गाय -भैंस पालक किसानों को रेबीज रोग बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। इससे निपटने का मात्र एक तरीका है, अपने पशुओं पर पैनी नजर बनाए रखें। संक्रमित कुत्ता, बंदर नेवला जैसे जानवर आपकी गाय-भैंस को काटकर रेबीज फैला सकता है। समय पर पहचान न होने पर पशुओं की मौत तक हो सकती है।
जानकारों के अनुसार, रेबीज पहले से संक्रमित जानवर की लार में मौजूद होता है। अगर संक्रमित जानवर पशु को काटता है, तो यह पशु के शरीर में प्रवेश कर जाता है और नसों के माध्यम से सीधे मस्तिष्क तक पहुंचता है। जानकारों का कहना है कि खासतौर से खुले इलाकों और जंगलों में चराई के लिए जाने वाले पशुओं को रेबीज होने का अधिक खतरा रहता है।
रेबीज की जद में आने वाले पशु अचानक बेचैन, घबराया हुआ या असामान्य रूप से आक्रामक हो जाते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, पशु की मांसपेशियों में कंपन या झटके आने लगते हैं। वह लड़खड़ाकर चलने लगता है, उसके शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और धीरे-धीरे लकवा मार जाता है। आखिर में पशु की मृत्यु हो जाती है।
इस चुनौती से बचने के लिए किसानों को पशुओं पर नजर रखनी होगी। किसी कुत्ते आदि जानवर के काटने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क साधें। इसके अलावा आवारा और पालतू कुत्तों का टीकाकरण कराना एक समझदारी का काम हो सकता है। वहीं, रात के समय पशुओं को खुले में छोड़ने से बचें।
किसानों को संक्रमित पशु की लार को नंगे हाथों से नहीं छूना चाहिए। ऐसे पशुओं की देखभाल के समय दस्ताने और दूसरे सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें। अगर आपकों कोई एसे पशु काट ले, खरोंच दे या उसी लार किसी घाव, आख, नाक या मुंह ेक संपर्क में आ जाए, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। जानकारों ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि काटने के घाव पर मिर्च, तेल, मिट्टी, राख, जड़ी-बूटी या कोई भी घरेलू नुस्खा बिल्कुल न लगाएं, क्योंकि इससे इलाज में देरी होती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।