भारतीय कृषि में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। एक ओर मौसम की अनिश्चितता, बेमौसम बारिश और बढ़ती गर्मी किसानों की चुनौतियां बढ़ा रही हैं, तो दूसरी ओर खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल के नए रास्ते खुल रहे हैं। साल 2027 में खेती को अधिक फायदेमंद बनाने, लागत घटाने और फसलों को मौसम के जोखिम से बचाने के लिए इन तकनीकों की भूमिका अहम हो सकती है। आइए जानते हैं खेती से जुड़े ऐसे पांच प्रमुख रुझानों के बारे में, जो 2027 में किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
1. जलवायु परिवर्तन और अल नीनो पर रहेगी नजर
मौसम में बदलाव खेती के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बारिश के बदलते पैटर्न, लंबे समय तक गर्मी और अत्यधिक तापमान का असर फसलों की पैदावार पर पड़ सकता है। अल नीनो जैसी मौसमी घटनाएं भी मानसून को प्रभावित कर सकती हैं, हालांकि इसका असर हर साल एक जैसा नहीं होता।
ऐसे में किसानों के लिए पानी का बेहतर प्रबंधन, कम पानी में तैयार होने वाली फसलें, सूखा सहन करने वाली किस्में और मौसम के अनुसार खेती की योजना बनाना महत्वपूर्ण होगा। जलवायु के अनुकूल खेती अपनाने से फसलों को मौसम के जोखिम से बचाने में मदद मिल सकती है।
2. संरक्षित खेती और फसल सुरक्षा का बढ़ेगा महत्व
बदलते मौसम में फसलों को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षित खेती की जरूरत बढ़ सकती है। इसमें पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, शेडनेट और कीटरोधी जाल जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। मल्च फिल्म से मिट्टी में नमी बनाए रखने और खरपतवार नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। वहीं, खेतों में तालाब बनाकर बारिश के पानी को जमा करना सिंचाई के लिए उपयोगी हो सकता है।
इन तकनीकों से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर करने की संभावना रहती है। हालांकि, इन्हें अपनाने से पहले लागत, स्थानीय मौसम, फसल की मांग और संभावित आमदनी का आकलन करना जरूरी है।
3. प्रति एकड़ कमाई बढ़ाने पर होगा जोर
खेती में खाद, बीज, कीटनाशक, मजदूरी और ऊर्जा की लागत बढ़ने से किसानों के लिए मुनाफा बनाए रखना चुनौती बन रहा है। ऐसे में केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय प्रति एकड़ शुद्ध आमदनी बढ़ाना अधिक महत्वपूर्ण होगा।
इसके लिए किसान बाजार की मांग के अनुसार फल, सब्जियां, मसाले और दूसरी अधिक मूल्य वाली फसलों की खेती पर विचार कर सकते हैं। फसल विविधीकरण, बेहतर सिंचाई प्रबंधन, मिट्टी की सेहत का ध्यान रखना और लागत का हिसाब रखना भी जरूरी होगा।
हालांकि, अधिक मूल्य वाली फसलों में मुनाफे की संभावना के साथ बाजार भाव में उतार-चढ़ाव और नुकसान का जोखिम भी रहता है। इसलिए फसल का चुनाव स्थानीय परिस्थितियों और बाजार की उपलब्धता को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
4. प्राकृतिक खेती के साथ AI और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल
प्राकृतिक खेती और खेती में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल आने वाले समय में अहम हो सकता है। प्राकृतिक खेती में रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया जाता है। इसके परिणाम फसल, मिट्टी, मौसम और अपनाई गई पद्धति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
दूसरी ओर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। भारत-विस्तार (Bharat-VISTAAR) जैसी पहल और एग्रीस्टैक (AgriStack) से जुड़े डिजिटल कृषि ढांचे का उद्देश्य कृषि सेवाओं और जानकारी तक पहुंच बेहतर बनाना है।
इन तकनीकों से किसानों को फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और खेती से जुड़े फैसले लेने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इनका लाभ तभी बढ़ेगा, जब किसानों को सही जानकारी, इंटरनेट और स्थानीय भाषा में सेवाएं उपलब्ध होंगी।
5. ड्रोन और प्रिसिजन फार्मिंग से खेती होगी अधिक सटीक
खेती में ड्रोन का इस्तेमाल फसलों पर कीटनाशक या अन्य स्वीकृत कृषि रसायनों के छिड़काव, खेतों की निगरानी और फसल की स्थिति का आकलन करने में किया जा सकता है। इससे कुछ काम कम समय में पूरे करने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है। प्रिसिजन फार्मिंग यानी सटीक खेती में खेत की जरूरत के अनुसार पानी, खाद और दूसरे कृषि इनपुट का इस्तेमाल किया जाता है। इससे अनावश्यक खर्च घटाने की संभावना रहती है।
ड्रोन खरीदना हर किसान के लिए आसान नहीं है। ऐसे में किराये पर ड्रोन और कृषि सेवाएं उपलब्ध कराने वाले केंद्र छोटे और सीमांत किसानों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। ड्रोन से छिड़काव करते समय निर्धारित नियमों, सुरक्षा निर्देशों और रसायनों के सही इस्तेमाल का पालन करना भी जरूरी है।
2027 में खेती का मंत्र: कम लागत, बेहतर प्रबंधन और जोखिम से बचाव
आने वाले समय में खेती का लक्ष्य केवल ज्यादा उत्पादन लेना नहीं, बल्कि उपलब्ध जमीन, पानी, ऊर्जा और दूसरे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके आमदनी बढ़ाना भी होगा। जलवायु के अनुकूल खेती, संरक्षित खेती, डिजिटल तकनीक और ड्रोन जैसी सुविधाएं इसमें मददगार हो सकती हैं। हालांकि, हर तकनीक हर किसान या हर क्षेत्र के लिए समान रूप से उपयोगी नहीं होगी। इसलिए नई तकनीक अपनाने से पहले उसकी लागत, स्थानीय जरूरत और संभावित लाभ का आकलन करना जरूरी है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।