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चीनी और इथेनॉल से आगे बढ़ें मिलें : गन्ने के अपशिष्ट से बनाएं महंगे उत्पाद, बढ़ाएं कमाई

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 22 Oct 2026 04:34 PM IST
सार

  • सिर्फ चीनी और इथेनॉल पर्याप्त नहीं: चीनी उद्योग को लंबे समय तक मुनाफे में बने रहने के लिए नए उत्पादों की ओर बढ़ने की जरूरत है।

  • गन्ने के अपशिष्ट से कमाई: कृषि अवशेषों से उपयोगी उत्पाद बनाकर अतिरिक्त आमदनी के स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।

  • चार नए उत्पादों पर जोर: CBG, बायोप्लास्टिक, सतत विमानन ईंधन (SAF) और आइसो-ब्यूटेनॉल की संभावनाएं तलाशने की सलाह।

गन्ने की फसल
गन्ने की फसल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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चीनी और इथेनॉल के उत्पादन पर निर्भर रहकर चीनी उद्योग लंबे समय तक मुनाफा नहीं कमा सकता। बदलते बाजार और नीतिगत परिस्थितियों को देखते हुए चीनी मिलों को अब गन्ने और कृषि अपशिष्ट से अधिक कीमत वाले उत्पाद बनाने पर ध्यान देना होगा। इससे बेकार समझे जाने वाले कृषि अवशेषों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और उद्योग की कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।

राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई), कानपुर के पूर्व निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने चीनी उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके साथ ही उद्योग को नए उत्पादों और तकनीकों में निवेश करने की जरूरत है।

इथेनॉल पर निर्भरता से बढ़ सकती हैं चुनौतियां
गन्ने की उपलब्धता और चीनी उत्पादन की स्थिति को देखते हुए इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे के इस्तेमाल पर लगने वाली पाबंदियां डिस्टिलरियों को प्रभावित कर सकती हैं। इससे उनकी उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना और कमाई बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।

ऐसे में चीनी मिलों को केवल चीनी और इथेनॉल तक सीमित रहने के बजाय दूसरे उत्पादों के विकल्प भी तैयार करने होंगे। इससे किसी एक उत्पाद या सरकारी नीति पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

गन्ने और कृषि अपशिष्ट से बन सकते हैं नए उत्पाद
प्रो. नरेंद्र मोहन ने चीनी मिलों और डिस्टिलरियों को कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी), बायोप्लास्टिक, सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) और आइसो-ब्यूटेनॉल जैसे उत्पादों की संभावनाएं तलाशने की सलाह दी।

इन उत्पादों के बारे में आसान भाषा में समझें:
  • कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG): जैविक कचरे और कृषि अवशेषों से बनने वाली गैस, जिसका इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जा सकता है।
  • बायोप्लास्टिक: जैविक स्रोतों से बनाया जाने वाला प्लास्टिक, जो कुछ परिस्थितियों में पारंपरिक प्लास्टिक का विकल्प बन सकता है।
  • सतत विमानन ईंधन (SAF): विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला ऐसा ईंधन, जिसे उपयुक्त जैविक या अन्य वैकल्पिक स्रोतों से बनाया जा सकता है।
  • आइसो-ब्यूटेनॉल: एक तरह का अल्कोहल, जिसका इस्तेमाल ईंधन और रसायन उद्योग में किया जा सकता है।

अपशिष्ट को कमाई का जरिया बनाने की जरूरत
प्रो. मोहन ने कहा कि चीनी मिलों और डिस्टिलरियों को कृषि अपशिष्ट को बेकार सामग्री मानने के बजाय उससे उपयोगी उत्पाद बनाने की रणनीति अपनानी चाहिए। इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है और उद्योग के लिए कमाई के अतिरिक्त स्रोत विकसित किए जा सकते हैं।

हालांकि, इन उत्पादों के व्यावसायिक उत्पादन के लिए तकनीक, निवेश, बाजार की मांग और उपलब्ध कच्चे माल का आकलन करना जरूरी होगा। नए विकल्पों पर काम करने से चीनी उद्योग को बदलती परिस्थितियों में अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
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