अमेरिका-ईरान तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और अब अल नीनो ने वैश्विक खाद्य बाजार पर खराब असर डाला है। दूसरी तरफ मध्य-पूर्व के देशों में खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसका फायदा पंजाब के बासमती निर्यातकों और किसानों को मिल रहा है। दरअसल, ये देश वर्तमान में प्रमुख खाद्य उत्पादों का भंडारण करने में जुटे हैं, जिससे भारत के बासमती चावल की मांग में तेजी से बढ़ोतरी आई है।
शिपिंग का तरीका बदला, लागत में आई कमी
मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं से बचने के लिए अब बासमती के निर्यात के तरीके में बदलाव किया गया है। समुद्री माल ढुलाई के ऊंचे खर्च और बंदरगाहों पर होने वाली देरी से बचने के लिए बड़े आयातक और भारतीय निर्यातक अब कंटेनर शिपिंग के बजाय बल्क और ब्रेक-बल्क जहाजों का उपयोग कर रहे हैं। व्यापारिक रिपोर्टों के अनुसार, थोक में माल भेजने पर लागत 75 से 100 अमेरिकी डॉलर प्रति टन आ रही है, जो कंटेनर बुकिंग की तुलना में काफी किफायती है। सऊदी अरब, यमन और इराक जैसे प्रमुख बाजारों के लिए अब इसी माध्यम से बड़ी खेप भेजी जा रही है।
पूसा-1509 धान की कीमतों में तेजी
पंजाब के निर्यातकों का कहना है कि बासमती चावल की मांग बढ़ने से मंडियों में खरीद और भाव में तेजी आई है, जिसका असर भाव पर दिख रहा है। बीते सीजन में पूसा-1509 धान का औसत रेट लगभग तीन हजार रुपये था, जो अब बढ़कर 4 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है।
बाजार में अनिश्चितता के संकेत
हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि कीमतों में आई यह मजबूती हमेशा बनी रहेगी, ऐसा कहना मुश्किल है। जोसन के अनुसार, यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, नई फसल की उपलब्धता बढ़ती है या समुद्री भाड़े की दरों में गिरावट आती है, तो बाजार की दिशा बदल सकती है। फिलहाल, निर्यातकों और किसानों के लिए यह दौर काफी लाभकारी बना हुआ है।