इलायची की बढ़ती कीमतों से किसानों और कारोबारियों में खुशी है। घरेलू बाजार में मांग मजबूत होने और निर्यात के लिए पूछताछ बढ़ने से इलायची बाजार को सहारा मिल रहा है। नीलामी में इलायची का औसत भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर 3,200 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गया है। वहीं, नीलामी केंद्रों पर रोजाना करीब 100 टन इलायची की आवक हो रही है। हालांकि, ऊंची कीमतों और निर्यात में आ रही मुश्किलों के कारण खरीदार अभी जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं।
कम बारिश के बाद सुधरी इलायची की फसल
नीलामी संस्था केसीपीएमसी के महाप्रबंधक पीसी पुन्नूसे के मुताबिक, सीजन की शुरुआत में कम बारिश के कारण इलायची का उत्पादन प्रभावित हुआ था। खासकर केरल के इडुक्की क्षेत्र में जून और जुलाई के दौरान सामान्य से काफी कम बारिश हुई। इससे पौधों में फूल आने और फल लगने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। पौधों की बढ़वार भी धीमी रही।
हालांकि, बाद में हुई बारिश से पौधों को राहत मिली और बागानों में फसल की स्थिति सुधर गई। इससे किसानों को अच्छी पैदावार मिलने लगी है। उम्मीद है कि बेहतर उत्पादन का सिलसिला दिसंबर तक जारी रह सकता है।
अगले साल कम फसल की चिंता
इस साल फिलहाल फसल की स्थिति बेहतर है, लेकिन किसान अगले साल उत्पादन घटने की आशंका से चिंतित हैं। इसकी वजह अल नीनो की स्थिति है, जिससे गर्मी का मौसम लंबा चलने और मौसम में बदलाव होने की आशंका है। ऐसे में इलायची की फसल काफी हद तक आने वाले महीनों में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी।
इडुक्की के इलायची उत्पादक एसबी प्रभाकर के मुताबिक, इन दिनों इलायची की तुड़ाई तेजी से चल रही है। अक्टूबर में हुई बारिश से राहत मिली है, लेकिन मानसून के दौरान बारिश की कमी से फलियां झड़ गईं और उनमें दाने ठीक से विकसित नहीं हो सके। इससे करीब 30 प्रतिशत नुकसान होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि अब फसल की स्थिति काफी हद तक उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश पर निर्भर करेगी। अल नीनो की आशंका को देखते हुए दिसंबर के मध्य तक बारिश पर नजर रखना जरूरी है।
त्योहारों से बढ़ी घरेलू बाजार में मांग
त्योहारी सीजन नजदीक आने के साथ देश के ग्रामीण और घरेलू बाजारों में इलायची की मांग बनी हुई है। हालांकि, कीमतें ऊंची होने के कारण खरीदार सावधानी बरत रहे हैं। वे पहले से ज्यादा माल खरीदने के बजाय जरूरत के मुताबिक खरीदारी कर रहे हैं।
बाजार से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि त्योहारों के दौरान मांग बनी रहने से इलायची की कीमतों को सहारा मिलेगा। फिलहाल जनवरी तक कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, अगर आगे आपूर्ति घटती है तो भाव में और तेजी आ सकती है।
निर्यात की मांग बढ़ी, लेकिन कारोबार में मुश्किलें
भारतीय इलायची के निर्यात के लिए पूछताछ बढ़ी है, लेकिन अभी तक बड़े और पक्के ऑर्डर नहीं मिले हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण माल भेजने में देरी हो रही है। इसके अलावा, माल ढुलाई की लागत बढ़ने से निर्यात कारोबार पर दबाव पड़ रहा है।
दूसरी ओर, ग्वाटेमाला में इलायची की फसल खराब होने के बावजूद खाड़ी देशों में भारतीय इलायची की मांग बढ़ रही है। बाजार के जानकारों का मानना है कि निर्यात में तेजी आने से भारतीय इलायची बाजार को मजबूती मिल सकती है।
फिलहाल घरेलू मांग और ऊंचे भाव से किसानों को राहत मिल रही है। लेकिन आने वाले समय में इलायची की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह फसल की उपलब्धता, बारिश और निर्यात मांग पर निर्भर करेगा।
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