हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादक इलाकों में इस बार मौसम का अजीब असर देखने को मिल रहा है। जिन सेब के पेड़ों पर आमतौर पर अप्रैल में फूल खिलते हैं, उन पर अक्तूबर में ही फूल आने लगे हैं। शिमला, कुल्लू और मंडी जिलों के कई बगीचों में यह समस्या सामने आई है। बागवानों को आशंका है कि समय से पहले फूल खिलने से अगले साल सेब की फसल प्रभावित हो सकती है।
बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन इलाकों में अगस्त या सितंबर में ही सेब के पेड़ों की पत्तियां झड़ गईं, वहां यह समस्या ज्यादा दिखाई दे रही है। पिछले साल भी अधिक बारिश और समय से पहले पतझड़ के कारण कई बगीचों में असामान्य रूप से फूल खिले थे। इसका असर इस साल की फसल पर पड़ा और उत्पादन प्रभावित हुआ। इस बार बारिश कम होने से कई जगह सेब का आकार और रंग भी ठीक से विकसित नहीं हो पाया।
फंगल रोगों और समय से पहले पतझड़ ने बढ़ाई परेशानी
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, सेब के बगीचों में मार्सोनिना ब्लॉच, अल्टरनेरिया फंगस और समय से पहले पत्तियां झड़ने की समस्या ने भी बागवानों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार सेब का सीजन कमजोर रहने से उनकी चिंता पहले ही बढ़ी हुई है। अब अक्तूबर में पेड़ों पर दोबारा फूल आने से आगामी सीजन में उत्पादन को लेकर आशंका बढ़ गई है। शिमला जिले के ठियोग, कोटखाई, जुब्बल और रोहड़ू, कुल्लू के आनी तथा मंडी जिले के करसोग क्षेत्र में सेब के पेड़ों पर असामान्य रूप से फूल खिलने की जानकारी सामने आई है।
समय से पहले पत्तियां झड़ने से बदला पेड़ों का प्राकृतिक चक्र
उद्यान विशेषज्ञ और नौणी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. विजय सिंह ठाकुर के अनुसार, सेब के पेड़ों में समय से पहले पत्तियां झड़ना इस समस्या की प्रमुख वजह है। पत्तियां झड़ने के बाद पेड़ सुप्तावस्था यानी डोरमेंसी में चले जाते हैं। आमतौर पर यह प्रक्रिया सर्दियों में होती है। इसके बाद अनुकूल तापमान मिलने पर पेड़ों में फूल आने लगते हैं।
डॉ. ठाकुर के मुताबिक, इस बार अक्तूबर में तापमान की स्थिति ऐसी बनी, जिससे पेड़ों में समय से पहले फूल खिलने लगे। जिन शाखाओं पर अभी फूल आ गए हैं, उनमें अगले साल अप्रैल में दोबारा फूल आने की संभावना कम हो सकती है। इससे आने वाले सीजन में सेब उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
रेड डिलीशियस किस्म में बढ़ रहीं समस्याएं
कोटखाई के ढांगवी गांव के बागवान रामलाल चौहान का कहना है कि रेड डिलीशियस किस्म के सेब के पेड़ों में कई तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं। इनमें समय से पहले पत्तियां झड़ना और अक्तूबर में फूल खिलना भी शामिल है। उनके अनुसार, कुछ साल पहले तक बगीचों में बीमारियों का प्रकोप कम था, लेकिन अब बागवानों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
चौहान ने सुझाव दिया कि रेड डिलीशियस किस्म पर निर्भरता कम करने के साथ गाला और फ्यूजी जैसी किस्मों को अपनाने पर भी विचार करना चाहिए। इन किस्मों का चयन करते समय स्थानीय मौसम और बीमारियों के प्रति उनकी प्रतिरोधक क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।
बागवानी विभाग जुटाएगा जानकारी
हिमाचल प्रदेश के बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि विभाग सेब के पेड़ों पर समय से पहले फूल आने की समस्या की जानकारी जुटाएगा। इसके तहत पता लगाया जाएगा कि प्रदेश के किन-किन क्षेत्रों में यह स्थिति सामने आई है। इसके बाद समस्या की स्थिति को समझने में मदद मिल सकेगी।
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