केंद्र सरकार कपास आयात पर लागू शुल्क छूट को दो महीनों (दिसंबर तक) के लिए बढ़ा सकती है। यह जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है। इससे पहले सरकार ने एक जून से 31 अक्तूबर तक कुल पांच महीने के लिए कपास पर लगने वाली 11 प्रतिशत सीमा शुल्क को माफ कर दिया था।
बाजार में कपास की कीमतों में तेजी, कपड़ा उद्योग मांग रहा सस्ता कपास
आमतौर पर अक्टूबर में नई फसल बाजार में आने पर कीमतें कम हो जाती हैं, लेकिन इस साल पैदावार कम होने की आशंका के कारण कीमतें तेज बनी हुई हैं। इसी कारण मिलें शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रही हैं। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मंत्रालयों के बीच बातचीत पूरी हो चुकी है और सरकार जल्द ही दिसंबर के अंत तक छूट बढ़ाने का आदेश जारी कर सकती है।
एमएसपी से ऊपर कपास का बाजार भाव
वर्तमान में कपास की घरेलू कीमत 9,000 रुपये प्रति 100 किलो से ऊपर है, जो सरकार द्वारा नए सीजन के लिए तय किए गए न्यूनतम मूल्य (8,717 रुपये) से काफी अधिक है। विश्लेषकों का मानना है कि खराब मानसून की वजह से उत्पादन प्रभावित हुआ है। अतिरिक्त आयात से वैश्विक कपास की कीमतों को सहारा मिल सकता है और घरेलू कीमतों में आ रही तेजी पर रोक लग सकती है।
कपास उत्पादन मांग से कम रहने का अनुमान
व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, 2026-27 में भारत का कपास उत्पादन 29 मिलियन (2.9 करोड़) गांठों से नीचे रहने की संभावना है, जबकि मांग 34 मिलियन (3.4 करोड़) गांठों से अधिक है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि किसान अभी भी पुराने जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) बीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे फसल में कीड़ों का हमला ज्यादा हो रहा है और पैदावार घट रही है।
एसएंडपी ग्लोबल की प्रमुख विश्लेषक दीपांशी अग्रवाल के अनुसार, कम घरेलू उत्पादन, पांच वर्षों में सबसे कम स्टॉक (लगभग 31 प्रतिशत) और कपड़ों की मजबूत मांग इस छूट को बढ़ाने का ठोस कारण बनते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इससे घरेलू बाजार की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
कपड़ा उद्योग को मिलेगी मजबूती, लेकिन महंगी विदेशी दरें एक चुनौती
व्यापार मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों (अप्रैल से) में भारत का कपास आयात पिछले साल के मुकाबले 63 प्रतिशत बढ़कर 1.1 अरब डॉलर हो गया है। कपड़ा उद्योग से जुड़े लोगों का सुझावहै कि सरकार को लंबे समय के लिए आयात टैक्स हटा देना चाहिए। उनके अनुसार, इस टैक्स से केवल उत्पादन की लागत बढ़ती है। टैक्स हटने से भारतीय कपड़ा उद्योग को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से मुकाबला करने में मदद मिलेगी। हालांकि जानकारों का कहना है कि भले ही आयात पर टैक्स छूट मिल जाए, लेकिन बड़ी मात्रा में कपास मंगाना मुश्किल हो सकता है। इसके मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी कपास की ऊंची दरें (83 सेंट प्रति पाउंड से अधिक), महंगा माल भाड़ा और कमजोर रुपया हैं।