
सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर के पहले दो सप्ताह के लिए तय बिक्री लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया है। इसके तहत मिलों को अक्टूबर के पहले सप्ताह के लिए निर्धारित बिक्री कोटे का 45 प्रतिशत बेचना होगा। शेष मात्रा दूसरे सप्ताह में बेचनी होगी।
मंत्रालय के अनुसार, बिक्री लक्ष्य पूरा नहीं करना निर्देशों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों में तेजी रोकने के लिए ये कदम उठाए हैं। दशहरा और दिवाली से पहले चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए बिक्री कोटे, स्टॉक और मिलों के रिकॉर्ड की निगरानी की जा रही है।
अगस्त में 70 रुपये किलो तक पहुंची थी चीनी
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के आखिरी दिनों में खुदरा बाजार में चीनी की अखिल भारतीय औसत कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। अब यह घटकर 55.06 रुपये प्रति किलो रह गई है। एक महीने पहले चीनी की कीमत 61.33 रुपये प्रति किलो और एक साल पहले 59.05 रुपये प्रति किलो थी।
चीनी की कीमतों में तेजी का कारण बेमौसम बारिश और कीटों के हमले से घरेलू उत्पादन पर पड़ा असर बताया गया है। उत्तर प्रदेश में इसका खास प्रभाव देखने को मिला। चीनी का उत्पादन अब 3.43 करोड़ टन से अधिक के शुरुआती अनुमान के मुकाबले घटकर 3.06 करोड़ टन रहने का अनुमान है। कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा, दोबारा निर्यात के लिए कच्ची चीनी आयात करने वाली इकाइयों को 31 अक्टूबर तक उसे घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है।सरकार ने उन थोक उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक सीमा तय की है, जो महीने में 10 टन से अधिक चीनी खरीदते हैं। इनके लिए स्टॉक की सीमा घटाकर 15 दिन की जरूरत के बराबर कर दी गई है। व्यापारियों के लिए भी स्टॉक सीमा लागू की गई है। इसके साथ ही चीनी मिलों के मासिक बिक्री कोटे के आवंटन को बदलकर पाक्षिक कर दिया गया है। इन कदमों के बाद अगस्त में ऊंचे स्तर पर पहुंची चीनी की कीमतों में गिरावट आई है।
तमिलनाडु में गन्ना किसानों को 709.50 रुपये प्रति टन प्रोत्साहन
इस बीच, तमिलनाडु सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गन्ना किसानों को 709.50 रुपये प्रति टन प्रोत्साहन देने की घोषणा की है। राज्य के कृषि मंत्री आर. विनोद के अनुसार, इस प्रोत्साहन के बाद 9.5 प्रतिशत चीनी रिकवरी के आधार पर किसानों को गन्ने के लिए कुल 4,000 रुपये प्रति टन मिलेंगे। यह प्रोत्साहन राज्य सरकार की ओर से तय 3,290.50 रुपये प्रति टन के राज्य परामर्श मूल्य (SAP) के अतिरिक्त होगा। इस योजना पर राज्य सरकार के खजाने से 603.34 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मंत्री के अनुसार, जिन किसानों के गन्ने में चीनी की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से अधिक होगी, उन्हें प्रति टन 4,000 रुपये से ज्यादा मिलेंगे।
हालांकि, प्रोत्साहन का भुगतान जिला कलेक्टरों और चीनी निदेशालय के अधिकारियों की अध्यक्षता वाली समितियों की सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा। राज्य सरकार के अनुसार, इस योजना से करीब 90,000 किसानों को लाभ मिलेगा।