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गन्ने के रस-बी-हैवी शीरे से इथेनॉल बनाने पर रोक : केंद्र ने राज्यों को दिए सख्त निगरानी के निर्देश, जानें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 23 Oct 2026 09:15 AM IST
सार

  • इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 में तेल कंपनियां गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी।
  • खाद्य मंत्रालय ने चीनी मिलों और राज्यों के आबकारी विभागों को इस फैसले का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।
  • चीनी आयात परमिट की समय सीमा 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई है। हालांकि, आयात की अन्य शर्तें पहले जैसी रहेंगी।
  • उद्योग जगत के जानकारों के अनुसार, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें गिरने के कारण व्यापारियों ने 3 से 4 लाख टन आयात कोटा वापस किया है। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

केंद्र ने इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 में सीमित गन्ना उपयोग को लागू करने का निर्देश दिया।
केंद्र ने इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 में सीमित गन्ना उपयोग को लागू करने का निर्देश दिया। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 में तेल कंपनियां गन्ने के रस, सिरप या बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। इस मामले को लेकर खाद्य मंत्रालय ने गुरुवार को सभी चीनी मिलों को एक पत्र लिखा है। मंत्रालय के अनुसार, आगामी इथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के दौरान गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल बनाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

राज्यों को सख्त निगरानी रखने के निर्देश
खाद्य मंत्रालय ने सभी चीनी उत्पादक राज्यों के आबकारी विभागों के सचिवों को भी एक अलग पत्र भेजा है। सरकार के अनुसार, राज्यों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने यहां सभी संबंधित अधिकारियों को जरूरी निर्देश जारी करें ताकि इस फैसले का कड़ाई से पालन हो सके। मंत्रालय ने कहा है कि राज्य आबकारी विभाग जरूरी कदम उठाएं और यह निगरानी रखें कि 2026-27 के दौरान गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से बिल्कुल भी एथेनॉल न बने।

चीनी की कमी और आयात के नियमों में बदलाव
भारत को 2025-26 के चीनी सीजन (अक्टूबर-सितंबर) में चीनी की कमी का सामना करना पड़ा था और 2026-27 में भी ऐसी ही स्थिति रहने की आशंका है। इसे देखते हुए सरकार कई कदम उठा रही है। पिछले सीजन में 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति देने के बाद सरकार ने अचानक उस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद अगस्त में 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त (बिना टैक्स के) आयात की अनुमति दी गई थी, लेकिन परमिट केवल 8 लाख टन के लिए ही जारी किए गए थे।

विदेश व्यापार महानिदेशालय के अनुसार, इन आयात परमिटों की समय सीमा 31 अक्टूबर को खत्म हो रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है। डीजीएफटी ने अपनी अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि 20 अगस्त 2026 की अधिसूचना की अन्य सभी शर्तें पहले जैसी ही रहेंगी।

व्यापारियों ने आयात कोटा सरकार वापस किया?
उद्योग जगत के जानकारों के अनुसार, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें गिरने के कारण अभी तक कोई आयात नहीं हो पाया है। ऐसा बताया जा रहा है कि व्यापारियों ने 3 से 4 लाख टन का आयात कोटा सरकार को वापस कर दिया है, हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

गन्ना पेराई का काम शुरू
दूसरी तरफ, गन्ने से चीनी निकलने की दर कम होने के बावजूद महाराष्ट्र में लगभग 70 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी है और चालू सीजन में अब तक 1.25 लाख टन चीनी बन चुकी है। सरकार ने मिलों को यह छूट दी है कि वे अक्टूबर और नवंबर में बनाई गई इस चीनी को बिना अनुमति के किसी भी समय बेच सकती हैं। यह मात्रा उनके तय मासिक कोटे से अलग होगी।

हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि मिलें इस महीने वह चीनी बेच रही हैं जो 30 सितंबर को खत्म हुए पिछले सीजन की बची हुई थी। व्यापारियों के अनुसार, 30 सितंबर को मिलों के पास केवल 32 से 35 लाख टन का बहुत कम स्टॉक बचा था। ऐसे में नवंबर के कोटे में अक्टूबर में बनी चीनी को भी शामिल करना होगा। उत्तर प्रदेश में गन्ने की पेराई देर से शुरू होने के कारण अगले महीने बाजार में चीनी की मांग को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।


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