महाराष्ट्र में एक छोटी बच्ची ने सूखे से जूझ रहे किसानों की मदद के लिए ऐसा कदम उठाया, जिसने लोगों का दिल जीत लिया। वर्दा तिमांडे ने अपने छोटे भाई के साथ अपनी गुल्लक में जमा 3,575 रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए। बच्चों ने अपनी बचत खुद पर खर्च करने के बजाय उन किसानों की मदद के लिए देने का फैसला किया, जो सूखे के कारण परेशान हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बच्चों के इस कदम की सराहना की है। उन्होंने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर बच्चों से बातचीत का वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की यह पहल दूसरों के लिए भी प्रेरणा है।
मुख्यमंत्री ने कहा- छोटे हाथों से बड़ी मदद
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बच्चों के इस योगदान को ‘छोटे हाथों से बड़ी मदद’ बताया। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में किसानों की परेशानी को समझना और उनकी मदद के लिए आगे आना बड़ी बात है। मुख्यमंत्री की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, वर्दा ने कहा, “हमारी छोटी सी मदद से किसान चाचाओं के चेहरों पर खुशी आएगी।” बच्ची की इस बात ने मुख्यमंत्री को भावुक कर दिया। उन्होंने किसानों के प्रति बच्चों की संवेदनशीलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि किसानों की मेहनत से ही लोगों का जीवन और आजीविका चलती है।
चिमुकल्या हातांची मोठी मदत… बळीराजाप्रती मायेचा ओलावा! 🙏 वरदा तिमांडे या चिमुकलीने धाकट्या भावासह बचत करून जमवलेल्या ₹3575 चा धनादेश दुष्काळग्रस्त शेतकऱ्यांच्या मदतीसाठी मुख्यमंत्री सहाय्यता निधीमध्ये देण्याचा निर्णय मनाला स्पर्शून गेला. 'आपल्या छोट्याशा मदतीमुळे शेतकरी काकांच्या चेहऱ्यावर आनंद येईल' या शेतकऱ्यांविषयीची आस्था व्यक्त करणाऱ्या वरदाच्या शब्दांनी भारावून गेलो. ज्या बळीराजाच्या कष्टांवर आपले जीवन अवलंबून आहे, त्याच्या वेदना एका चिमुकलीलाही जाणवल्या, हीच समाजासाठी मोठी शिकवण आहे. वरदा, तुझ्या या संवेदनशील मनाला आणि तुझ्या चिमुकल्या हातांनी केलेल्या मोठ्या मदतीला मनापासून सलाम! #Maharashtra #Farmer #CMRF
अपनी बचत किसानों की मदद के लिए दी
वर्दा और उसके छोटे भाई ने अपनी गुल्लक में पैसे जमा किए थे। दोनों ने इन पैसों को खुद पर खर्च करने के बजाय सूखे से प्रभावित किसानों की सहायता के लिए दान करने का फैसला किया। उन्होंने कुल 3,575 रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए। बच्चों का यह कदम दिखाता है कि दूसरों की मदद करने के लिए बड़ी रकम होना जरूरी नहीं है। छोटी-सी मदद भी किसी के लिए उम्मीद बन सकती है।
सोशल मीडिया पर हो रही तारीफ
बच्चों के इस नेक काम की सोशल मीडिया पर भी खूब सराहना हो रही है। लोगों ने उनकी समझदारी और किसानों के प्रति संवेदनशीलता की तारीफ की। कई लोगों ने इसके लिए बच्ची के माता-पिता को भी श्रेय दिया और कहा कि बच्चों में बचपन से ही दूसरों की मदद करने के संस्कार विकसित करना जरूरी है। कुछ लोगों ने वर्दा के इस कदम को ‘छोटे हाथ, बड़ा दिल’ बताते हुए उसकी प्रशंसा की। बच्चों की इस पहल ने लोगों को यह संदेश दिया कि जरूरतमंदों की मदद करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि अच्छा इरादा मायने रखता है।
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