गन्ने की कीमत और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को लेकर किसानों की मांगों के बीच केंद्र सरकार ने 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में गन्ना किसानों के साथ बैठक बुलाने का फैसला किया है। बैठक में चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी समेत किसानों की दूसरी मांगों पर चर्चा होगी। खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
हुबली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जोशी ने कहा कि किसानों के विरोध और बेहतर कीमत की मांग को देखते हुए बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा, “हम तानाशाह नहीं हैं। इसीलिए किसानों के साथ बैठक बुलाई गई है।”
चीनी एमएसपी और गन्ने का भाव अलग-अलग
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य और गन्ना किसानों को मिलने वाली कीमत दो अलग-अलग मुद्दे हैं। उनके मुताबिक, चीनी का एमएसपी उस समय लागू किया गया था, जब बाजार में चीनी की कीमतों में तेज गिरावट आई थी। इसका उद्देश्य चीनी को तय न्यूनतम कीमत से नीचे बिकने से रोकना था।
जोशी ने स्पष्ट किया कि अगर चीनी के एमएसपी में बढ़ोतरी होती भी है तो इससे गन्ना किसानों को अपने आप ज्यादा भुगतान मिलना जरूरी नहीं है, क्योंकि चीनी का एमएसपी और गन्ने की कीमत सीधे तौर पर एक-दूसरे से जुड़ी नहीं हैं।
राज्यों को एसएपी तय करने का अधिकार
गन्ने की कीमत को लेकर जोशी ने कहा कि राज्य सरकारों को राज्य सलाहकारी मूल्य (एसएपी) तय करने का अधिकार है। उन्होंने कर्नाटक का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने एसएपी तय नहीं किया है। उन्होंने कहा कि एसएपी से जुड़े भुगतान दायित्वों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को आवश्यक धन उपलब्ध कराना होगा।
इथेनॉल खरीद का भी जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार एमएस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर रही है। उन्होंने बताया कि कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख इथेनॉल उत्पादक राज्यों में शामिल हैं। केंद्र सरकार अपनी नीति के तहत इथेनॉल की खरीद कर रही है।
इथेनॉल उत्पादन को गन्ने के साथ जोड़कर देखा जाता है, क्योंकि गन्ने और चीनी उद्योग से जुड़े उत्पादों से इथेनॉल तैयार किया जाता है। सरकार की इथेनॉल नीति का एक उद्देश्य पेट्रोल में इसके मिश्रण को बढ़ावा देना भी है।
किसानों के मुद्दे पर कर्नाटक सरकार पर निशाना
जोशी ने किसानों की समस्याओं से निपटने के तरीके को लेकर कर्नाटक की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना भी की। उन्होंने सूखा राहत, बिजली की कमी और किसान सम्मान योजना के तहत वित्तीय सहायता बंद किए जाने का मुद्दा उठाया। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने किसानों की परेशानियों को दूर करने के लिए पर्याप्त नए उपाय नहीं किए हैं। ये आरोप कर्नाटक सरकार के खिलाफ जोशी के राजनीतिक बयान हैं।
12 अक्टूबर की बैठक पर किसानों की नजर
अब 12 अक्टूबर को होने वाली बैठक में किसानों की मांगों पर केंद्र का रुख सामने आएगा। चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी के साथ गन्ने के भुगतान और कीमत से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। बैठक के बाद किसानों की मांगों पर सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।
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