विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Chhattisgarh Begin Paddy Procurement November 15 But Farmers Face Increasing Difficulties Farmer Id Remains

15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी : लेकिन इन किसानों की बढ़ी मुश्किलें... यह काम नहीं किया पूरा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 01 Nov 2026 05:31 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू होगी, लेकिन महासमुंद जिले के 363 किसानों की फार्मर आईडी अब तक नहीं बनी है। एग्रीस्टैक पंजीयन अटकने से किसानों को MSP पर धान बेचने में परेशानी हो सकती है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू होने जा रही है। प्रशासन ने इसके लिए तैयारियां तेज कर दी हैं, लेकिन महासमुंद जिले के 363 किसानों की परेशानी अब तक दूर नहीं हुई है। इन किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन पूरा नहीं हो पाया है। किसी के जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी है तो किसी का खसरा सत्यापन अटका हुआ है। ऐसे में किसानों को चिंता है कि वे समय पर अपनी धान की उपज कैसे बेच पाएंगे।

किसान पंजीयन की आखिरी तारीख 31 अक्टूबर थी। समय-सीमा खत्म होने के बाद भी 363 किसानों की फार्मर आईडी नहीं बन पाई है। धान बेचने के लिए किसान पंजीयन के साथ फार्मर आईडी होना भी जरूरी है। ऐसे में इन किसानों को धान खरीदी के दौरान परेशानी हो सकती है।

15 नवंबर से शुरू होगी धान खरीदी, 202 केंद्रों पर तैयारी
जिले में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होगी। इसके लिए प्रशासन ने 202 खरीदी केंद्रों में साफ-सफाई और दूसरी जरूरी व्यवस्थाएं शुरू कर दी हैं। इस खरीफ सीजन में जिले के 1 लाख 61 हजार 874 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। इनमें 3,974 नए किसान शामिल हैं। हालांकि, पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों के जमीन संबंधी दस्तावेजों की जांच और खसरा रिकॉर्ड में सुधार का काम प्रभावित हुआ है। इस वजह से कई किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन पूरा नहीं हो पाया।

पटवारियों की हड़ताल से अटका पंजीयन का काम
किसानों को फार्मर आईडी बनवाने के लिए जमीन से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन कराना होता है। इसके लिए खसरा रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी का सही होना जरूरी है। लेकिन पटवारियों की हड़ताल के कारण दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड में सुधार नहीं हो सका। इसका असर एग्रीस्टैक पंजीयन पर पड़ा है। किसानों का कहना है कि वे तय समय में आवेदन और जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश करते रहे, लेकिन जमीन के रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं के कारण उनका काम पूरा नहीं हो पाया।

पंजीयन की तारीख बढ़ाने की मांग
किसान नेताओं ने मांग की है कि पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाई जाए, ताकि छूटे हुए किसानों को भी फार्मर आईडी बनवाने और धान बेचने का मौका मिल सके। किसानों का कहना है कि हर साल धान खरीदी से पहले कभी सहकारी समितियों के कर्मचारियों का आंदोलन तो कभी राजस्व विभाग के कर्मचारियों की हड़ताल के कारण ऐसी समस्याएं सामने आती हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।

पिछले खरीफ सीजन में जिले में करीब 110 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। इस बार भी बड़ी मात्रा में धान खरीदी की तैयारी है। ऐसे में फार्मर आईडी की समस्या समय पर दूर नहीं हुई तो खरीदी शुरू होने के बाद किसानों को केंद्रों पर परेशानी हो सकती है।

363 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन अधूरा
नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा ने बताया कि जिले में अब तक 3,974 नए किसानों ने पंजीयन कराया है। एग्रीस्टैक और नए किसान पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने के संबंध में अभी कोई सूचना नहीं मिली है। जिले के 363 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इनमें ज्यादातर मामले खसरा रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं के हैं। जमीन के दस्तावेजों में जानकारी का मिलान और सुधार नहीं होने से फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

85 हजार से ज्यादा किसानों को मिला 517 करोड़ रुपये का ऋण
महासमुंद जिले में इस खरीफ सीजन के दौरान सहकारी समितियों के माध्यम से 85 हजार 779 किसानों को 517 करोड़ रुपये का कृषि ऋण दिया गया है। इस साल ऋण वितरण का लक्ष्य 500 करोड़ रुपये रखा गया था, लेकिन समितियों ने इससे अधिक कर्ज किसानों को उपलब्ध कराया। इस ऋण से किसानों को खाद, बीज और खेती की दूसरी जरूरतें पूरी करने में मदद मिली है।
विज्ञापन
विज्ञापन