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Amit Shah Launches White Revolution 2 0 With Three New Dairy Cooperatives
White Revolution 2.0 : श्वेत क्रांति 2.0 के तहत की जाएगी तीन नई डेयरी सहकारी समितियों की शुरुआत
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 21 May 2025 01:16 AM IST
सार
White Revolution 2.0 : केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 'श्वेत क्रांति 2.0' के तहत सहकारी डेयरी क्षेत्र के लिए तीन नई बहुराज्यीय समितियों की घोषणा की है। शाह ने कहा कि अब समय आ गया है कि ‘श्वेत क्रांति 2.0’ को केवल दुग्ध उत्पादन तक सीमित न रखकर इसे सतत और चक्रीय अर्थव्यवस्था का केंद्रबिंदु बनाया जाए।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह
- फोटो : पीआईबी
White Revolution 2.0 : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारी डेयरी क्षेत्र में टिकाऊ विकास और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में तीन नई बहुराज्यीय सहकारी समितियों की स्थापना का एलान किया गया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बैठक में केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल सिंह गुर्जर, मुरलीधर मोहोल, सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष भूटानी, NDDB के अध्यक्ष डॉ मीनेश शाह और नाबार्ड के चेयरमैन शाजी के.वी. मौजूद थे।
ये तीन प्रमुख बहुराज्यीय समितियां बनेंगी
पहली समिति पशु आहार निर्माण, रोग नियंत्रण और कृत्रिम गर्भाधान पर काम करेगी।
दूसरी समिति गोबर प्रबंधन मॉडल विकसित करने के लिए काम करेगी।
तीसरी समिति मृत मवेशियों के अवशेषों के सर्क्युलर उपयोग को बढ़ावा देने पर काम करेगी।
शाह ने कहा कि अब समय आ गया है कि ‘श्वेत क्रांति 2.0’ को केवल दुग्ध उत्पादन तक सीमित न रखकर इसे सतत और चक्रीय अर्थव्यवस्था का केंद्रबिंदु बनाया जाए।
कार्बन क्रेडिट से किसानों को लाभ
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब किसानों को कार्बन क्रेडिट का सीधा लाभ मिलना चाहिए और इसके लिए वैज्ञानिक मॉडल विकसित किए जाएंगे। साथ ही, दुग्ध संघों और सहकारी समितियों को सशक्त करने की बात भी कही गई, ताकि फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिल सके।
सहकारी मॉडल से ग्रामीण सशक्तिकरण
अमित शाह ने बताया कि सहकारिता केवल आर्थिक संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास का मूलमंत्र है। डेयरी सहकारी समितियां छोटे किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को आजीविका, ऋण, पशु चिकित्सा जैसी सेवाएं उपलब्ध कराकर समग्र विकास में योगदान कर रही हैं।
टिकाऊ विकास से चक्रीय अर्थव्यवस्था का सफर
शाह ने कहा कि वह कार्य जो निजी क्षेत्र करता रहा है, वह अब किसानों की खुद की सहकारी संस्थाएं करेंगी। इसमें पशु आहार, कृत्रिम गर्भाधान, गोबर प्रबंधन, और डेयरी प्रोसेसिंग जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।
उन्होंने अमूल जैसे मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि “सहकारिता में सहकार” के माध्यम से प्रधानमंत्री का “विकसित भारत” लक्ष्य साकार होगा।
नीति निर्माण से गांव तक
बैठक में यह भी कहा गया कि सहकारिता मंत्रालय, मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, NDDB, NABARD और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) मिलकर ग्राम स्तर तक नीतियों को पहुंचा रहे हैं।
शाह ने NDDB द्वारा विकसित बायोगैस और गोबर प्रबंधन कार्यक्रमों की भी सराहना की और इन्हें राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की आवश्यकता जताई।
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