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Bhutan Shintafu Lake Flood From Himalayan Lake Danger Of Reaching India Alert In Bengal And Assam
Bhutan Shintafu Lake: हिमालय की झील से निकला सैलाब... भारत तक पहुंचने का खतरा, बंगाल-असम में अलर्ट
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 30 Oct 2026 12:13 PM IST
सार
भूटान की शिंताफू ग्लेशियर झील से अचानक पानी निकलने के बाद भारत के पश्चिम बंगाल और असम में अलर्ट जारी किया गया। जानिए GLOF क्या है और संकोश नदी के रास्ते भारत तक कैसे पहुंच सकता है बाढ़ का पानी।
29 अक्टूबर की शाम भूटान की पहाड़ियों में स्थित एक ग्लेशियर झील से अचानक पानी का सैलाब निकला और देखते ही देखते निचले इलाकों में तबाही मच गई। सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं, पुल बहने की आशंका जताई गई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा। लेकिन इस घटना ने भारत की भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि झील से निकला पानी संकोश नदी के रास्ते पश्चिम बंगाल और असम तक पहुंच सकता है। आखिर 14,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस झील में ऐसा क्या हुआ और भारत के लिए कितना बड़ा खतरा पैदा हो सकता है?
भूटान में कहां है शिंताफू झील?
शिंताफू झील भूटान के उत्तर-पश्चिम में गासा जिले के लाया क्षेत्र में स्थित है। यह वाकिला पर्वत के नीचे लुंगो इलाके में समुद्र तल से करीब 4,480 मीटर यानी लगभग 14,700 फीट की ऊंचाई पर है। यह झील भूटान की राजधानी थिंपू के उत्तर में हिमालय के ऊंचे पहाड़ी इलाके में स्थित है। इससे निकलने वाला पानी मो छू नदी के जलग्रहण क्षेत्र में पहुंचता है।
29 अक्टूबर की शाम झील से अचानक पानी का तेज बहाव शुरू हुआ। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, रात करीब 8:15 बजे तक बाढ़ का पानी तक्तसेमाखांग इलाके में पहुंच गया। इससे लाया जाने वाली सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। गासा छाचू का प्रसिद्ध गर्म पानी का झरना परिसर भी बाढ़ की चपेट में आ गया। 30 अक्टूबर की सुबह तक किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं थी। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाकों से लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया था।
बाद की रिपोर्टों में पुनाखा-गासा हाईवे का एक हिस्सा बहने और सड़क को अगले आदेश तक बंद करने की जानकारी सामने आई। दो बेली ब्रिज के बहने की आशंका भी जताई गई है। नुकसान का आकलन अभी जारी है।
पहले से खतरे में थी यह झील
शिंताफू कोई सामान्य पहाड़ी झील नहीं है। यह ग्लेशियर के आसपास बर्फ पिघलने से बनी झील है। भूटान की ऐसी 17 झीलों में इसे भी शामिल किया गया था, जिनसे बाढ़ का खतरा हो सकता है। वैज्ञानिकों ने 2023 में भी इस झील का अध्ययन किया था। इसमें झील की गहराई, आसपास के पहाड़ों, मिट्टी और पत्थरों से बने प्राकृतिक बांध तथा ग्लेशियर की स्थिति का जायजा लिया गया था।
एक वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक, शिंताफू झील का क्षेत्रफल करीब 2,38,314 वर्ग मीटर यानी लगभग 59 एकड़ है। 2021 के अध्ययन में इसमें करीब 62 लाख घन मीटर पानी होने का अनुमान लगाया गया था। यह लगभग 2,480 ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल में भरे पानी के बराबर है। हालांकि, यह पुराना अनुमान है। मौजूदा घटना में कितना पानी बाहर निकला, इसका अलग आकलन सामने आया है। कुछ ताजा मीडिया रिपोर्टों में करीब 74 लाख घन मीटर पानी निकलने की बात कही गई है।
झील का पानी भारत तक कैसे पहुंचता है?
सवाल है कि भूटान के पहाड़ों में हुई इस घटना से भारत में बाढ़ का खतरा कैसे पैदा हो सकता है? इसे नदियों के रास्ते से समझा जा सकता है। शिंताफू झील का पानी सबसे पहले मो छू नदी के जलग्रहण क्षेत्र में पहुंचता है। यह नदी भूटान के गासा और पुनाखा इलाकों से होकर दक्षिण की ओर बहती है। पुनाखा में मो छू नदी का मिलन फो छू नदी से होता है। दोनों नदियां मिलकर पुनात्सांगछू नदी बनाती हैं।
आगे चलकर यही नदी भारत में संकोश नदी के नाम से जानी जाती है। कुछ इलाकों में इसे गदाधर नदी भी कहा जाता है। इस नदी के रास्ते भूटान में झील से निकला पानी भारत के उत्तरी बंगाल और असम तक पहुंच सकता है। तेज बहाव के साथ पानी अपने रास्ते में मिट्टी, पत्थर और पेड़ों के तने भी बहाकर ला सकता है। इससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। नदी किनारे बसे गांवों, खेतों, पुलों और सड़कों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
भारत में कहां-कहां जारी हुआ अलर्ट?
भूटान में झील से पानी निकलने की खबर मिलते ही भारत में भी प्रशासन सतर्क हो गया। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और कूचबिहार जिलों में संकोश नदी के आसपास के इलाकों पर खास नजर रखी जा रही है। जलपाईगुड़ी और उत्तर बंगाल के दूसरे संवेदनशील इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। असम में धुबरी समेत संकोश नदी के आसपास के इलाकों को अलर्ट किया गया। कुछ रिपोर्टों में कोकराझार, बक्सा और चिरांग जिलों को भी निगरानी में रखने की जानकारी दी गई है।
पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज कुमार ओरांव ने संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। कुमारग्राम और आसपास के इलाकों में प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने को कहा। उत्तर बंगाल विकास मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने भी बताया कि नदी किनारे रहने वाले लोगों को अलर्ट कर दिया गया है। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी है।
अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शाह के मुताबिक, प्रशासन ने राहत और बचाव के इंतजाम किए हैं। उनके अनुसार, करीब 4,000 से 5,000 लोगों को स्कूलों में बनाए गए राहत केंद्रों में पहुंचाया गया, जबकि 6,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया। एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई है और एनडीआरएफ की टीम भी भेजी गई है। लोगों के लिए पीने के पानी, सूखे राशन और दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था की गई है। संकोश नदी प्रणाली के लिए रेड अलर्ट जारी होने की जानकारी भी दी गई।
केंद्र सरकार ने भी भूटान से आने वाले पानी को लेकर संबंधित एजेंसियों को सतर्क किया। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के निगरानी केंद्रों को नदी के जलस्तर पर नजर रखने और किसी भी असामान्य बदलाव की जानकारी तुरंत देने को कहा गया। इनमें बारोबिशा, संकोश एलआरपी, गोलकगंज और बालाडोबा जैसे केंद्र शामिल हैं।
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