Home›Gaon Post›Drishtikon›
Bandi Chhor Divas The Sikh Festival Of Liberation Celebrated Alongside Diwali
दीपावली पर सिख मनाते हैं बंदी छोड़ दिवस: मुक्ति की कहानी, जब गुरु हरगोबिंद साहिब ने 52 राजाओं को दिलाई आजादी
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Sun, 08 Nov 2026 11:54 AM IST
सार
बंदी छोड़ दिवस पर गुरुद्वारों में अखंड पाठ, कीर्तन और नगर कीर्तन आयोजित किए जाते हैं। श्री हरिमंदिर साहिब में दीपमाला के साथ आतिशबाजी भी होती है। इस तरह सिख समुदाय के लिए दीपावली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि दूसरों की मुक्ति, उदारता और सबको साथ लेकर चलने की भावना को याद करने का अवसर भी है।
बंदी छोड़ दिवस से जुड़ी एक प्रसिद्ध सिख परंपरा 52 कलियों वाले चोले की है।
- फोटो : एआई
बंदी छोड़ दिवस सिख समुदाय का महत्वपूर्ण पर्व है, जो दीपावली के अवसर पर मनाया जाता है। यह गुरु हरगोबिंद साहिब जी की ग्वालियर किले से रिहाई और उनके साथ 52 बंदी राजाओं की मुक्ति की याद दिलाता है।अमृतसर में दीप जलाकर गुरु जी का स्वागत किए जाने की परंपरा से यह दिन दीपावली से जुड़ गया। इस अवसर पर गुरुद्वारों में दीपमाला, कीर्तन, अखंड पाठ और नगर कीर्तन होते हैं।
दीपावली आते ही घर-आंगन दीयों की रोशनी से जगमगा उठते हैं। अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब में भी इस अवसर पर दीपमाला की अनूठी छटा दिखाई देती है। लेकिन सिख समुदाय के लिए दीपावली की यह रोशनी एक ऐतिहासिक घटना की याद भी लेकर आती है। इसी दिन सिख बंदी छोड़ दिवस मनाते हैं। यह पर्व सिखों के छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी की रिहाई और उनके साथ 52 बंदी राजाओं की मुक्ति की स्मृति से जुड़ा है।
गुरु की रिहाई से जुड़ी है परंपरा
सिख परंपरा के अनुसार, मुगल बादशाह जहांगीर के शासनकाल में गुरु हरगोबिंद साहिब जी को ग्वालियर के किले में बंदी बनाया गया था। वहां पहले से कई राजा भी कैद थे। सिखों के लगातार प्रयासों और सूफी संत साईं मियां मीर सहित कुछ प्रभावशाली लोगों की पहल के बाद गुरु जी की रिहाई का रास्ता बना।
गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने अकेले जेल से बाहर आने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक उनके साथ बंदी बनाए गए दूसरे राजाओं को भी मुक्त नहीं किया जाता, वे रिहा नहीं होंगे। आखिरकार जहांगीर ने उनकी बात मान ली।
52 कलियों वाले चोले की कथा
बंदी छोड़ दिवस से जुड़ी एक प्रसिद्ध सिख परंपरा 52 कलियों वाले चोले की है। कथा के अनुसार, जहांगीर ने शर्त रखी कि गुरु जी के वस्त्र को जितने राजा पकड़कर बाहर आ सकेंगे, उन्हें ही रिहा किया जाएगा। तब गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने 52 कलियों वाला विशेष चोला धारण किया। हर राजा ने उसकी एक-एक कली पकड़ी और इस तरह सभी 52 राजा उनके साथ किले से बाहर आ गए। इसी घटना के बाद गुरु जी को 'बंदी छोड़ दाता' कहा जाने लगा।
दीपों से हुआ था गुरु का स्वागत
ग्वालियर के किले से रिहाई के बाद गुरु हरगोबिंद साहिब जी दीपावली के अवसर पर अमृतसर पहुंचे। उनके स्वागत में श्री हरिमंदिर साहिब और शहर में दीप जलाए गए। इसी परंपरा की याद में दीपावली के दिन श्री हरिमंदिर साहिब को रोशनी और दीपों से सजाया जाता है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।