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Less Rain El Nino Increase Problems Rabi These Measures Save Crops From Heat And Drought
El Niño: कम बारिश और अल नीनो बढ़ाएंगे रबी की मुश्किलें, गर्मी-सूखे से फसलों को बचाएंगे ये उपाय
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 08 Nov 2026 10:44 AM IST
सार
रबी सीजन 2026-27 में कम बारिश और अल नीनो से गेहूं, चना और सरसों की फसलों पर गर्मी और सूखे का खतरा है। जानें जैविक उत्पाद और बायोस्टिमुलेंट किस तरह फसलों को बचाने में मदद कर सकते हैं।
इस बार रबी सीजन 2026-27 में किसानों के सामने मौसम की बड़ी चुनौती रहने वाली है। दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 13 फीसदी कम रहा है। इसके साथ ही अल नीनो (El Niño) के प्रभाव से आने वाले महीनों में मौसम ज्यादा गर्म और शुष्क रहने की आशंका है। ऐसे में गेहूं, चना और सरसों जैसी रबी फसलों की पैदावार पर असर पड़ सकता है।
बिजनेस लाइन में पब्लिश बायोप्राइम एग्रीसॉल्यूशन के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रविन सलूजा रिपोर्ट के अनुसार, कम बारिश के कारण कई इलाकों में मिट्टी में नमी की कमी है और जलाशयों में भी पानी का स्तर घटा हुआ है। मौसम के जानकारों ने गेहूं की फसल में दाने बनने और भरने के समय तेज गर्मी पड़ने का खतरा जताया है। वहीं, बारिश पर निर्भर चना और सरसों की फसलों को बुवाई के समय से ही नमी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
पिछले खरीफ सीजन में भी किसानों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ऐसे में इस बार किसान खेती में अतिरिक्त खर्च करने से पहले यह देखना चाहेंगे कि किसी उत्पाद से उन्हें वास्तव में कितना फायदा मिल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जैविक उत्पाद (Biologicals) फसलों को गर्मी और सूखे के तनाव से बचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इनके इस्तेमाल से पहले वैज्ञानिक प्रमाण और खेतों में मिले नतीजों को देखना जरूरी है।
गर्मी और सूखे से पौधों पर कैसे पड़ता है असर?
गर्मी और पानी की कमी होने पर पौधों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। उन्हें पानी बचाने के साथ-साथ भोजन बनाने की प्रक्रिया यानी प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) भी जारी रखनी होती है। इस दौरान पौधों की कोशिकाओं में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) नाम के हानिकारक तत्व बढ़ सकते हैं। इनकी अधिकता से कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है और पत्तियां समय से पहले सूखने लगती हैं। इसका सीधा असर फसल की बढ़वार और पैदावार पर पड़ सकता है।
गेहूं में दाने भरने के समय तापमान बढ़ने से उत्पादन घटने का खतरा रहता है। ऐसे में ऐसे जैविक उत्पाद उपयोगी हो सकते हैं, जो पौधों की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने, जड़ों का विकास बढ़ाने और पानी के बेहतर इस्तेमाल में मदद करें।
जैविक उत्पाद तीन तरीकों से कर सकते हैं मदद
कुछ जैविक उत्पाद और बायोस्टिमुलेंट (Biostimulants) फसलों को मौसम की मार से बचाने में तीन प्रमुख तरीकों से मदद कर सकते हैं।
1- जड़ों का विकास बढ़ाकर नमी तक पहुंच आसान बनाना
फसलों की जड़ें जितनी अच्छी तरह विकसित होंगी, वे मिट्टी से पानी और पोषक तत्व उतनी बेहतर तरीके से ले सकेंगी। लाभकारी सूक्ष्मजीवों, समुद्री शैवाल से बने उत्पादों और ह्यूमिक एसिड के मिश्रण से जड़ों की शाखाओं का विकास बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI) के 2024 के एक फील्ड ट्रायल में गेहूं की जड़ों की लंबाई में करीब 27 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे पौधों को मिट्टी से नमी और पोषक तत्व लेने के लिए ज्यादा क्षेत्र मिल सकता है।
2- मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का बेहतर इस्तेमाल
