विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Another Setback For Sugarcane Farmers Yogi Cabinet Announces No Price Hike Claims Payment Of 3 30 Lakh Crore

गन्ना किसानों को फिर झटका : योगी कैबिनेट में भाव बढ़ाने का एलान नहीं, ₹3.30 लाख करोड़ भुगतान का दावा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 09 Oct 2026 03:22 PM IST
सार

  • कैबिनेट बैठक में गन्ने के नए भाव पर कोई घोषणा नहीं हुई।
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ना किसानों को किए गए भुगतान का आंकड़ा साझा किया।
  • सरकार के मुताबिक, भुगतान से गन्ना किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली।
  • पेराई सत्र 2025-26 में अगेती प्रजातियों का एसएपी 400 रुपये और सामान्य प्रजातियों का 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को गन्ने के दाम बढ़ने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। लंबे समय से मूल्य वृद्धि की मांग कर रहे किसानों को कैबिनेट बैठक से निराशा हाथ लगी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में गन्ने का नया भाव घोषित नहीं किया। हालांकि, उन्होंने बताया कि प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान गन्ना किसानों को 3.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। सरकार के मुताबिक, इससे करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में गन्ना किसानों को 3 लाख 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। प्रदेश में फिलहाल 122 चीनी मिलें संचालित हैं। सरकार ने गन्ना किसानों को किए गए भुगतान को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया है।

उत्तर प्रदेश में गन्ना प्रमुख नकदी फसलों में से एक है। बड़ी संख्या में किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए इसकी खेती पर निर्भर हैं। गन्ने की आपूर्ति के बाद समय पर भुगतान मिलने से किसानों को खेती की लागत चुकाने, अगली फसल की तैयारी करने और परिवार की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है। ऐसे में गन्ने का उचित मूल्य और भुगतान में देरी किसानों के लिए अहम मुद्दे हैं।

पेराई सत्र 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश में अगेती गन्ना प्रजातियों का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजातियों का 390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। किसानों के लिए गन्ने का भाव उनकी आमदनी पर सीधा असर डालता है। लेकिन ताजा कैबिनेट बैठक में मूल्य वृद्धि को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई। ऐसे में किसानों की नजर अब सरकार के अगले फैसले पर रहेगी।

सरकार ने यह भी बताया कि अदालतों के आदेशों के बाद वर्षों से लंबित करीब 2,000 करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान की प्रक्रिया तेज की गई है। हालांकि, इस रकम में से अब तक कितना भुगतान किया जा चुका है और बाकी किसानों को पैसा कब तक मिलेगा, इसकी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और फसल क्षतिपूर्ति से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। सरकार के मुताबिक, 5 करोड़ 50 लाख किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से 13 लाख 42 हजार 978 करोड़ रुपये का फसल ऋण वितरित किया गया है।

इसके अलावा, 79 लाख 51 हजार किसानों को फसल क्षतिपूर्ति दिए जाने की जानकारी दी गई। फसल को प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से नुकसान होने पर मिलने वाली क्षतिपूर्ति किसानों को आर्थिक सहारा देती है। हालांकि, इस भुगतान की कुल राशि और संबंधित अवधि का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सड़क, रेल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास का भी जिक्र किया। सरकार के मुताबिक, करीब 60 हजार करोड़ रुपये की लागत से 2,483 किलोमीटर लंबे 42 राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है। बेहतर सड़क और परिवहन व्यवस्था से किसानों को अपनी उपज मंडियों, चीनी मिलों और दूसरे बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। खासकर गन्ना किसानों के लिए चीनी मिलों तक समय पर गन्ना पहुंचाना और आपूर्ति के बाद भुगतान मिलना महत्वपूर्ण है।

सरकार ने गन्ना भुगतान, कृषि ऋण और फसल क्षतिपूर्ति से जुड़े आंकड़े सामने रखे हैं, लेकिन गन्ने के दाम बढ़ाने को लेकर कोई नया फैसला घोषित नहीं किया गया। किसानों के लिए उचित मूल्य के साथ समय पर भुगतान और लंबित बकाये का निपटारा भी जरूरी है। अब देखना होगा कि सरकार आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी पर कब फैसला लेती है।
विज्ञापन
विज्ञापन