इस साल कम मानसूनी बारिश के चलते देश के कई हिस्सों में चारे की सप्लाई पर दबाव आने का खतरा है। इस चुनौती से निपटने के लिए कृषि वैज्ञानिक मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में नागफनी उत्पादन को बढ़ावा देने की सलाह दे रहे हैं। बता दें कि नागफनी बिना कांटे वाला कैक्टस होता है, जिसका उपयोग पशु चारे में किया जाता है।
मराठवाड़ा में चारे का मौजूदा संकट
मराठवाड़ा की बात करें तो यहां कुल 53.6 लाख पशु हैं, जिनमें 6.5 लाख बछड़े, 26.5 लाख बड़े पशु और 20.6 लाख भेड़-बकरियां शामिल हैं। इन पशुओं के लिए हर दिन लगभग 20,125 टन चारे की आवश्यकता होती है। प्रशासन के अनुसार, सितंबर के आखिर तक क्षेत्र में चारे की उपलब्धता 44.8 लाख टन आंकी गई थी, लेकिन लंबे समय तक सूखे हालात रहने से यह स्टॉक तेजी से खत्म हो सकता है।
इसे सहायक चारे के नजरिए से देखना चाहिए
जानकारों के अनुसार, यह पौधा बहुत कम पानी में जीवित रह सकता है और सूखे के दौर में भी यह नमी से भरपूर चारा का स्रोत होता है। जब पारंपरिक हरा चारा उगाना मुश्किल हो जाता है, तब कैक्टस पशुओं के लिए भोजन और पानी दोनों की कमी को एक साथ पूरा कर सकता है। इसके मोटे पत्तों में पानी जमा रहता है। हालांकि, इसे पारंपरिक चारे की पूरी तरह से जगह लेने वाला नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह सूखे के समय एक 'इमरजेंसी रिजर्व' या सहायक चारे के रूप में काम करेगा।
सरकार से कैक्टस की खेती को बढ़ावा देने की अपील
भाजपा सांसद डॉ. अजीत गोपचड़े ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पूरे मराठवाड़ा में कैक्टस की खेती को बढ़ावा देने की अपील की है। सांसद गोपचड़े के अनुसार, कैक्टस कम बारिश में भी उग सकता है। चारे की सुरक्षा के अलावा इससे बायोगैस और जैविक खाद बनाने की भी काफी संभावनाएं हैं।
सांसद ने इस खेती को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से जोड़ने का सुझाव दिया है, जिसके तहत बंजर और कम बारिश वाली जमीन पर पौधारोपण किया जाता है।
बंजर जमीन और खेतों की मेड़ पर उगाने की सलाह
विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान बिना कांटे वाले कैक्टस को खेतों की मेड़ पर या बंजर जमीन पर उगा सकते हैं। इसे घास के साथ या सीताफल, आंवला और बेर के बागों के साथ भी उगाया जा सकता है। कुलपति इंद्र मणि ने कहा कि इसे बंजर जमीन और खेतों की सीमाओं पर सामूहिक रूप से भी उगाया जा सकता है और कृषि विश्वविद्यालय इसके व्यावसायिक लाभ के लिए निजी कंपनियों और एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने की योजना बना रहा है।
देश-विदेश के सफल प्रयोग
यह विचार नया नहीं है। मैक्सिको, ब्राजील और अमेरिका जैसे देश लंबे समय से सूखे के दौरान पशुओं के लिए कैक्टस का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। भारत में भी बड़े शोध संस्थानों ने बिना कांटे वाले कैक्टस के सफल परीक्षण किए हैं।