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नन्ही बच्ची का बड़ा दिल : गुल्लक तोड़कर सूखाग्रस्त किसानों को दी जमा रकम, CM फडणवीस ने की तारीफ

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 26 Oct 2026 05:01 PM IST
सार

  • गुल्लक से किसानों की मदद: वर्दा तिमांडे और उसके छोटे भाई ने 3,575 रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए।

  • सूखा प्रभावित किसानों के लिए योगदान: बच्चों ने अपनी बचत किसानों की सहायता के लिए देने का फैसला किया।

  • सीएम फडणवीस ने की तारीफ: मुख्यमंत्री ने बच्चों के इस कदम को ‘छोटे हाथों से बड़ी मदद’ बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा- छोटे हाथों से बड़ी मदद
मुख्यमंत्री ने कहा- छोटे हाथों से बड़ी मदद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महाराष्ट्र में एक छोटी बच्ची ने सूखे से जूझ रहे किसानों की मदद के लिए ऐसा कदम उठाया, जिसने लोगों का दिल जीत लिया। वर्दा तिमांडे ने अपने छोटे भाई के साथ अपनी गुल्लक में जमा 3,575 रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए। बच्चों ने अपनी बचत खुद पर खर्च करने के बजाय उन किसानों की मदद के लिए देने का फैसला किया, जो सूखे के कारण परेशान हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बच्चों के इस कदम की सराहना की है। उन्होंने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर बच्चों से बातचीत का वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की यह पहल दूसरों के लिए भी प्रेरणा है।

मुख्यमंत्री ने कहा- छोटे हाथों से बड़ी मदद
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बच्चों के इस योगदान को ‘छोटे हाथों से बड़ी मदद’ बताया। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में किसानों की परेशानी को समझना और उनकी मदद के लिए आगे आना बड़ी बात है। मुख्यमंत्री की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, वर्दा ने कहा, “हमारी छोटी सी मदद से किसान चाचाओं के चेहरों पर खुशी आएगी।” बच्ची की इस बात ने मुख्यमंत्री को भावुक कर दिया। उन्होंने किसानों के प्रति बच्चों की संवेदनशीलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि किसानों की मेहनत से ही लोगों का जीवन और आजीविका चलती है।

अपनी बचत किसानों की मदद के लिए दी
वर्दा और उसके छोटे भाई ने अपनी गुल्लक में पैसे जमा किए थे। दोनों ने इन पैसों को खुद पर खर्च करने के बजाय सूखे से प्रभावित किसानों की सहायता के लिए दान करने का फैसला किया। उन्होंने कुल 3,575 रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए। बच्चों का यह कदम दिखाता है कि दूसरों की मदद करने के लिए बड़ी रकम होना जरूरी नहीं है। छोटी-सी मदद भी किसी के लिए उम्मीद बन सकती है।

सोशल मीडिया पर हो रही तारीफ
बच्चों के इस नेक काम की सोशल मीडिया पर भी खूब सराहना हो रही है। लोगों ने उनकी समझदारी और किसानों के प्रति संवेदनशीलता की तारीफ की। कई लोगों ने इसके लिए बच्ची के माता-पिता को भी श्रेय दिया और कहा कि बच्चों में बचपन से ही दूसरों की मदद करने के संस्कार विकसित करना जरूरी है। कुछ लोगों ने वर्दा के इस कदम को ‘छोटे हाथ, बड़ा दिल’ बताते हुए उसकी प्रशंसा की। बच्चों की इस पहल ने लोगों को यह संदेश दिया कि जरूरतमंदों की मदद करने के लिए उम्र नहीं, बल्कि अच्छा इरादा मायने रखता है।
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