कई बार मिट्टी में फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, लेकिन पौधे उनका पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाते। ऐसे में फॉस्फेट घोलने और पोटाश उपलब्ध कराने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीव मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, समुद्री शैवाल से बने कुछ बायोस्टिमुलेंट पौधों में पोषक तत्वों के अवशोषण और उनके एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट में समुद्री शैवाल डर्विलिया (Durvillaea) और वनस्पति आधारित बायोस्टिमुलेंट पर दो सीजन तक किए गए अध्ययन में पोषक तत्वों के अवशोषण में 15 से 25 फीसदी तक सुधार दर्ज किया गया। इस दौरान पैदावार और गुणवत्ता पर नकारात्मक असर नहीं पड़ा।
3- गर्मी और सूखे से लड़ने की क्षमता बढ़ाना
गर्मी और पानी की कमी के दौरान पौधों की कोशिकाओं में नुकसान पहुंचाने वाले तत्व बढ़ने लगते हैं। इससे बचाव के लिए पौधे कुछ खास एंजाइम बनाते हैं। इनमें सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज, कैटालेज और पेरोक्सीडेज शामिल हैं। ये एंजाइम हानिकारक तत्वों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
कुछ बायोस्टिमुलेंट पौधों में इन एंजाइम की सक्रियता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, प्रोलिन और ग्लाइसिन बीटेन जैसे तत्व कोशिकाओं में पानी का संतुलन बनाए रखने और उन्हें नुकसान से बचाने में भूमिका निभाते हैं।
कुछ लाभकारी बैक्टीरिया में एसीसी-डीएमिनेज (ACC-deaminase) नाम का एंजाइम होता है। यह तनाव की स्थिति में बनने वाले एथिलीन हार्मोन के स्तर को कम करने में मदद करता है। इस हार्मोन की अधिकता से पत्तियां जल्दी बूढ़ी और सूखी हो सकती हैं। इसका स्तर नियंत्रित रहने से पौधे ज्यादा समय तक भोजन बनाने की प्रक्रिया जारी रख सकते हैं।
जैविक उत्पाद खरीदते समय किसान किन बातों का रखें ध्यान?
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में उपलब्ध हर जैविक उत्पाद फसल के लिए समान रूप से उपयोगी नहीं होता। किसानों को इन उत्पादों की गुणवत्ता और वैज्ञानिक प्रमाणों की जांच करनी चाहिए।
1- उत्पाद की गुणवत्ता और असर की जांच करें
सूक्ष्मजीव आधारित उत्पादों में लाभकारी बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीवों का जीवित रहना जरूरी है। उनकी संख्या उत्पाद की पूरी एक्सपायरी अवधि तक तय मानकों के अनुसार होनी चाहिए। इसी तरह बायोस्टिमुलेंट में सक्रिय तत्वों की मात्रा हर बैच में एक जैसी होनी चाहिए।
2- फसल की अवस्था के अनुसार करें इस्तेमाल
हर फसल और उसके विकास की अवस्था के हिसाब से उत्पाद का इस्तेमाल अलग हो सकता है। इसलिए किसान केवल सामान्य सलाह के आधार पर इनका प्रयोग न करें। उत्पाद की मात्रा, छिड़काव या इस्तेमाल का समय और दूसरे कृषि उत्पादों के साथ उसकी अनुकूलता की जानकारी जरूर लें। राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अध्ययन में बेहतर नतीजे पाने के लिए बायोस्टिमुलेंट का इस्तेमाल फसल में कल्ले निकलने और बालियां आने की अवस्था के अनुसार किया गया था।
3- खर्च और फायदे का हिसाब लगाएं
किसानों को किसी भी उत्पाद का इस्तेमाल करने से पहले यह देखना चाहिए कि उससे मिलने वाला संभावित फायदा उसकी खरीद और इस्तेमाल पर होने वाले खर्च से ज्यादा है या नहीं। इसके लिए पैदावार के साथ फसल की गुणवत्ता और कुल लागत का भी हिसाब लगाना जरूरी है।
ध्यान रखें कि बायोस्टिमुलेंट पानी और जरूरी पोषक तत्वों का विकल्प नहीं हैं। ये फसल प्रबंधन की एक अतिरिक्त मदद हो सकते हैं, लेकिन सिंचाई, खाद और दूसरी जरूरी कृषि गतिविधियों का स्थान नहीं ले सकते।
रबी सीजन में खेतों पर परीक्षण के बाद ही अपनाएं उत्पाद
रबी 2026-27 में मौसम की चुनौतियों को देखते हुए किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर किए गए खेत परीक्षण काफी महत्वपूर्ण होंगे। इससे पता चल सकेगा कि कौन-सा जैविक उत्पाद किस फसल, मिट्टी और मौसम में बेहतर परिणाम दे रहा है।
कंपनियों को अपने उत्पादों के प्रभाव से जुड़े वैज्ञानिक आंकड़े और फसल की अवस्था के अनुसार इस्तेमाल की जानकारी किसानों को देनी चाहिए। वहीं, किसानों को केवल विज्ञापनों या बड़े-बड़े दावों पर भरोसा करने के बजाय प्रमाणित उत्पादों और उनके वास्तविक नतीजों को प्राथमिकता देनी चाहिए। आखिरकार, इस रबी सीजन में अच्छी पैदावार के लिए सही फसल प्रबंधन, उपलब्ध पानी का बेहतर इस्तेमाल और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित कृषि तकनीकों को अपनाना जरूरी होगा।
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