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धान की बंपर उपज चुनौती : हरियाणा-पंजाब के गोदाम क्षमता से ज्यादा भरे, मंडियों में कतारें, खरीद लक्ष्य पर सवाल

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 12 Oct 2026 02:29 PM IST
सार

  • हरियाणा-पंजाब में धान की बंपर उपज के आसार 
  • हरियाणा में किसानों को फसल बेचने के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है
  • विपक्ष का आरोप नमी का हवाला देकर किसानों को एमएसपी से कम भाव दिया जा रहा है
  • पंजाब और हरियाणा में खरीद सीमा को लेकर सवाल उठे हैं
  • दोनों राज्यों के गोदामों में जगह की कमी से चुनौती बनती दिख रही है

धान की बंपर उपज और सीमित खपत एमएसपी व्यवस्था के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है।
धान की बंपर उपज और सीमित खपत एमएसपी व्यवस्था के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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पंजाब और हरियाणा में MSP पर धान खरीद शुरू होने के साथ खरीद व्यवस्था में खामियां दोबारा सतह पर दिखने लगी हैं। हरियाणा में धान उठान में देरी और खरीद प्रक्रिया की कमियों के चलते किसानों को 3-4 या उससे ज्यादा समय का इंतजार करना पड़ रहा है। इस सब के बीच राजनीति भी सक्रिया हो गई है। दूसरी तरफ पंजाब में लक्ष्य  से ज्यादा धान उपज की संभावना जताई जा रही है। यहां के किसान नमी की तय सरकारी सीमा को लेकर चिंता में है।

भारत में पंजाब और हरियाणा धान के प्रमुख उत्पादक राज्यों में गिने जाते हैं, चालू सीजन में नई फसल से निकलने वाले चावल का भंडारण दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।

प्रति एकड़ खरीद पर लिमिट और एमएसपी (MSP) से कम मिल रहा दाम
कांग्रेस का कहना है कि हरियाणा में इस बार प्रति एकड़ 35 से 37 प्रति क्विंटल धान की उपज हो रही है। लेकिन, प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में एजेंसियों ने खरीद की सीमा 25 क्विंटल प्रति एकड़ तय की है। ऐसे में किसान बची हुई 10 से 12 क्विंटल उपज का क्या करेंगे?

बीते सीजन का धान गोदाम से नहीं उठाया, धान खरीद में असमंजस
अखिल भारतीय राष्ट्रीय किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता इंदरजीत सिंह गोराया का कहना है कि धान खरीद में असमंजस बनी हुई है। उनका आरोप है कि मंडियों में कौनसी एजेंसी कितनी धान की खरीद करेगी, यह अभी तक पूरी तरह साफ नहीं है। बीते साल का खरीदा गया धान अभी तक गोदामों से नहीं उठाया गया है। 

नमी के नाम पर एमएसपी में कटौती 
कांग्रेस के इंदरजीत सिंह ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने चालू सीजन ेक लिए धान की एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय की है, लेकिन काफी ज्यादा नमी का हवाला देकर किसानों को 2,200 से 2,300 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है।

पंजाब, खरीद लक्ष्य  से ज्यादा धान उत्पादन के आसार
पंजाब में इस खरीफ 19 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान है, दूसरी तरफ खरीद लक्ष्य 18 मिलियन टन तय किया गया है। लेकिन किसानों का मानना है कि असल उत्पादन 20 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर सकता है। 

धान की नमी को लेकर चिंता
किसान धान की नमी की सरकारी सीमा को लेकर भी चिंता में हैं। उनका तर्क है कि नई धान की किस्मों में प्राकृतिक  रूप से नमी ज्यादा होता है। इसके अलावा, जब मशीनों से कटाई की जाती है, तो इस नमी को कम करना और भी कठिन हो जाता है।

धान की बंपर उपज, खपत में सीमित रास्ते समस्या की जड़
विशेषज्ञों और जानकारों का मानना है कि इस पूरी समस्या की असली जड़ भारत में धान का अत्यधिक उत्पादन और खपत के सीमित रास्ते हैं। लगातार हो रही बंपर पैदावार के कारण सरकारी खरीद व्यवस्था और केंद्रीय पूल के गोदामों पर भारी दबाव पड़ रहा है।

पंजाब-हरियाणा में क्षमता से ज्यादा अनाज का भंडारण
पंजाब की बात करें तो इस साल 18 मिलियन टन धान (मिलिंग के बाद लगभग 12.06 मिलियन टन चावल) खरीदने की योजना है। लेकिन 31 अगस्त 2026 तक पंजाब के पास पहले से ही 15.3 मिलियन टन पुराने चावल का स्टॉक रखा हुआ था। 1 अगस्त 2026 तक पंजाब की कुल भंडारण क्षमता (गेहूं और चावल मिलाकर) 26.84 मिलियन टन थी, जबकि 31 अगस्त को कुल स्टॉक 27.64 मिलियन टन तक पहुंच गया था, जो क्षमता से अधिक है।

हरियाणा में केंद्र का लक्ष्य लगभग 5.8 मिलियन टन धान (मिलिंग के बाद लगभग 3.8 मिलियन टन चावल) खरीदने का है। 31 अगस्त 2026 तक राज्य के पास 4.3 मिलियन टन पुराना चावल मौजूद था। 1 अगस्त को राज्य की कुल क्षमता 13.94 मिलियन टन थी, जबकि 31 अगस्त को कुल स्टॉक 14.32 मिलियन टन दर्ज किया गया।

ये आंकड़े नई फसल के आने से पहले के हैं। हालांकि, सितंबर और अक्टूबर में कुछ अनाज गोदामों से निकाला जाता है, लेकिन इसके बावजूद यह साफ है कि नई फसल के बाजार में आने से इन दोनों प्रमुख धान उत्पादक राज्यों के खरीद और भंडारण सिस्टम पर भारी दबाव पड़ रहा है।


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