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India-US Trade Deal: भारत के लिए क्यों जरूरी थी यह डील, किसे और कैसे मिलेगा फायदा? जानें

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 09 Feb 2026 01:39 PM IST
सार

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से उन आशंकाओं पर विराम लगता है, जिनमें कहा जा रहा था कि अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पादों के आयात से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता है। सरकार की इस नीति के चलते कोर फसलों और डेयरी सेक्टर पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। 

भारत और अमेरिका के बीच अभी यह अंतरिम व्यापारिक डील है।
भारत और अमेरिका के बीच अभी यह अंतरिम व्यापारिक डील है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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भारत-अमेरिका के बीच हुआ अंतरिम व्यापार समझौता किसानों के बीच चिंता और भ्रम दोनों पैदा कर रहा है। सवाल साफ है- क्या यह समझौता भारतीय किसान के हित में है या भविष्य में खतरा बन सकता है? जवाब एकतरफा नहीं, बल्कि सेक्टर-वाइज समझना जरूरी है। आइए इसी को लेकर केडिया एडवाइजरी के संस्थापक एवं निदेशक अजय सुरेश केडिया से समझते हैं इस डील के बारे में...  

अजय कहते हैं कि भारत और अमेरिका के बीच जिस समझौते की हालिया दिनों में चर्चा हो रही है, वह कोई पूर्ण ट्रेड डील नहीं बल्कि एक अंतरिम (Interim) व्यापार समझौता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह डील भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम थी, खासकर उस दौर में जब अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रम्प का दबदबा और आक्रामक टैरिफ नीति चर्चा में रही है।

ट्रम्प फैक्टर और भारत की रणनीति
उनका मानना है कि अगर भारत यह अंतरिम डील नहीं करता, तो अमेरिका की ओर से अतिरिक्त दबाव बनाया जा सकता था। कनाडा और चीन के उदाहरण सामने हैं, जहां ट्रेड विवाद के बीच ट्रम्प ने 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की धमकी दी। भारत ने इस स्थिति से बचने के लिए संतुलित रणनीति अपनाई। यूरोप, मिडिल ईस्ट, साउथ एशिया के साथ पहले ही एफटीए (Free Trade Agreements) साइन कर लिए गए थे, जिससे भारत ने अपने विकल्प खुले रखे।

75 से 100 फीसदी तक पहुंच सकता था टैरिफ
वे कहते हैं कि डील से पहले भारतीय उत्पादों पर प्रभावी टैरिफ 25 फीसदी था, लेकिन अगर इसमें रूसी तेल, ब्रिक्स देशों और ईरान से जुड़े कारकों को जोड़ा जाता, तो यह 75 से 100 फीसदी तक पहुंच सकता था। इस अंतरिम समझौते से अमेरिका के साथ करीब 40-45 अरब डॉलर के ट्रेड सरप्लस का रास्ता दोबारा खुल गया है।

ब्लैंकेट FTA नहीं, बल्कि सोच-समझकर की गई डील
उन्होंने बताया कि यह समझौता कोई खुला-खुला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट नहीं है, बल्कि Carefully Negotiated Interim Deal है। इससे भारत के कई मजबूत निर्यात सेक्टर सुरक्षित रहे हैं, जिनमें फार्मा, टेक्सटाइल, लेदर और एपेरल, इलेक्ट्रॉनिक्स, प्रोसेस्ड फूड शामिल हैं। 

500 अरब डॉलर का खरीद प्रतिबद्धता समझौता
डील के तहत भारत ने अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के सामान की खरीद की प्रतिबद्धता जताई है। इससे ऊर्जा क्षेत्र, एयरक्राफ्ट और एविएशन पार्ट्स, एडवांस टेक्नोलॉजी, GPU और सेमीकंडक्टर, कीमती धातु, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग और MSME सप्लाई चेन को लाभ मिलेगा। 

कृषि और डेयरी पूरी तरह सुरक्षित
उन्होंने बताया कि इस अंतरिम डील का सबसे अहम पहलू यह है कि संवेदनशील कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह प्रोटेक्ट किया गया है। भारत ने साफ किया है कि दूध और डेयरी उत्पाद, मीट और पोल्ट्री, गेहूं, चावल, शुगर, दालें, मसाले, सब्जियां और फल आदि इन उत्पादों पर कोई टैरिफ रियायत नहीं दी जाएगी। इससे देश के छोटे और सीमांत किसान सुरक्षित रहेंगे। 

सीमित कृषि आयात, सख्त शर्तों के साथ
इस डील में कुछ गैर-संवेदनशील कृषि आयातों को अनुमति दी गई है, जैसे एनिमल फीड, डीडीजीएस, रेड सॉरगम, सोयाबीन ऑयल, वाइन और अल्कोहल आदि उत्पादों पर कोई टैरिफ रियायत नहीं दी जाएगी। उनका कहना है, "लेकिन शर्त बिल्कुल स्पष्ट है, No GM Crops, No Staple Food Imports" 

सोयाबीन और फीड इंडस्ट्री पर हल्का दबाव संभव
एकमात्र संभावित जोखिम फीड इंडस्ट्री से जुड़ा दिखता है। दिसंबर से जनवरी के बीच सोयाबीन कीमतों में 18% की तेजी आई थी। ट्रेड टेंशन के कारण अब थोड़ी बहुत गिरावट संभव है। हालांकि यह असर सीमित रहने की उम्मीद है।

एक्सपोर्ट मजबूत, GDP मोमेंटम बरकरार
अजय सुरेश केडिया का मानना है कि इस अंतरिम डील से भारत का निर्यात मजबूत रहेगा, कृषि और डेयरी सुरक्षित रहेंगी, MSME और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, GDP ग्रोथ का 7% के आसपास का मोमेंटम बना रहेगा। चार-छह महीने बाद इस डील की समीक्षा की जा सकती है, लेकिन फिलहाल भारत ने एक संवेदनशील और रणनीतिक अध्याय को सुरक्षित तरीके से बंद किया है।
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